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जनाजों में उमड़ती है हजारों युवाओं की भीड़, भावुकता भरे गुस्से से पैदा हो रहे नए आतंकी

Mon, 21 May 2018 11:17 AM IST
दयाशंकर शुक्ल सागर, अमर उजाला जम्मू
दयाशंकर शुक्ल सागर, अमर उजाला जम्मू Updated Mon, 21 May 2018 11:17 AM IST
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thousands of young people arrive in terrorism funeral in kashmir
आतंकी का जनाजा
ये सबसे रोमांचकारी नजारा होता है। भावुक और दिल दहला देने वाला। कश्मीरी आतंकी के जनाजे का जुलूस। एनकाउंटर में मारे गए आतंकी की लाश पोस्टमार्टम के बाद उसके परिजनों को सौंप दी जाती है। थोड़ी ही देर में स्ट्रेचर पर रखी लाश को भीड़ अपने कब्जे में ले लेती है और फिर शुरू होता है आजादी के नारों और दर्दनाक मातम का शोर। देखते ही देखते पूरा इलाका जनसैलाब में तब्दील हो जाता है। हजारों हजार लड़के, औरतें, मर्द, बुजुर्ग जनाजे को घेरे खड़े रहते हैं। दूर-दूर तक न पुलिस, न आर्मी, न सीआरपीएफ और न कोई कश्मीरी नेता। बस कंधे पर एके-47 टांगे लंबे बालों वाले आतंकी दिखते हैं। 
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क्यूबा के क्रांतिकारी चे-गेवारा जैसी कैप पहने अपने साथी को गन सैल्यूट के साथ अंतिम विदाई देने के लिए। इस आखिरी सलाम की गोलियों की आवाज दूर सीआरपीएफ और राजपूताना राइफल्स के फौजी कैंपों तक सुनाई देता है। सेना समझ जाती है कि दूर कहीं आतंकियों की नई फसल तैयार हो रही है। 
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शोपियां, पुलवामा से लेकर श्रीनगर तक की भीड़ जनाजों में शामिल होती है। इसमें बाहर के मीडिया को आने की इजाजत नहीं। हर जनाजे के बाद लश्कर और हिजबुल मुजाहिदीन नए आतंकी बने लड़कों की तस्वीर जारी करता है।  7 मई को शोपियां की जामिया मस्जिद में सद्दाम पाडर के जनाजे में हजारों हजार युवाओं का मजमा जुटा था। अगले एक हफ्ते में पांच नए आतंकी बने, जिसमें आवंतीपुरा का तौसीफ ठोकर भी शामिल था। बाद में उसकी भी तस्वीर वायरल की गई थी। 
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ऐसा नहीं कि नहीं किए गए प्रयास

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terrorist funeral
सेना में कर्नल स्तर के एक अधिकारी ने बताया कि दिल्ली से श्रीनगर तक की उच्चस्तरीय बैठकों में हम, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस भी इन जनाजों के जुलूस बंद कराने के लिए लिख कर दे चुके हैं। ये केवल कश्मीर का माहौल खराब कर रहे हैं। पहले पाकिस्तानी आतंकी के मरने पर भी जनाजा निकलता था। ढाई साल पहले लश्कर के कश्मीर कमांडर अबू कासिम के जनाजे में एक लाख लोग जुटे थे। तब से विदेशी आतंकी के जनाजों पर रोक लग गई। अब पुलिस उनकी लाश कश्मीर के किसी इलाके में चुपचाप दफना देती है, लेकिन कश्मीरी आतंकियों के जनाजे पर कोई रोक नहीं। 

 

राजनीति की बड़ी बाधा

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terrorism funeral
अधिकारी कहते हैं कि पुलिस, सेना कस्टडी में आतंकी के शव को चार-पांच परिजनों की मौजूदगी में किसी अज्ञात जगह दफना देना चाहिए, लेकिन सूबे की वोट की राजनीति इसके लिए तैयार नहीं है। महबूबा सरकार ऐसे जनाजों को रोक कर पब्लिक की और नाराजगी मोल नहीं ले सकती। फिर हुर्रियत और अलगाववादी ऐसा होने नहीं देंगे क्योंकि वह कभी नहीं चाहते कि कश्मीर में हालात सुधरे।

 

कठोर फैसला लेना होगा: डीजीपी एसपी वैद

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terrorism funeral
आतंकियों के जनाजे पर रोक लगाना कठिन राजनीतिक निर्णय है। ये निर्णय हम अकेले नहीं कर सकते। हमने इतना जरूर किया है कि ऐसे जनाजों में भड़काऊ भाषण देने पर एफआईआर दर्ज करनी शुरू कर दी है। आतंकियों को गन सैल्यूट देने की जानकारी है लेकिन वहां इतनी भीड़ होती है कि हम कार्रवाई करें तो बड़ा नुकसान हो सकता है।
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