वृद्धाश्रम के बुजुर्गों की सरकार ने भी अनदेखी की
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कभी सरकार चुनने में अपनी भूमिका निभाने वाले इन बुजुर्गों के पास मतदाता पहचान पत्र तक नहीं है। अंबफला स्थित ओल्डएज होम में रहने वाले पच्चास के करीब बुजुर्गों के पास मतदाता पहचान पत्र नहीं है।
वह अब ऐसी कोई पहचान चाहते भी नहीं हैं। वृद्धाश्रम में रहने वाले केवल कृष्ण कहते हैं कि हम रोज समाचार पत्र पढ़ते हैं। पता है कि चुनाव होने वाले हैं। मतदाता सूचियां प्रकाशित हो गई हैं, लेकिन हम वोट नहीं दे सकते, क्योंकि हमारे पास वोटर कार्ड नहीं है। विष्णु दत्त भी उदासी के भाव में कहते हैं कि हमारी परिवार के साथ-साथ सरकार ने भी अनदेखी की है।
वोट देने योग्य पर नहीं अधिकार
एसओएस होम छन्नी हिम्मत और कच्ची छावनी स्थित नेहा घर में रहने वालों के पास भी राज्य विधानसभा चुनावों में मतदान करने का अधिकार नहीं है। नेहा घर में रहने वाली तीन महिलाओं के पास वोटर कार्ड नहीं है। तीनों ही राज्य की नागरिक हैं।
वहीं एसओएस छन्नी हिम्मत में आठ से दस बच्चे ऐसे हैं जो अठारह वर्ष की आयु को पार कर चुके हैं। यह वोट देने के योग्य हैं, लेकिन इनमें से किसी के पास भी वोटर कार्ड नहीं है।
दूसरी ओर दोनों ही मामलों से सह चुनाव अधिकारी जय कुमार ने अनभिज्ञता जताई है। उन्होंने कहा कि हमें मामले की जानकारी नहीं है। अगर वे मतदान करने योग्य हैं तो उन्हें सूचियों में शामिल करने के लिये सूचीबद्ध किया जाएगा। इसके साथ ही यह संस्थानों के इंचार्जों की भी जिम्मेदारी बनती है कि वे संबंधित बीएलओ के पास जाकर मामले की जानकारी दें।