फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   The toxic air of Kathua

रियासत के इस जिले की हवा है सबसे जहरीली

Sun, 17 Jan 2016 06:22 PM IST
Updated Sun, 17 Jan 2016 06:22 PM IST
विज्ञापन
The toxic air of Kathua

औद्योगिक क्षेत्र से सटे इलाकों में लगातार सामने आए रहे बच्चों की रहस्यमय बीमारी के मामलों के बाद प्रदूषण के आंकड़े चौंकाने वाले हैं। इसके मुताबिक कठुआ औद्योगिक क्षेत्र की हवा रियासत में सबसे अधिक जहरीली हो गई है।

विज्ञापन


कई वर्षों से मासिक स्तर पर की गई मॉनीटरिंग में खुलासा हुआ है कि प्रदूषण के मानदंडों का दम भरने वाली औद्योगिक इकाइयों ने बिना किसी रोक-टोक के रिहायशी इलाकों की फिजा में जहर घोलने का काम किया है।
विज्ञापन


यहां तक कि पिछले कुछ वर्षों में सब्सिडी गटक कर मुंह फेर लेने वाले औद्योगिक निवेशकों ने भी पर्यावरण के साथ जमकर खिलवाड़ किया है।

हान‌िकारक सीसा धातु की इकाइयां सबसे ज्यादा

The toxic air of Kathua

वर्तमान में गिनी-चुनी पेस्टीसाइड इकाइयां ही कठुआ में काम कर रही हैं, लेकिन इन्हें किन परिस्थितियों और मानकों के आधार अनुमति दी गई, यह भी बड़ा सवाल है।

बीते एक दशक में कठुआ शहर से सटे औद्योगिक क्षेत्र में मिश्र धातुओं की आधा दर्जन के लगभग औद्योगिक इकाइयां चलती रहीं। इनमें सीसा धातु की इकाइयां सबसे अधिक थीं।

पर्यावरण विशेषज्ञों की मानें तो सीसा धातु बेहद हानिकारक है और इसके इस्तेमाल के काफी साल बाद तक भी इसका असर देखा जाता है। यहां तक कि यदि सीसा धातु की माइक्रोग्राम मात्रा भी हवा के जरिए शरीर के अंदर जाए, तो किसी के भी जान पर बन सकती है।

पीएम10 की मात्रा 139 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज

The toxic air of Kathua

प्रदूषण नियंत्रण विभाग के उच्च अधिकारी के मुताबिक कठुआ औद्योगिक क्षेत्र के पिछले एक साल के आंकड़ों में आरएसपीएम या पीएम10 की मात्रा 139 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज की गई।

प्रदूषण नियंत्रण के मानकों के अनुसार इसे अधिकतम 100 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक होना चाहिए था। जम्मू के ज्यूल चौक, बाड़ी ब्राह्मणा औद्योगिक क्षेत्र सहित अन्य औद्योगिक क्षेत्रों से यह आंकड़े कहीं अधिक हैं।

एसपीएम 200 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर तक होना चाहिए, जबकि इसे पिछले एक साल के आंकड़ों में 270 माइक्रोग्राम प्रति क्यूबिक मीटर दर्ज किया गया है। प्रदूषण नियंत्रण विभाग की ओर से सप्ताह में दो दिन चौबीस घंटे जांच की जाती है, जिसके लिए विभिन्न जगहों पर उपकरण भी स्थापित किए गए हैं।

विज्ञापन

कितना घातक है आरएसपीएम?

The toxic air of Kathua

अंतर्राष्ट्रीय कैंसर रिसर्च एजेंसी और वर्ल्ड हेल्थ आर्गेनाइजेशन की रिपोर्ट के अनुसार आरएसपीएम वायु प्रदूषण में सबसे जानलेवा साबित हो सकते हैं।

इनमें फेफड़ों और रक्त धमनियों में समाने की क्षमता होती है, जिससे डीएनए उत्परिवर्तन, दिल का दौरा पड़ना और समय से पहले मौत होना आम बात है। कठुआ के बच्चों में रहस्यमय बीमारी के लक्षणों में भी कुछ ऐसा ही सामने आया है।

स्वास्थ्य विभाग की मानें तो कुछ बच्चे जहां दिल की बीमारी से जूझ रहे हैं, वहीं अन्य बच्चों में शारीरिक विकृतियां पाई जा गई हैं। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारी भी इसे डीएनए उत्परिवर्तन मान रहे हैं।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed