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उमर का ये फैसला कहीं उन्हें ले न डूबे, पढ़ें खबर?

Sat, 08 Nov 2014 03:47 PM IST
Updated Sat, 08 Nov 2014 03:47 PM IST
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this election will be tough for CM Omar Abdullah

कांग्रेस से गठबंधन टूटने के बाद कश्मीर की दो सीटों बीरवाह और सोनावार से चुनाव लड़ रहे मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला के लिए फिर से विधानसभा पहुंचने की राह आसान नहीं है। पिछले 39 साल से लगातार अब्दुल्ला परिवार का ही सदस्य गांदरबल से चुनाव लड़ता रहा है।

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दादा शेख अब्दुल्ला और पिता फारूक अब्दुल्ला के बाद पिछली बार उमर ने गांदरबल सीट जीती थी। हालांकि यहां से वे एक चुनाव हार भी चुके हैं। इस बार उमर ने गांदरबल से हटकर जो सीटें चुनी हैं वहां भी नेकां की हालत बहुत मजबूत नहीं कही जा सकती। इनमें से एक सीट पर तो इस समय पीडीपी का कब्जा है।

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मात्र 94 वोट से जी पाए थे फारूक अब्दुल्ला

this election will be tough for CM Omar Abdullah

सोनवार सीट से 2008 के विधानसभा चुनाव में डा. फारूक अब्दुल्ला मैदान में उतरे थे। उन्हें कड़ी चुनौती का सामना करना पड़ा और मात्र 94 मतों से जीत हासिल कर पाए थे। यही नहीं, फारूक अब्दुल्ला के राज्यसभा के लिए चुने जाने के बाद इस सीट से नेशनल कांफ्रेंस ने मोहम्मद यासीन शाह को उतारा गया तो जीत का अंतर और भी कम हो गया।

उन्हें पीडीपी उम्मीदवार मोहम्मद अशरफ मीर के खिलाफ मात्र 50 मतों के अंतर से जीत मिली। बीरवाह सीट पर तो पिछले चुनाव में पीडीपी उम्मीदवार शफी अहमद वानी ने नेशनल कांफ्रेंस के उम्मीदवार अब्दुल मजीद मट्टू को 164 मतों से हरा दिया था। इसके बावजूद मुख्यमंत्री उमर ने इस सीट से अपनी चुनौती रखने का फैसला किया है।

दोनों ही सीटों पर वोट नहीं डालते लोग

this election will be tough for CM Omar Abdullah

आंकड़ों के लिहाज से देखा जाए तो इन दोनों सीटों पर मतदान का प्रतिशत कभी बहुत ज्यादा नहीं रहा। बीरवाह सीट पर पिछली बार 57.18 फीसदी मतदान हुआ था, जबकि सोनवार सीट पर मात्र 36.66 फीसदी मतदान हुआ था।

पिछली बार उमर ने गांदरबल सीट से पीडीपी के काजी मोहम्मद अफजल से दोगुने वोट हासिल किए थे। इसके बावजूद उन्होंने परंपरागत सीट को छोड़कर अपेक्षाकृत कमजोर सीटों को चुनकर सियासी जानकारों को भी हैरान किया है।

सोनावर और बीरवाह सीट पर बड़ी संख्या में उम्मीदवार मैदान में उतरते हैं। 2008 में सोनावर से 25 उम्मीदवार मैदान में उतरे थे, जबकि बीरवाह से कुल 16 दावेदार चुनावी अखाड़े में थे। इन दोनों सीटों के मुकाबले गांदरबल से मात्र 12 उम्मीदवार मैदान में थे।

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