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Jammu News: खेलने लायक मैदान नहीं, राह में अड़चनें अनेक
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सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों की मुसीबतों का कोई अंत नहीं
कैसी है पाठशाला :
सतीश वालिया/अंकित मिश्र
जम्मू। गजब किया तेरे वादे पे ऐतबार किया... बेशक ये पंक्तियां शायर ने अपने महबूब के लिए कही हों लेकिन जम्मू के स्कूलों की बदहाली की बात करें तो शिक्षा विभाग के वादे-दावे कुछ ऐसे ही हैं जो कतई ऐतबार लायक नहीं। स्कूल की इमारतें तो खस्ताहाल है हीं उनके खेल मैदान तक बच्चों के खेलने के काम नहीं आ रहे। किसी जगह तो बच्चों का स्कूल पहुंचना तक दूभर बना है क्योंकि उनकी राह में कई अड़चनें हैं। हालात सबको पता हैं लेकिन अनदेखी का हुनर भी सबको मालूम है। अमर उजाला की टीम जब स्कूलों के हालात का जायजा लेने पहुंची तो तस्वीर कुछ ऐसी नजर आई।
बच्चों के खेल के मैदान में घोड़ा गाड़ी
गवर्नमेंट ब्वॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल गोल गुजराल की स्थापना 69 साल पहले वर्ष 1956 में हुई थी। दूर से देखने पर इमारत एकदम रंगी-पुती नजर आती है लेकिन स्कूल के मैदान का हाल खराब है। बच्चों के खेलने के लिए यहां नेट जरूर लगा है लेकिन इसके ठीक पीछे बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हैं। इनकी हालत से साफ दिखाई देता है कि इसकी कटाई-छंटाई काफी समय से नहीं हुई। सांप जैसे खतरनाक जीव के काटने का यहां हर वक्त खतरा बना है। आलम यह है कि स्कूल का सामान ढोने के लिए लाई गई घोड़ा गाड़ी तक को स्कूल के मैदान में छोड़ दिया गया। यहां बच्चों के लिए बनाए गए नेट के पास घोड़ा घास चरता नजर आया।
बच्चों के स्कूल की राह में कई अड़चनें
गांधीनगर जोन में पड़ने वाले सरकारी बालिका हाईस्कूल तवी पुल तक विद्यार्थियों का पहुंचना आसान नहीं। इस स्कूल में करीब 40 बच्चे पढ़ते हैं जिन्हें स्कूल जाने के लिए वेयरहाउस से निकलना पड़ता है। यहां हर वक्त सामान से भरे ट्रक आड़े-तिरछे खड़े रहते हैं। बरसात के मौसम में पानी भरा रहता है। बच्चों के निकलने के लिए मुश्किल से जगह बच पाती है। ट्रक में सामान चढ़ाने के लिए लगाए गए सरिये, पट्टे भी बच्चों के लिए खतरा बने रहते हैं। किसी दिन तो इनके बीच से निकलना इतना कठिन होता है कि अगर सावधानी न बरती जाए तो किसी न किसी बच्चे का जख्मी होना तय है।
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पौने दो लाख बच्चों के पास वर्दी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सरकारी मिडिल स्कूलों के एक लाख 70 हजार बच्चों के पास ड्रेस नहीं है। बैंक में खाता न खुल पाने की वजह से उनका यूनिफॉर्म फंड नहीं मिल पाया है। हर साल दो सेट यूनिफॉर्म के लिए प्रति विद्यार्थी छह सौ रुपये दिए जाने का प्रावधान है। आधार सीडिंग के बाद वर्दी खरीद के लिए राशि सीधे छात्रों के बैंक खातों में जमा होगी। इसके बाद ही उनके माता-पिता इस पैसे से वर्दी खरीद सकेंगे।
प्रदेश भर में करीब 18 हजार प्राइमरी और मिडिल स्कूल हैं। इनमें आठ लाख बच्चे पंजीकृत हैं। समग्र शिक्षा अभियान के तहत बजट जारी होता है। इस साल का बजट पहुंच भी गया है। ग्रामीण इलाकों के गरीब परिवारों के बच्चे इस योजना से सबसे ज्यादा लाभ पाते हैं लेकिन फिलहाल खाते न खुलने की वजह से उन्हें अपने पैसे से यूनिफॉर्म खरीदनी पड़ रही हैं जिससे उनके अभिभावकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
शिक्षा निदेशालय के अनुसार बच्चों के खाते खुलवाने पर काम जारी है। इस कार्य को पूरा करने के लिए 25 अगस्त तक की तारीख तय की गई है। इसके बाद ही छात्रों को राशि जारी हो सकेगी। शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक मुश्ताक अहमद के अनुसार माता-पिता को भी इस संबंध में स्कूलों में बुलवाकर जागरूक किया जा रहा है।
