2014 के पांच सबसे बड़े एनकाउंटर, पढ़िए खबर
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जम्मू-कश्मीर में इस साल सुरक्षा बलों ने जहां 102 आतंकियों को ढेर कर दिया, वहीं आपरेशन के दौरान सेना के 29 जवान शहीद हो गए। 47 आतंकी गिरफ्तार किए गए, जबकि एक आतंकी ने आपरेशन के दौरान आत्मसमर्पण किया। सैन्य पीआरओ कर्नल एसडी गोस्वामी के अनुसार विधानसभा चुनाव को बाधित करने के उद्देश्य से कई बार आतंकियों द्वारा घुसपैठ के प्रयास किए गए, लेकिन सेना ने तमाम प्रयासों को विफल कर दिया।
एलओसी और आंतरिक इलाके में सेना ने आपरेशन के दौरान अलग-अलग तरह के 394 हथियार बरामद किए। 15 बार आईईडी लगाई गई, लेकिन हर बार सेना ने किसी बड़े हादसे के पहले ही आतंकियों की इस करतूत को नाकाम कर दिया। जम्मू कश्मीर में इस साल जवाबी आतंकी हमले में सेना ने अपने 29 जांबाज गंवाए और 45 गंभीर रूप से जख्मी हुए।
सेना अराजनैतिक बल है और चुनावी प्रक्रिया में वह सीधे तौर पर शामिल नहीं होती, लेकिन निष्पक्ष चुनाव करवाने के लिए सेना ने सुरक्षात्मक माहौल तैयार करने में अहम भूमिका अदा की। वर्ष 2014 में जम्मू-कश्मीर से लगती अंतरराष्ट्रीय सीमा और लाइन आफ कंट्रोल पर पाकिस्तान की ओर से 562 बार सीजफायर का उल्लंघन किया गया। 2003 के बाद सीजफायर का यह सबसे ज्यादा उल्लंघन हैं।
अगस्त से अक्तूबर माह में इंडो पाक बार्डर पर सबसे ज्यादा दिनों तक गोलाबारी हुई, जिसमें दो सुरक्षाकर्मियों सहित 13 लोग ने जान गंवाई। हजारों लोग विस्थापित हुए। सीमावर्ती इलाकों में कई बार पाक की ओर से नागरिकों पर बार्डर एक्शन टीम (बैट) और स्नाइपर हमले किए गए। अंतरराष्ट्रीय सीमा पर 410 और एलओसी पर 152 बार सीजफायर का उल्लंघन हुआ।
इसमें पांच जवानों सहित 19 लोग की मौत हो गई। डेढ़ सौ से ज्यादा घायल हुए। गोलाबारी में पालतू पशु भी मारे गए। नार्दर्न कमांड के पीआरओ कर्नल एसडी गोस्वामी ने बताया कि पिछले 11 सालों के अंतराल के बाद सीमा और एलओसी पर दोनों देशों के बीच कटुता रही।
5 दिसंबर को हुए चार हमले
पांच दिसंबर जम्मू-कश्मीर के इतिहास में ब्लैक फ्राइडे रहा। इस दिन आतंकियों ने चार आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया।
पहला हमला
तड़के 3.10 बजे पाकिस्तान से आए आतंकियों ने उड़ी में सेना के मोहरा कैंप को निशाना बनाया। सेना के कैंप में घुसने से पहले उन्होंने बाहर सड़क पर तैनात चार सुरक्षा कर्मियों को मार दिया। कैंप में प्रवेश करने के बाद आतंकियों ने धुआंधार गोलाबारी शुरू कर दी। जवानों ने भी मोर्चा संभाल लिया।
इस दौरान गोली लगने से लेफ्टिनेंट कर्नल संकल्प कुमार (पंजाब रेजीमेंट) शहीद हो गए। बताया जाता है कि हमला करने वाले आतंकी दो गुटों में बंटे थे। एक गुट कैंप के बाहर सैनिकों से मुठभेड़ करता रहा, जबकि दूसरे गुट ने कैंप में प्रवेश कर गोलाबारी शुरू कर दी। आतंकियों ने छोटे आटोमैटिक हथियारों का उपयोग किया।
