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घाटी में आतंकवाद को समर्थन लगभग समाप्त, लोग अब शांति चाहते हैं-ले. जनरल राजू
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद को समर्थन मिलना लगभग समाप्त हो गया है। लोग अब शांति चाहते हैं। पिछले दिनों उत्तर कश्मीर में जो कुछ हिंसात्मक घटनाएं हुईं वह आतंकवादियों की हताशा का सूचक हैं। यह बात कश्मीर में सेना की 15वीं कोर के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल बीएस राजू ने रविवार को यहां कही।
उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया कि लोग अब हिंसा के कुचक्र से बाहर निकलना चाहते हैं। आतंकियों को स्थानीय समर्थन कितना घटा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आतंकी तंजीमों में स्थानीय युवाओं की संख्या में काफी गिरावट दर्ज की गई है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद मूल रूप से पाकिस्तान द्वारा फैलाए गए दुष्प्रचार से प्रेरित है। आतंकवादी स्थानीय लोगों का समर्थन नहीं जुटा पा रहे हैं।
उत्तरी कश्मीर में हाल ही में हुई आतंकवादी हिंसा में सेना के एक कर्नल, एक मेजर और कुछ सीआरपीएफ जवानों की शहादत के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये हमले किसी भी तरह से आतंकवादियों की बढ़ती उपस्थिति का संकेत नहीं देते हैं। वास्तव में आतंकवादी संगठनों में स्थानीय युवाओं की भर्ती वर्ष 2018 से 2019 के बीच लगभग आधी हो गई और 2020 में और कम हुई है। उन्होंने इस संख्या का खुलासा नहीं किया कि कितने युवा आतंकी तंजीमों में शामिल हुए।
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जम्मू-कश्मीर के पुलिस प्रमुख दिलबाग सिंह ने कुछ समय पहले कहा था कि 2018 में 218 स्थानीय युवा आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए थे, लेकिन 2019 में केवल 139 शामिल हुए। इस वर्ष आतंकवादी समूहों में शामिल होने वाले स्थानीय युवाओं की संख्या का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन खुफि या एजेंसियों के सूत्रों ने संकेत दिया है कि 2020 में लगभग 35 स्थानीय युवा गायब हो गए और आतंकवादी समूहों में शामिल हो गए हैं।
हालांकि ले. जनरल राजू का कहना है कि अब अधिक से अधिक युवा खेल, कौशल विकास की पहल, नौकरी के अवसरों और शिक्षा प्रतियोगिताओं में शामिल हो रहे हैं। आगामी सेना भर्ती रैली के लिए 10 हजार युवा ऑनलाइन पंजीकरण करवा चुके हैं। यह संख्या गत वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी है। सरकार ने स्थानीय युवाओं को अपने लिए बेहतर भविष्य बनाने और अपने परिवारों का समर्थन करने में मदद की है और यह तथ्य कश्मीर में होने वाले परिवर्तन का एक वसीयतनामा है।
सीमावर्ती जिलों तक सीमित है आतंकवाद
सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उग्रवाद उत्तरी कश्मीर में नहीं है, बल्कि घुसपैठ के प्रयासों और आतंकवादियों की बड़ी संख्या के कारण सीमावर्ती जिलों तक सीमित है। इन इलाकों में आतंकी एक आधार तैयार करना चाहते हैं ताकि घुसपैठ आसानी से करवा सकें।
हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार
ले. जनरल राजू ने कहा कि हम किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए सेना, जेके पुलिस, सीआरपीएफ, खुफिया एजेंसियों और नागरिक प्रशासन के सहयोग से तैयार हैं।
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उन्होंने एक साक्षात्कार में बताया कि लोग अब हिंसा के कुचक्र से बाहर निकलना चाहते हैं। आतंकियों को स्थानीय समर्थन कितना घटा है इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि आतंकी तंजीमों में स्थानीय युवाओं की संख्या में काफी गिरावट दर्ज की गई है। जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद मूल रूप से पाकिस्तान द्वारा फैलाए गए दुष्प्रचार से प्रेरित है। आतंकवादी स्थानीय लोगों का समर्थन नहीं जुटा पा रहे हैं।
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उत्तरी कश्मीर में हाल ही में हुई आतंकवादी हिंसा में सेना के एक कर्नल, एक मेजर और कुछ सीआरपीएफ जवानों की शहादत के सवाल पर उन्होंने कहा कि ये हमले किसी भी तरह से आतंकवादियों की बढ़ती उपस्थिति का संकेत नहीं देते हैं। वास्तव में आतंकवादी संगठनों में स्थानीय युवाओं की भर्ती वर्ष 2018 से 2019 के बीच लगभग आधी हो गई और 2020 में और कम हुई है। उन्होंने इस संख्या का खुलासा नहीं किया कि कितने युवा आतंकी तंजीमों में शामिल हुए।
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जम्मू-कश्मीर के पुलिस प्रमुख दिलबाग सिंह ने कुछ समय पहले कहा था कि 2018 में 218 स्थानीय युवा आतंकवादी संगठनों में शामिल हुए थे, लेकिन 2019 में केवल 139 शामिल हुए। इस वर्ष आतंकवादी समूहों में शामिल होने वाले स्थानीय युवाओं की संख्या का कोई आधिकारिक आंकड़ा नहीं है, लेकिन खुफि या एजेंसियों के सूत्रों ने संकेत दिया है कि 2020 में लगभग 35 स्थानीय युवा गायब हो गए और आतंकवादी समूहों में शामिल हो गए हैं।
हालांकि ले. जनरल राजू का कहना है कि अब अधिक से अधिक युवा खेल, कौशल विकास की पहल, नौकरी के अवसरों और शिक्षा प्रतियोगिताओं में शामिल हो रहे हैं। आगामी सेना भर्ती रैली के लिए 10 हजार युवा ऑनलाइन पंजीकरण करवा चुके हैं। यह संख्या गत वर्ष की तुलना में लगभग दोगुनी है। सरकार ने स्थानीय युवाओं को अपने लिए बेहतर भविष्य बनाने और अपने परिवारों का समर्थन करने में मदद की है और यह तथ्य कश्मीर में होने वाले परिवर्तन का एक वसीयतनामा है।
सीमावर्ती जिलों तक सीमित है आतंकवाद
सेना के वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि उग्रवाद उत्तरी कश्मीर में नहीं है, बल्कि घुसपैठ के प्रयासों और आतंकवादियों की बड़ी संख्या के कारण सीमावर्ती जिलों तक सीमित है। इन इलाकों में आतंकी एक आधार तैयार करना चाहते हैं ताकि घुसपैठ आसानी से करवा सकें।
हम किसी भी स्थिति से निपटने के लिए तैयार
ले. जनरल राजू ने कहा कि हम किसी भी आकस्मिक स्थिति से निपटने के लिए सेना, जेके पुलिस, सीआरपीएफ, खुफिया एजेंसियों और नागरिक प्रशासन के सहयोग से तैयार हैं।