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कैसी है पाठशाला :
सतीश वालिया/अंकित मिश्र
जम्मू। गजब किया तेरे वादे पे ऐतबार किया... बेशक ये पंक्तियां शायर ने अपने महबूब के लिए कही हों लेकिन जम्मू के स्कूलों की बदहाली की बात करें तो शिक्षा विभाग के वादे-दावे कुछ ऐसे ही हैं जो कतई ऐतबार लायक नहीं। स्कूल की इमारतें तो खस्ताहाल है हीं उनके खेल मैदान तक बच्चों के खेलने के काम नहीं आ रहे। किसी जगह तो बच्चों का स्कूल पहुंचना तक दूभर बना है क्योंकि उनकी राह में कई अड़चनें हैं। हालात सबको पता हैं लेकिन अनदेखी का हुनर भी सबको मालूम है। अमर उजाला की टीम जब स्कूलों के हालात का जायजा लेने पहुंची तो तस्वीर कुछ ऐसी नजर आई।
बच्चों के खेल के मैदान में घोड़ा गाड़ी
गवर्नमेंट ब्वॉयज हायर सेकेंडरी स्कूल गोल गुजराल की स्थापना 69 साल पहले वर्ष 1956 में हुई थी। दूर से देखने पर इमारत एकदम रंगी-पुती नजर आती है लेकिन स्कूल के मैदान का हाल खराब है। बच्चों के खेलने के लिए यहां नेट जरूर लगा है लेकिन इसके ठीक पीछे बड़ी-बड़ी झाड़ियां उगी हैं। इनकी हालत से साफ दिखाई देता है कि इसकी कटाई-छंटाई काफी समय से नहीं हुई। सांप जैसे खतरनाक जीव के काटने का यहां हर वक्त खतरा बना है। आलम यह है कि स्कूल का सामान ढोने के लिए लाई गई घोड़ा गाड़ी तक को स्कूल के मैदान में छोड़ दिया गया। यहां बच्चों के लिए बनाए गए नेट के पास घोड़ा घास चरता नजर आया।
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बच्चों के स्कूल की राह में कई अड़चनें
गांधीनगर जोन में पड़ने वाले सरकारी बालिका हाईस्कूल तवी पुल तक विद्यार्थियों का पहुंचना आसान नहीं। इस स्कूल में करीब 40 बच्चे पढ़ते हैं जिन्हें स्कूल जाने के लिए वेयरहाउस से निकलना पड़ता है। यहां हर वक्त सामान से भरे ट्रक आड़े-तिरछे खड़े रहते हैं। बरसात के मौसम में पानी भरा रहता है। बच्चों के निकलने के लिए मुश्किल से जगह बच पाती है। ट्रक में सामान चढ़ाने के लिए लगाए गए सरिये, पट्टे भी बच्चों के लिए खतरा बने रहते हैं। किसी दिन तो इनके बीच से निकलना इतना कठिन होता है कि अगर सावधानी न बरती जाए तो किसी न किसी बच्चे का जख्मी होना तय है।
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पौने दो लाख बच्चों के पास वर्दी नहीं
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। सरकारी मिडिल स्कूलों के एक लाख 70 हजार बच्चों के पास ड्रेस नहीं है। बैंक में खाता न खुल पाने की वजह से उनका यूनिफॉर्म फंड नहीं मिल पाया है। हर साल दो सेट यूनिफॉर्म के लिए प्रति विद्यार्थी छह सौ रुपये दिए जाने का प्रावधान है। आधार सीडिंग के बाद वर्दी खरीद के लिए राशि सीधे छात्रों के बैंक खातों में जमा होगी। इसके बाद ही उनके माता-पिता इस पैसे से वर्दी खरीद सकेंगे।
प्रदेश भर में करीब 18 हजार प्राइमरी और मिडिल स्कूल हैं। इनमें आठ लाख बच्चे पंजीकृत हैं। समग्र शिक्षा अभियान के तहत बजट जारी होता है। इस साल का बजट पहुंच भी गया है। ग्रामीण इलाकों के गरीब परिवारों के बच्चे इस योजना से सबसे ज्यादा लाभ पाते हैं लेकिन फिलहाल खाते न खुलने की वजह से उन्हें अपने पैसे से यूनिफॉर्म खरीदनी पड़ रही हैं जिससे उनके अभिभावकों पर अतिरिक्त वित्तीय बोझ पड़ रहा है।
शिक्षा निदेशालय के अनुसार बच्चों के खाते खुलवाने पर काम जारी है। इस कार्य को पूरा करने के लिए 25 अगस्त तक की तारीख तय की गई है। इसके बाद ही छात्रों को राशि जारी हो सकेगी। शिक्षा विभाग के संयुक्त निदेशक मुश्ताक अहमद के अनुसार माता-पिता को भी इस संबंध में स्कूलों में बुलवाकर जागरूक किया जा रहा है।