हमले में मारे गए पुलिसकर्मियों में एएसआई मोहम्मद अकबर लोन, हेड कांस्टेबल अब्दुल मजीद और कांस्टेबल संजय सिंह शामिल थे। उल्लेखनीय है कि उड़ी सेक्टर से पीओके के लिए श्रीनगर-मुजफ्फराबाद बस सेवा चलती है। इसी स्थान से क्रास एलओसी ट्रेड भी होता है।
दूसरा हमला
उड़ी के बाद श्रीनगर के सौरा अहमदनगर इलाके में आतंकी हमला हुआ। यहां सुरक्षा बलों और आतंकियों में हुई मुठभेड़ में लश्कर कमांडर कारी ढेर हो गया। शहर के बाहरी इलाके में जब कार में सवार दो आतंकियों को सुरक्षा बलों ने चेक प्वाइंट पर रोका तो वे वहां से भाग खड़े हुए।
सुरक्षा बलों ने कार का पीछा किया। इस दौरान हुई गोलाबारी में आतंकी कारी इसरार की मौके पर ही मौत हो गई। उसके पास से एके 47 राइफल भी बरामद हुई। दूसरे आतंकी ने एक घर में घुसकर जान बचाने की कोशिश की। सुरक्षा बलों ने उसे भी ढेर कर दिया।
तीसरा हमला
श्रीनगर के बाद आतंकी गतिविधियों का केंद्र रहने वाले शोपियां में आतंकियों ने पुलिस थाने पर ग्रेनेड हमला किया। इसमें कोई हताहत नहीं हुआ। खिड़कियों के कांच टूट गए। दरवाजों को भी नुकसान पहुंचा।
चौथा हमला
पुलवामा जिले के त्राल इलाके में बस स्टैंड को निशाना बनाया गया। यहां हुए भीषण विस्फोट में दो नागरिकों गुलाम हसन मीर (60) और मोहम्मद शफी गुज्जर (26) की मौत हो गई। 11 घायलों को जिला अस्पताल में भर्ती करवाया गया। आतंकियों ने सिक्योरिटी पैट्रोलिंग वाहन में ग्रेनेड छुपाकर रखा था।
2 दिसंबर को दहला हंडवाड़ा
दो दिसंबर को चुनाव के दौरान को हंदवाड़ा के नौगाम सेक्टर में हुई मुठभेड़ में सुरक्षा बलों ने छह आतंकियों को मार गिराया। आतंकियों से लोहा लेते एक जेसीओ (सूबेदार) अजयवर्द्घन शहीद हो गए। एक मेजर सहित चार जवान घायल हुए। मारे गए आतंकियों से छह एके 47 राइफलें, पिस्तौल और भारी मात्रा में असलाह बारूद बरामद हुआ था।
इसी दिन कुलगाम में सुरक्षा बलों ने एक आतंकी बिलाल अहमद शेख को धर दबोचा। सुरक्षा बलों के अधिकारियों के मुताबिक आतंकियों द्वारा जिले में वारदात को अंजाम देकर चुनावी प्रक्रिया में खलल डालने की साजिश किए जाने के इनपुट मिले थे। तीन दिसंबर को पुलवामा जिले के पोहु इलाके में आतंकियां ने सीआरपीएफ की रोड ओपनिंग पार्टी पर ग्रेनेड हमला किया।
हमले में सीआरपीएफ का एक एएसआई शहीद हो गया जबकि तीन जवान गंभीर घायल हुए हैं। इसके अलावा जेएंडके पुलिस का एक कर्मी और एक नागरिक भी घायल हो गए।
दहशत के 30 घंटे, 12 मौतें, आतंक का अंत
