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Jammu News: कश्मीर के हस्तशिल्प और कालीन कारोबार को संवारने उतरी केंद्र सरकार
Wed, 10 Sep 2025 01:25 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Wed, 10 Sep 2025 01:25 AM IST
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जम्मू। घाटी के हस्तशिल्प और कालीन उद्योग को नई राह देने के लिए मंगलवार को केंद्रीय वस्त्र सचिव नीलम शामि राव श्रीनगर पहुंचीं। उन्होंने कारोबारियों, निर्यातकों और बुनकरों से बातचीत कर उनके सुझाव सुने और भरोसा दिलाया कि केंद्र सरकार इस क्षेत्र को मजबूती देने के लिए हरसंभव कदम उठाएगी। बता दें कि सोमवार को अमर उजाला में इसी मुद्दे पर प्रमुखता से खबर प्रकाशित हुई थी।
नीलम शामि राव ने बातचीत में कहा कि नकली और मशीन से बनी वस्तुओं पर रोक लगाने के लिए मजबूत परीक्षण और प्रमाणन प्रणाली बनाई जाएगी ताकि कश्मीर की असली पहचान सुरक्षित रह सके। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने कपड़ा और हस्तशिल्प क्षेत्र पर लगने वाले जीएसटी को 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया है। इसका सीधा फायदा कारोबारियों और बुनकरों को मिलेगा। बैठक में सचिव ने जोर दिया कि कश्मीरी हस्तशिल्प और हैंडलूम को यूरोप, ब्रिटेन और खाड़ी देशों जैसे नए बाजारों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि घाटी की कारीगरी की ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार पर मिलकर काम करना होगा तभी बड़े बाजार में पैठ बनाई जा सकती है।
केंद्रीय सचिव ने बडगाम स्थित निफ्ट परिसर का भी दौरा किया। यहां उन्होंने छात्रों के बनाए उत्पाद देखे और उनकी मेहनत की सराहना की। इसके अलावा उन्होंने कनिहामा में क्राफ्ट हैंडलूम गांव का उद्घाटन किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि गांव का व्यापक प्रचार हो, ताकि पर्यटक यहां पहुंचकर सीधे बुनकरों से खरीददारी कर सकें। दौरे के दौरान उन्होंने मानसबल में रेशम बोर्ड के बीज फार्म का भी जायजा लिया और वहां सीरी-पर्यटन परियोजना का उद्घाटन किया। केंद्रीय वस्त्र सचिव ने स्पष्ट किया कि सरकार जम्मू- कश्मीर के हस्तशिल्प और कालीन कारोबार को केवल परंपरा के रूप में नहीं देख रही, बल्कि इसे रोजगार और विकास के बड़े जरिये के तौर पर आगे बढ़ाना चाहती है।
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नीलम शामि राव ने बातचीत में कहा कि नकली और मशीन से बनी वस्तुओं पर रोक लगाने के लिए मजबूत परीक्षण और प्रमाणन प्रणाली बनाई जाएगी ताकि कश्मीर की असली पहचान सुरक्षित रह सके। उन्होंने यह भी बताया कि सरकार ने कपड़ा और हस्तशिल्प क्षेत्र पर लगने वाले जीएसटी को 12 प्रतिशत से घटाकर पांच प्रतिशत कर दिया है। इसका सीधा फायदा कारोबारियों और बुनकरों को मिलेगा। बैठक में सचिव ने जोर दिया कि कश्मीरी हस्तशिल्प और हैंडलूम को यूरोप, ब्रिटेन और खाड़ी देशों जैसे नए बाजारों तक पहुंचाने की कोशिश की जा रही है। उन्होंने कहा कि घाटी की कारीगरी की ब्रांडिंग और प्रचार-प्रसार पर मिलकर काम करना होगा तभी बड़े बाजार में पैठ बनाई जा सकती है।
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केंद्रीय सचिव ने बडगाम स्थित निफ्ट परिसर का भी दौरा किया। यहां उन्होंने छात्रों के बनाए उत्पाद देखे और उनकी मेहनत की सराहना की। इसके अलावा उन्होंने कनिहामा में क्राफ्ट हैंडलूम गांव का उद्घाटन किया और अधिकारियों को निर्देश दिया कि गांव का व्यापक प्रचार हो, ताकि पर्यटक यहां पहुंचकर सीधे बुनकरों से खरीददारी कर सकें। दौरे के दौरान उन्होंने मानसबल में रेशम बोर्ड के बीज फार्म का भी जायजा लिया और वहां सीरी-पर्यटन परियोजना का उद्घाटन किया। केंद्रीय वस्त्र सचिव ने स्पष्ट किया कि सरकार जम्मू- कश्मीर के हस्तशिल्प और कालीन कारोबार को केवल परंपरा के रूप में नहीं देख रही, बल्कि इसे रोजगार और विकास के बड़े जरिये के तौर पर आगे बढ़ाना चाहती है।
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