{"_id":"57222e4f4f1c1b783ba91bc7","slug":"the-government-presented-the-answer-in-court","type":"story","status":"publish","title_hn":"NIT विवाद: सरकार ने हाईकोर्ट में पेश किया जवाब","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
NIT विवाद: सरकार ने हाईकोर्ट में पेश किया जवाब
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Thu, 28 Apr 2016 09:07 PM IST
विज्ञापन
एनआईटी में छात्रों ने फहराया था तिरंगा
- फोटो : FILE PHOTO
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
हाईकोर्ट में श्रीनगर एनआईटी मामले की सुनवाई शुक्रवार को भी जारी रहेगी। एक याचिका में गैर कश्मीरी छात्रों को सुरक्षा प्रदान करने, एनआईटी शिफ्ट करने, परीक्षा लिए जाने की अपील की गई है। सुनवाई के दौरान सरकार की तरफ से एडवोकेट जनरल ने पीले रंग का एक लिफाफा खंडपीठ के समक्ष रखा। इसे पढ़ने के बाद अदालत ने कहा कि इस मामले पर शुक्रवार को भी सुनवाई होगी।
मुख्य न्यायाधीश एन पाल बसंथा कुमार और न्यायाधीश धीरज सिंह ठाकुर की खंडपीठ में इस मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता प्रोफेसर हरिओम के वकील बीएस सलाथिया, एसएस लहर ने कहा भारतीय संविधान में जम्मू कश्मीर को भारत का अंग माना गया है। कश्मीर में तिरंगा लहराने व भारत माता की जय बोलना कोई अपराध नहीं है। पिछली तारीख पर सुरक्षा मुहैया कराने पर सरकार से जवाब मांग गया था।
राज्य सरकार एनआईटी में हुए हंगामे व लाठीचार्ज की जांच के लिए न्यायिक जांच करा रही है। एक रिपोर्ट में भी गैर कश्मीरी छात्रों को ही कसूरवार ठहराया गया है। इनका केवल यही कसूर है कि उन्होंने तिरंगा फहराया था। भारत माता जय के नारे लगाए थे। याची ने कहा है कि इन छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। उन्हें घर वापस लौटना पड़ा। धमकियां दी जा रही हैं और सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।
विज्ञापन
गैर कश्मीरी छात्रों के खिलाफ ही पुलिस ने मामला दर्ज किया। उनपर लाठियां बरसाईं। गैर कश्मीरी छात्र परीक्षा नहीं दे पाए हैं और सहमे हुए हैं। सैकड़ों छात्रों को अपनी जान बचाकर भागना घाटी से निकलना पड़ा। इससे पहले भी कश्मीर में विस्थापन हो चुका है। हालात सामान्य नहीं हैं। उन्हें शिक्षा के लिए उपयुक्त माहौल नहीं दिया गया है।
जवाब में एडवोकेट जनरल डीसी रैना ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि एनआईटी कैंपस में सीआरपीएफ केजवान तैनात कर दिए गए हैं। सरकार ने सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। भारत माता जय के नारे लगाना अपराध नहीं है। न्यायिक जांच के साथ ही एनआईटी प्रशासन की भी अलग से जांच चल रही है।
विज्ञापन
मुख्य न्यायाधीश एन पाल बसंथा कुमार और न्यायाधीश धीरज सिंह ठाकुर की खंडपीठ में इस मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता प्रोफेसर हरिओम के वकील बीएस सलाथिया, एसएस लहर ने कहा भारतीय संविधान में जम्मू कश्मीर को भारत का अंग माना गया है। कश्मीर में तिरंगा लहराने व भारत माता की जय बोलना कोई अपराध नहीं है। पिछली तारीख पर सुरक्षा मुहैया कराने पर सरकार से जवाब मांग गया था।
विज्ञापन
राज्य सरकार एनआईटी में हुए हंगामे व लाठीचार्ज की जांच के लिए न्यायिक जांच करा रही है। एक रिपोर्ट में भी गैर कश्मीरी छात्रों को ही कसूरवार ठहराया गया है। इनका केवल यही कसूर है कि उन्होंने तिरंगा फहराया था। भारत माता जय के नारे लगाए थे। याची ने कहा है कि इन छात्रों का भविष्य अधर में लटक गया है। उन्हें घर वापस लौटना पड़ा। धमकियां दी जा रही हैं और सुरक्षा के कोई इंतजाम नहीं हैं।
विज्ञापन
गैर कश्मीरी छात्रों के खिलाफ ही पुलिस ने मामला दर्ज किया। उनपर लाठियां बरसाईं। गैर कश्मीरी छात्र परीक्षा नहीं दे पाए हैं और सहमे हुए हैं। सैकड़ों छात्रों को अपनी जान बचाकर भागना घाटी से निकलना पड़ा। इससे पहले भी कश्मीर में विस्थापन हो चुका है। हालात सामान्य नहीं हैं। उन्हें शिक्षा के लिए उपयुक्त माहौल नहीं दिया गया है।
जवाब में एडवोकेट जनरल डीसी रैना ने सरकार का पक्ष रखते हुए कहा कि एनआईटी कैंपस में सीआरपीएफ केजवान तैनात कर दिए गए हैं। सरकार ने सुरक्षा के इंतजाम किए हैं। भारत माता जय के नारे लगाना अपराध नहीं है। न्यायिक जांच के साथ ही एनआईटी प्रशासन की भी अलग से जांच चल रही है।