27 नवंबर को गांव कठार में सीमा पार से आए आतंकियों ने हमला किया। 30 घंटों तक चले आपरेशन में तीन जवान शहीद हुए। पांच नागरिकों की जान गई और चार आतंकी ढेर हुए। ग्रामीणों ने दावा किया था कि आतंकियों की संख्या अठ से दस के बीच थी। सेना ने मौके से भारी मात्रा में गोला बारूद, चार एके 47 रायफल, 28 मैगजीन, 407 राउंड, एक पिस्टल, 23 हैंडग्रेनेड बरामद किए। तीन रेडियो सेट और चाकलेट एवं खाद्य सामग्री भी मौके से मिले। इसके साथ ही बंकर से 50 मीटर दूर आईईडी भी मिला। मारे गए आतंकियों की उम्र 20 से 24 साल तक थी और सभी सेना की वर्दी में थे। बताया गया कि ये फिदायीन बनकर चुनाव के दौरान तबाही मचाने आए थे। बंकर तक जाने के लिए जिस कार कब्जाया था वह भी क्षतिग्रस्त हालत में बरामद की गई। मौके पर मोटरसाइकिल भी गिरी पड़ी थी। मोटरसाइकिल सवार को भी उन्होंने मार दिया था। इसके साथ ही बंकर के पास पुल से पहले ट्रैक्टर भी सड़क किनारे मिला था जिसके मालिक को आतंकियों ने मार दिया था। सेना के अनुसार आतंकियों ने आरपीजी तथा हैंड ग्रेनेड का भी इस्तेमाल किया था।
मौके से सलवार समीज भी मिले, उन्होंने भारतीय सीमा में प्रवेश करने के बाद सेना की वर्दी वाले कपड़े पहने थे। इन आतंकियों ने सेना को खुब छकाया, बंकर नष्ट करने के लिए सेना ने टैंक तक मौके पर मंगा लिए थे और आतंकियों की तलाश के लिए ड्रोन का इस्तेमाल भी किया गया था।
इसके दो दिन बाद 29 नवंबर को लाल चौक में पलेडियम सिनेमा के पास आतंकियों ने सीआरपीएफ के बंकर को निशाना बनाया। ग्रेनेड हमले में सब इंसपेक्टर समेत आठ लोग जख्मी हो गए। पुंछ जिले की मेंढर तहसील में कृष्णा घाटी सेक्टर में आतंकियों ने सैन्य वाहन को आईईडी विस्फोट से उड़ा दिया।
अगस्त और अप्रैल में भी हुए बड़े हमले
1 अगस्त
जम्मू-कश्मीर के कैरन सेक्टर में एलओसी के पास सेना और आतंकियों के बीच बड़ी मुठभेड़ हुई। इस एनकाउंटर में सेना ने चार आतंकियों को मार गिराया। सेना को सूचना मिली थी कि कुछ आतंकी भारतीय क्षेत्र में आतंकी घटनाओं को अंजाम देने के लिए दाखिल हुए हैं।
सूचना पर सेना के जवानों ने सर्च ऑपरेशन चलाया जिसमें चारों आतंकियों को ढेर कर दिया गया। सेना ने आतंकियों के कब्जे से आठ एके 47 और भारी मात्रा में असलाह बरामद किया। यह हमला इस मायने में भी खास रहा कि इसकी जिम्मेदारी किसी संगठन ने नहीं ली।
26 अप्रैल 2014
26 अप्रैल को सेना को खबर मिली कि कुछ आतंकी भारतीय सीमा में घुसने की फिराक में हैं। सेना ने कश्मीर के शोपियां से 55 किलोमीट दूर करेबा मलिनो में सर्च ऑपरेशन चलाया। इस दौरान सेना और आतंकियों के बीच जबरदस्त मुठभेड हुई। इस मुठभेड में हिजबुल मुजाहिद्दीन के तीन आतंकियों को सेना ने मार गिराया था।
इनमें से दो आतंकी कश्मीर के रहने वाले थे जबकि एक विदेशी आतंकी थी। आतंकी आसिफ अहमद वानी कश्मीर के रजपोरा, शबीर अहमद गोरसी कश्मीर के कैलर का रहने वाला था। वहीं, अब्दुल हक मलिक विदेशी था जिस पर 2013 में पुलिसकर्मी की हत्या का आरोप था। इस एनकाउंटर में सेना के मेजर मुकुंद वर्दराजन और सिपाही विक्रम सिंह शहीद हो गए थे।