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जम्मू-कश्मीरः इस साल की अमरनाथ यात्रा पर मंडरा रहा पत्थरबाजों का खतरा

Thu, 10 May 2018 05:48 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Thu, 10 May 2018 05:48 PM IST
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 threat of stone pelting on this year's Amarnath Yatra jammu and kashmir
stone pelting in kashmir - फोटो : BASIT ZARGAR
जून माह में शुरू होने जा रही श्री अमरनाथ यात्रा पर पत्थरबाजी का खतरा मंडरा रहा है। यूं तो यात्रा के दोनों रूट से जाने वाले श्रद्धालुओं को इसका सामना करना पड़ सकता है। लेकिन सबसे अधिक खतरा बालटाल रूट से जाने वाले श्रद्धालुओं को है।
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जिन्हें लगभग 60 किलोमीटर तक पत्थरों से गुजरना पड़ सकता है। यात्रा शुरू होने में अभी दो महीने हैं। लेकिन पत्थरबाजी की घटनाओं से यात्रा की सुरक्षा बड़ी चुनौती बन गया है। अमरनाथ यात्रा के दो ही रूट है। इनमें बालटाल और पहलगाम रूट शामिल है। दोनों ही रूट अनंतनाग से होकर आगे निकलते हैं।
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अनंतनाग पत्थरबाजों का गढ़ बन चुका है। अनंतनाग से पहलगाम को जाने वाले यात्रियों को सिर्फ अनंतनाग में ही खतरा है। जबकि बालटाल के यात्रियों को कई किलोमीटर खतरा उठाना पड़ेगा। अनंतनाग से श्रीनगर के बीच की दूरी 60 किलोमीटर है।
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इस दौरान अनंतनाग से आगे पांपोर, अवंतीपुरा, श्रीनगर, गांदरबल और सोनमर्ग से आगे बालटाल। बालटाल को छोड़कर सब जगहों पर पत्थरबाजी हो रही है। ऐसे में इन रूट पर जाना खतरे से खाली नहीं होगा। इन सभी रूट पर सुरक्षाबलों का पहरा जरूर होगा, लेकिन कश्मीर के शरारती तत्व यात्रियों को निशाना बना सकते हैं। 
 

महंगा पड़ सकता है शार्टकट लेना

 threat of stone pelting on this year's Amarnath Yatra jammu and kashmir
अमरनाथ - फोटो : SELF
यदि इन रूट पर कहीं पत्थरबाजी हो और जाम की स्थिति हो शार्टकट मत लें। यह महंगा पड़ सकता है। क्योंकि शार्टकट के रास्तों में सुरक्षाबल नहीं होंगे। शार्टकट के गांव से कई पत्थरबाज निकल कर आ जाते हैं। जो निशाना बना सकते हैं।

मुगल रोड पर भी खतरा
कई अमरनाथ यात्री जो मुगल रोड से होकर बालटाल रूट से जाते हैं। उन्हें भी पत्थरबाजी से खतरा है। क्योंकि मुगल रोड से जब जाएंगे तो तब शौपियां से होकर जाना पड़ेगा। शौपियां से फिल कुलगाम, पुलवामा और फिर श्रीनगर जाना होगा। तीनों ही जगहों पर पत्थरबाजी हो रही है।

2015 में यात्रियों पर बरसे थे पत्थर
वर्ष 2015 की अमरनाथ यात्रा में भी यात्रियों को निशाना बनाया गया था। करीब 100 वाहनों के शीशे तोड़ दिए गए थे। दो दर्जन से अधिक यात्री इसमें घायल हो गए थे। इस बार भी घाटी में इस तरह के ही हालात पैदा हो गए हैं। 

पुलिस यात्रा को लेकर सतर्क नहीं
यात्रा शुरू होने में दो महीने बचे हैं। अभी इसके बारे में क्या बात करें। कश्मीर में तो रोज यहीं सब होता है। अभी तो पत्थरबाजी में पर्यटक की मौत हुई है। उसके बारे में ही बात करिए। 
आईजी कश्मीर, एस पी पाणी
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