कश्मीर में कम बर्फबारी का लाभ उठाने की फिराक में आतंकी
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कश्मीर में होने वाली कम बर्फबारी का आतंकी लाभ उठाने की साजिश कर रहे हैं। अमूमन बर्फ पिघलने के बाद गर्मियों में आतंकियों की घुसपैठ शुरू होती है, लेकिन इस बार आतंकी गर्मियों से पहले ही घुसपैठ कर सकते हैं।
सुरक्षा एजेंसियों और पुलिस के पास इसके पुख्ता इनपुट पहुंचे हैं। इस आशंका को देखते हुए घाटी में एलओसी से घुसपैठ के तमाम संभावित रास्तों पर सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ा दी गई है।
उत्तर कश्मीर में नवंबर की शुरुआत में ही बर्फ गिरने लगती है। दिसंबर तक एलओसी पर अच्छी खासी बर्फ गिरती है। इससे आतंकियों के घुसपैठ के रास्ते बंद हो जाते हैं।
सुरक्षा बलों ने घुसपैठ के सभी रास्तों पर गर्मियों से पहले ही निगरानी बढ़ाई
बर्फबारी की वजह से आतंकियों के घुसपैठ के रास्ते बंद हो जाते हैं। इसके बाद अप्रैल में बर्फ पिघलने पर आतंकी घुसपैठ के लिए फिर से सक्रिय हो जाते हैं। लेकिन इस साल नवंबर, दिसंबर में बहुत कम बर्फबारी हुई। इस वजह से घुसपैठ के रास्ते खुले ही रहे।
अब जनवरी में बर्फ गिर रही है, लेकिन यह बर्फ जल्दी ही पिघल जाती है। उत्तर कश्मीर में ही एलओसी से ज्यादा घुसपैठ होती है। पिछले साल पचास से ज्यादा आतंकी इसी इलाके से घुसपैठ कर कश्मीर में घुसे थे।
उत्तर कश्मीर के डीआईजी गरीब दास का कहना है कि आतंकी फरवरी में ही घुसपैठ के लिए सक्रिय हो जाएंगे, ऐसे इनपुट मिल रहे हैं। इसलिए आतंकियों के सभी संभावित रूटों पर कड़ी निगरानी रखी जा रही है ताकि वह घुसपैठ न कर सकें। जनवरी में होने वाली बर्फ की लाइफ कम होती है। आतंकी इसका लाभ उठाने की कोशिश में हैं।