{"_id":"5754657b4f1c1bd6451093a4","slug":"terrorist-use-calculator-app-for-infiltrate","type":"feature-story","status":"publish","title_hn":"घुसपैठ करने के लिए आतंकी इस्तेमाल कर रहे ‘कैलकुलेटर’ एप","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
घुसपैठ करने के लिए आतंकी इस्तेमाल कर रहे ‘कैलकुलेटर’ एप
एजेंसी/ श्रीनगर
Updated Mon, 06 Jun 2016 10:16 AM IST
विज्ञापन
आतंकवादी
- फोटो : Demo Pic.
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सेना की निगरानी से बचकर जम्मू एवं कश्मीर में घुसपैठ करने के लिए आतंकी ‘कैलकुलेटर’ नामक नए एप का इस्तेमाल कर रहे हैं। जम्मू एवं कश्मीर में घुसपैठ कर रहे आतंकियों के स्मार्ट फोन में नया कैलकुलेटर एप पाया गया है।
आतंकी इस एप की मदद से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में बैठे अपने आकाओं के संपर्क में रहते हैं और सेना के टेक्निकल सर्विलांस की पकड़ में भी नहीं आते हैं। इस साल पीओके से घुसपैठ करने वाले आतंकियों की संख्या में इजाफा दिखने को मिला है।
सेना ने पाया कि आतंकी अपने साथ एक स्मार्ट फोन लेकर घुसपैठ कर रहे हैं। इसमें कैलकुलेटर एप होता है और इसमें किसी तरह का मैसेज स्टोर नहीं होता है।
विज्ञापन
आतंकी इस एप की मदद से पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (पीओके) में बैठे अपने आकाओं के संपर्क में रहते हैं और सेना के टेक्निकल सर्विलांस की पकड़ में भी नहीं आते हैं। इस साल पीओके से घुसपैठ करने वाले आतंकियों की संख्या में इजाफा दिखने को मिला है।
विज्ञापन
सेना ने पाया कि आतंकी अपने साथ एक स्मार्ट फोन लेकर घुसपैठ कर रहे हैं। इसमें कैलकुलेटर एप होता है और इसमें किसी तरह का मैसेज स्टोर नहीं होता है।
अमेरिका की कंपनी ने सबसे पहले किया था इस्तेमाल
terrorist
- फोटो : FILE
सेना की सिग्नल यूनिट वायरलेस उपकरण और मोबाइल फोन को इंटरसेप्ट करके सीमा पार से घुसपैठ करने वाले आतंकी संगठनों पर नजर रखती है, लेकिन, आतंकियों की ओर से इस एप का इस्तेमाल करने से सुरक्षा एजेंसियों के सामने चुनौती खड़ी हो गई है।
राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ) और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर सेना की सिग्नल यूनिट आतंकियों की इस तकनीक का तोड़ ढूंढ रही है।
इस तकनीक का सबसे पहले इस्तेमाल अमेरिका की एक कंपनी ने ‘कैटरीना’ तूफान के कहर के दौरान किया था। तूफान की चपेट में आए लोग आपस में एक-दूसरे से संपर्क करने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया था।
आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कुछ आतंकियों से पूछताछ में पता चला कि आतंकी संगठन ने इस तकनीक का इस्तेमाल करके कैलकुलेटर नामक एप तैयार किया है। इसको ऑफ-एयर नेटवर्क से जुड़े स्मार्ट फोन पर डाउन लोड किया जा सकता है।
राष्ट्रीय तकनीकी अनुसंधान संगठन (एनटीआरओ) और अन्य एजेंसियों के साथ मिलकर सेना की सिग्नल यूनिट आतंकियों की इस तकनीक का तोड़ ढूंढ रही है।
इस तकनीक का सबसे पहले इस्तेमाल अमेरिका की एक कंपनी ने ‘कैटरीना’ तूफान के कहर के दौरान किया था। तूफान की चपेट में आए लोग आपस में एक-दूसरे से संपर्क करने के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल किया था।
आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा के कुछ आतंकियों से पूछताछ में पता चला कि आतंकी संगठन ने इस तकनीक का इस्तेमाल करके कैलकुलेटर नामक एप तैयार किया है। इसको ऑफ-एयर नेटवर्क से जुड़े स्मार्ट फोन पर डाउन लोड किया जा सकता है।