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रिपोर्ट: जम्मू-कश्मीर में बीते 6 महीने में 82 प्रतिशत आतंकियों का सफाया, फिर भी नई भर्ती जारी

Tue, 30 Jul 2019 09:43 AM IST
राजेश सैनी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: राजेश सैनी Updated Tue, 30 Jul 2019 09:43 AM IST
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The end of 82 percent of terror last six months in Jammu and Kashmir New Recruitment Continued
सेना का काफिला - फोटो : फाइल, अमर उजाला

जम्मू कश्मीर में आधा साल बीत जाने के बाद अब तक 121 आतंकी मारे जा चुके हैं जिनमें से 21 पाकिस्तान मूल के हैं। अर्थात कुल मारे गए आतंकियों में से 82 प्रतिशत आतंकी केवल कश्मीर घाटी के ही थे। इसमें से अधिकतम मुठभेड़ दक्षिणी कश्मीर में हुई जिनमें 36 आतंकी पुलवामा, 34 आतंकी शोपियां और 16 आतंकी अनंतनाग के मारे गए। 

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गौरतलब हो साल 2019 में भी कश्मीरी युवाओं के आतंकी संगठनों से जुड़ने के आंकड़ों में गिरावट नहीं आई है। एक अंग्रेजी अखबार के मुताबिक साल 2019 में नए आतंकियों की भर्ती में कोई कमी नहीं आई है। यह सिलसिला लगातार जारी है और अभी तक 76 युवा बंदूक उठा चुके हैं जिनमें 39 हिजबुल मुजाहिद्दीन और 21 जैश-ए-मोहम्मद में शामिल हुए हैं। 
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इसमें अधिकतम दक्षिण कश्मीर के युवा शामिल हैं। नए आतंकियों में 20 पुलवामा, 15 शोपियां, 13 अनंतनाग और कुछ युवा कुलगाम से भी हैं। ये सभी जनवरी से लेकर जून के बीच आतंकी संगठनों से जुड़े। राज्य में फैले आतंक के आंकड़ों की यह जानकारी सरकारी दस्तावेजों में मौजूद है। ऐसे में यह कहना बिलकुल गलत न होगा कि दक्षिणी कश्मीर में आतंक चरम पर है और वहां के स्थानीय युवा बंदूक उठा रहे हैं। 
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वहीं एक अंग्रेजी अखबार की रिपोर्ट की मानें तो इस साल गर्मी के महीनों में सीमा पर क्रॉस बार्डर एक्शन व घुसपैठ नहीं हुई है। देखा जाए तो सीज फायर का उल्लंघन अधिकतम जगहों पर छोटे हथियारों से ही किया गया है। 

जम्मू कश्मीर में बीते 6 महीने में 100 से अधिक आतंकी गतिविधियों में 32 पुलवामा, 23 शोपियां, 15 अनंतनाग और 10 श्रीनगर में घटित हुई हैं। इसमें अधिकतम आतंकी गतिविधियां सुरक्षाबलों पर फायरिंग, ग्रेनेड फेंकने, पेट्रोल बम फेंकने, आईईडी से हमला करने, हथियार छीनने और सुरक्षाबलों को बंदी बनाने जैसी घटनाएं शामिल हैं।

वहीं 228 पत्थरबाजी के मामले, 346 प्रदर्शन और बीते 6 महीने में 10 बार कश्मीर बंद का आवाह्न किया गया है। याद हो इस बार लोकसभा चुनाव भी कई चरणों में कराए गए थे। वहीं मई महीने में पत्थरबाजी के 101 मामले दर्ज किए गए और 114 प्रदर्शन किए गए। 


रिपोर्ट के मुताबिक बीते 6 माह में 71 जवान शहीद हुए हैं और 115 जवान गंभीर रूप से घायल हुए हैं। इसमें अधिकतम शहादत 14 फरवरी के उस बम धमाके की है जिसमें सीआरपीएफ की बस पर हमला किया गया था। उस अकेली घटना में सीआरपीएफ के 40 जवान शहीद हुए थे। बीते 6 माह में अब तक 15 जवान शहीद हुए हैं। उधर सेंट्रल आर्म्ड पुलिस फोर्स के 48 व जम्मू कश्मीर पुलिस के आठ जवान शहीद हुए हैं।    

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