नावेद और शौकत की मुलाकात तो हुए, पर बात नहीं हुई
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जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ के बाद लश्कर के ओवर ग्राउंड वर्कर शौकत अहमद भट (निवासी पुलवामा) के साथ कश्मीर के कई स्थानों पर पहुंचने वाले पाकिस्तानी आतंकी मोहम्मद नावेद याकूब का शुक्रवार को लंबे समय बाद अपने मददगार से आमना-सामना हो गया।
बताया जाता है कि अलग कमरे में दोनों कुछ देर के लिए रहे। लेकिन उनके बीच कोई बातचीत नहीं हुई। हुआ यूं कि एनआईए की एक टीम सुबह लगभग आठ बजे शौकत को लेकर पहुंची और उसे सीधा एनआईए की विशेष अदालत के अंदर कमरे में ले गई। इस दौरान उसके चेहरे पर नकाब था।
एनआईए अधिकारियों ने उसकी ब्रेन मैपिंग और लाई डिटेक्टर टेस्ट की अनुमति के लिए आवेदन पेश करना था। इसी दौरान पुलिस के बुलेट प्रूफ रक्षक वाहन में दूसरी टीम नावेद को लेकर पहुंची। नावेद को हेलमेट पहना कर लाया गया। अदालत में पहुंचने के बाद दोनों के चेहरे से नकाब और हेलमेट उतार दिया गया, लेकिन वह अलग-अलग बैठे रहे।
शौकत ने कैसे की थी आतंकी नावेद की मदद
गौरतलब है कि नावेद से पूछताछ के आधार पर शौकत को पुलिस ने पुलवामा से गिरफ्तार किया था। 36 वर्षीय भट ने लश्कर के चार आतंकियों मोहम्मद नावेद याकूब (बाद में जिंदा पकड़ा गया), झाड़गाम उर्फ मोहम्मद भाई, ओकासा और मोहम्मद नोमान उर्फ मोमिन (उधमपुर हमले में ढेर) को घुसपैठ के बाद वाहन से बारामुला के बाबा रेशी से दक्षिण कश्मीर पहुंचाया था।
उसके बाद आतंकियों का दल दो हिस्सों में बंट गया था। एक ग्रुप ने पांच अगस्त को उधमपुर में बीएसएफ काफिले पर हमला किया था। शुक्रवार को हालांकि नावेद देर से पहुंचा था, लेकिन उसकी रिमांड अवधि बढ़ते ही शौकत से पहले ही टीम उसे लेकर कोट भलवाल जेल रवाना हो गई।
पाकिस्तानी आतंकी नावेद अदालत में पेशी के दौरान किसी भी तरह से मायूस नहीं था। उसने मटैले रंग का कुर्ता पैजामा और हवाई चप्पल पहन रखी थी। वहीं शौकत तीन दिन पहले वाले चेक शर्ट और ट्रैक पैंट में नजर आया।