बख्शे नहीं जाएंगे घाटी का माहौल खराब करने वाले, पुलिस की रडार पर ऐसे सभी सोशल मीडिया अकाउंट
- अमर उजाला से विशेष बातचीत में ताहिर अशरफ ने बताया कि साइबर पुलिस कश्मीर जोन का श्रीनगर में पुलिस स्टेशन है। इसमें जितने भी मामले साइबर पुलिसिंग के दायरे में आते हैं उनका संज्ञान लिया जाता है।
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जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटने के बाद घाटी में शुरू हुई 2जी मोबाइल इंटरनेट सेवा के बीच जम्मू-कश्मीर पुलिस का साइबर सेल इंटरनेट यूजर्स पर कड़ी नजर रख रहा है। अफवाहबाजों, आतंकवाद समर्थकों के साथ-साथ हर उस शख्स के सोशल मीडिया अकाउंट पर नजर रखी जा रही जो नफरत फैलाने के साथ-साथ घाटी में हालात खराब करवाना चाहते हैं। पुलिस सूत्रों के अनुसार हजारों संदिग्ध सोशल मीडिया अकाउंट उनकी रडार पर हैं।
एसएसपी ताहिर अशरफ के अनुसार पिछले कुछ समय से विशिंग (ऑनलाइन फ्रॉड) के मामले सामने आ रहे हैं। वीपीएन के इस्तेमाल के चलते ऐसे ऑनलाइन फ्रॉड को ट्रैक करने की संभावना काफी कम है। अमर उजाला से विशेष बातचीत में ताहिर अशरफ ने बताया कि साइबर पुलिस कश्मीर जोन का श्रीनगर में पुलिस स्टेशन है और इसमें जितने भी मामले साइबर पुलिसिंग के दायरे में आते हैं उनका संज्ञान लिया जाता है।
ताहिर ने बताया कि पिछले कई दिनों से यह रिपोर्ट आ रही थी कि कुछ लोग सोशल मीडिया का दुरुपयोग कर भड़काऊ, देश विरोधी व अन्य पोस्ट अपलोड कर रहे थे। उसके बाद ऐसे कई सोशल मीडिया अकाउंट को पुलिस के रडार पर रखा गया। साथ ही कुछ को बंद कर दिया गया।
इसी लालच में आकर व्यक्ति सारी डिटेल और अन्य जानकारी दे देता है...
एसएसपी ने कहा कि अगर कोई भी व्यक्ति ऑनलाइन ठगी का शिकार होता है तो सबसे पहले उसे इसकी जानकारी साइबर पुलिस थाने को देनी चाहिए। जितनी जल्दी जानकारी मिलेगी, उससे आरोपी को ट्रैक करने में आसानी होगी। हालांकि, एसपी ने कहा कि वीपीएन के उपयोग से ऐसे मामले को ट्रैक करना मुश्किल हो जाता है।
उन्होंने बताया कि हाल ही में एक शख्स के साथ 80 हजार रुपये की ऑनलाइन ठगी हुई। उसने फौरन इसकी जानकारी दी। सभी डिटेल शेयर की। फोन नंबर भी दिया। इस पर पुलिस ने बैंक से संपर्क किया, क्योंकि पैसा ट्रांसफर होने में थोड़ा समय लगता है, इसलिए बावक्त कार्रवाई से उसका पैसा वापस हो गया।
ताहिर अशरफ के अनुसार विशिंग एक ऐसी प्रक्रिया है, जिसमें एक शख्स को एसएमएस या ई-मेल के जरिये एक फ्रॉड मैसेज भेजा जाता है और उसमें लालच दिया जाता है। उनसे कहा जाता है कि उन्होंने एक भारी रकम जीती है। इस लालच में आकर व्यक्ति सारी डिटेल और अन्य जानकारी दे देता है। यहां तक कि अकाउंट नंबर भी मांगा जाता है जिसमें उन्हें उनका पैसा ट्रांसफर करवाने का आश्वासन दिया जाता है। ताहिर के अनुसार कई बार हैकर्स बैंक अकाउंट को एक्सेस करते हैं। वो अकाउंट से पैसा निकाल लेते हैं या कुछ लोग खुद पैसा हैकर्स के अकाउंट में ट्रांसफर कर देते हैं।