एनआई की कार्रवाई: घाटी में कश्मीरी पंडितों के लिए दहशत था आतंकी लटरम, मई 1990 में कर दी थी चार की सरेआम हत्या
जम्मू कश्मीर के पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद ने बताया कि पीओजेके में रहने वाला लटरम डाउनटाउन में आतंकवाद के लिए पूरी तौर पर जिम्मेदार था। वह सुरक्षा बलों सीआरपीएफ, बीएसएफ, सेना व पुलिस पर हमले करता था। अब एनआईए ने उसकी संपत्ति कुर्क की है।
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अल उमर मुजाहिदीन प्रमुख मुश्ताक जरगर लटरम श्रीनगर के डाउनटाउन में कश्मीरी पंडितों समेत कई लोगों की हत्या में शामिल रहा था। कश्मीरी पंडितों का मानना है कि लटरम उस समय उनके लिए दहशत का दूसरा नाम था। उसके डर से लोग डाउनटाउन में घरों से बाहर निकलने से डरते थे।
कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू का कहना है कि मई 1990 में उसने दिनदहाड़े रहबाग आलीकदल में चार कश्मीरी पंडितों की हत्या कर दी। इसी घर में सात महीने की गर्भवती तेजा धर को भी उसने गोली मार दी थी, जिससे गर्भ भी गिर गया था।
हत्या की वजह यह थी कि जेकेएलएफ ने तेजा के पति से धमकी देकर पैसे वसूले थे। जब इसकी जानकारी लटरम को हुई तो वह भी वसूली करने पहुंच गया। विवाद होने पर उसने सभी की गोली मारकर हत्या कर दी।
डाउनटाउन में उसका जबर्दस्त आतंक था। उसे जिस पर मुखबिरी करने का शक होता था उसकी पीठ पर ग्रेनेड बांधकर उड़ा देता था। एनआईए की ओर से की गई कार्रवाई देर आए दुरुस्त आए वाली कहावत को चरितार्थ करता है।
जेके पीस फोरम के सतीश महालदार का कहना है कि एनआईए का कदम अच्छा है। कम से कम इससे दहशतगर्दों के परिवार में खौफ का माहौल होगा। देश विरोधी तथा आतंकी गतिविधियों में शामिल लोगों में यह भय होगा कि उनका हश्र भी यही होगा।
यह कार्रवाई और पहले होनी चाहिए थी। लेकिन उन लोगों को भी चिह्नित कर उनके खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए जिनकी वजह से उसे पकड़े जाने के बाद भी सजा नहीं मिल पाई।
लटरम के खिलाफ कार्रवाई से आतंकवाद परस्त लोगों के खिलाफ जाएगा संदेश: वैद
कंधार कांड के दौरान कोट भलवाल जेल में बंद मसूद अजहर को जेल से लेकर एयरपोर्ट लेकर जाने वाले तत्कालीन डीआईजी जम्मू व पूर्व डीजीपी डॉ. एसपी वैद का कहना है कि लटरम डाउनटाउन में आतंकवाद के लिए पूरी तौर पर जिम्मेदार था।
वह सुरक्षा बलों सीआरपीएफ, बीएसएफ, सेना व पुलिस पर हमले करता था। नब्बे के शुरुआत में उसने कश्मीरी पंडितों पर भी हमले किए। उनका कहना है कि उसके घर को कुर्क किया जाना अच्छा कदम है।
इससे आतंकवाद परस्त लोगों के खिलाफ अच्छा संदेश जाएगा। हालांकि, यह तभी होना चाहिए था जब 1999 में कंधार कांड के दौरान उसे छोड़ा गया था। ज्ञात हो कि कंधार कांड में ही लटरम को भी अपहृत यात्रियों की रिहाई के बदले छोड़ा गया था।