बीफ मामले की सुनवाई करेगी तीन न्यायाधीशों की पीठ
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जम्मू कश्मीर हाईकोर्ट ने बीफ प्रतिबंध के खिलाफ याचिका पर 16 अक्तूबर को होने वाली सुनवाई के लिए तीन न्यायाधीशों की पीठ का शनिवार को गठन कर दिया। इस पीठ में जस्टिस मुजफ्फर हुसैन अत्तर, जस्टिस अली मोहम्मद माग्रे और न्यायमूर्ति ताशी रबस्तन को शामिल किया गया है।
इस मामले में श्रीनगर और जम्मू हाईकोर्ट की खंडपीठों में मतभेद के कारण सुप्रीम कोर्ट ने पांच अक्तूबर को बीफ प्रतिबंध समस्या के हल के लिए जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को तीन न्यायाधीशों की पीठ का गठन करने को कहा था।
सुप्रीम कोर्ट की ओर से नौ सितंबर को जम्मू कश्मीर हाई कोर्ट की खंडपीठ की ओर से बीफ प्रतिबंध का आदेश जारी करने और पुलिस को रियासत में बीफ प्रतिबंध को अमल में लाने के निर्देशों पर दो माह के लिए रोक लगाकर तीन न्यायाधीशों की पीठ से मामले की सुनवाई करवाने करवाने को कहा था।
सुप्रीमकोर्ट ने लिया फैसला
हाई कोर्ट की जम्मू बेंच की खंडपीठ ने नौ सितंबर 2015 को पुलिस महानिदेशक को जम्मू कश्मीर रणबीर पेनल कोड की धारा 298 ए और डी का पूरी तरह से पालन करवाने के भी निर्देश दिए थे।
इसके तहत दुधारू मवेशियों की हत्या पर रोक और गोमांस की विक्री पर रियासत में प्रतिबंध लागू किया गया था। आदेश के एक सप्ताह बाद हाई कोर्ट की श्रीनगर बेंच की खंडपीठ ने पेनल की धाराओं की संवैधानिक वैधता को चुनौती देती याचिका को स्वीकार कर लिया था।
रियासती सरकार को एक सप्ताह में अपना पक्ष रखने को कहा था। श्रीनगर और जम्मू खंडपीठ की मामले में विभाजित राय के बाद रियासती सरकार ने मामले को सुप्रीम कोर्ट में लिया था।