{"_id":"5ef5a9d48d87f33c8b270751","slug":"tomb-of-baba-chamiyal-near-indo-pakistan-border","type":"story","status":"publish","title_hn":"कारगिल युद्ध में भी नहीं टला था ये मेला, इस मजार पर माथा टेकने के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं लोग","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
कारगिल युद्ध में भी नहीं टला था ये मेला, इस मजार पर माथा टेकने के लिए दूर-दूर से पहुंचते हैं लोग
Fri, 26 Jun 2020 01:25 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Fri, 26 Jun 2020 01:25 PM IST
विज्ञापन
बाबा चमलियाल की मजार
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
जम्मू संभाग में सांबा जिले के रामगढ़ सब सेक्टर में भारत-पाकिस्तान सीमा के नजदीक बाबा चमलियाल की मजार पर चादर चढ़ाकर मेले की रस्म पूरी की गई। इस दौरान स्थानीय लोगों के साथ विकास कमेटी के सदस्य मौजूद रहे।
विज्ञापन
गौरतलब है कि हर साल बाबा चमलियाल मेले में बड़ी संख्या में श्रद्धालु शामिल होते हैं। बाहरी राज्यों से भी लोग बाबा की मजार पर माथा टेकने के लिए पहुंचते हैं। जिन लोगों की मन्नतें पूरी होती हैं, वह बैंड बाजों के साथ भी पहुंचते रहे हैं।
विज्ञापन
यह भी पढ़ेंः मेजर शैतान सिंह, जिन्हें यादकर थर्रा उठता है चीन, 120 सपूतों ने 1300 चीनियों को उतारा था मौत के घाट
विज्ञापन
मेले को लेकर तैयारियां भी काफी पहले से शुरू हो जाती हैं, जिसमें बड़ी संख्या में दुकानें सजाई जाती हैं, लेकिन इस बार कोरोना के चलते सिर्फ रस्म अदायगी की गई। पहले मेले का आयोजन बीएसएफ की ओर से किया जाता था।
बाद में जिला प्रशासन ने आयोजन की जिम्मेदारी संभाल ली। मेले के दौरान शरबत लेने के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचते हैं। लेकिन इस बार ऐसा कुछ नहीं हो सका। सिर्फ विकास कमेटी के सदस्यों ने ही चादर चढ़ाकर रस्म पूरी की।
यह पहला मौका है जब मेले का आयोजन नहीं हो सका। कारगिल युद्ध के दौरान सीमा पर बने तनाव के समय भी मेले को दग गांव में किया गया था। तब वहां पर अस्थायी मजार बनाई गई थी, लेकिन मेले को स्थगित नहीं किया गया था।