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Jammu News: कठुआ आतंकी हमले में दो ओजीडब्ल्यू गिरफ्तार
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- सेना के काफिले पर हुए हमले में दहशतगर्दों की मदद की थी
- पुलिस से जानकारियां छिपाईं, 40 अन्य पर भी कार्रवाई तय
-इस हमले में एक जेसीओ
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। पुलिस ने जिले में आतंकियों के मददगारों के नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए दो ओवर ग्राउंड वर्करों (ओजीडब्ल्यू) को गिरफ्तार किया है। साथ ही 40 अन्य के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई तय की है। आरोप है कि पकड़े गए दोनों मददगारों ने बदनोता इलाके में आठ जुलाई को सेना के काफिले पर हुए हमले में आतंकियों की मदद की थी। इस हमले में एक जूनियर कमीशंड अफसर समेत पांच जवान बलिदान हो गए थे जबकि पांच अन्य घायल हुए थे।
पुलिस के अनुसार, इन मददगारों ने आतंकियों की मदद करने के साथ ही उनकी जानकारी भी पुलिस से छुपाई थी। जिससे पुलिस को आतंकी गतिविधियों को रोकने के प्रयासों में बाधा उत्पन्न हुई। मामले में अबतक 100 से अधिक व्यक्तियों से पूछताछ की गई है। पकड़े दोनों मददगारों की शिनाख्त लियाकत अली उर्फ पावू निवासी वार्ड नंबर सात कालना धनु परोल तहसील बिलावर और मूल राज उर्फ जूंजु निवासी बावली मोहल्ला मल्हार के रूप में हुई है। पुलिस मल्हार थाने में एफआईआर संख्या 18/2024 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(1), 113,147,150 और 2/3 निकास और आंतरिक आवागमन नियंत्रण अध्यादेश के तहत मामला दर्ज कर जांच कर रही है। गिरफ्तार किए गए आतंकी मददगारों को पूछताछ के लिए 16 और 17 जुलाई को हिरासत में लिया गया था।
चार और लोग हिरासत में
पुलिस ने वीरवार को चार और लोगों को बनी क्षेत्र से पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई ढग्गर के ढोक इलाके सौनकुंड में की गई है। हिरासत में लिए गए लोगों में कुछ बिलावर के बग्गन तो कुछ कठुआ क्षेत्र के बताए जा रहे हैं।
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लोगों से सतर्क रहने की अपील
पुलिस ने जनता से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या फिर 100 अथवा 9858034100 पर देने की भी अपील की।
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लोहाई मल्हार और बनी के इलाकों में लगातार सक्रिय थे आतंकी
-मददगारों ने दहशतगर्दों को उपलब्ध करवाया इंटरनेट, हॉटस्पॉट और खाना
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। घुसपैठ और बसंतगढ़ इलाके में में ग्राम रक्षा गार्ड (वीडीजी) की हत्या के बाद से ही आतंकियों के दल लोहाई मल्हार और बनी के इलाकों में लगातार मूवमेंट कर रहे थे। जंगलों का सहारा लेने के साथ ये आतंकी दूर दराज के इलाकों में ढोक को आश्रय बनाए हुए थे। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
खुफिया सूत्रों का दावा है कि आतंकियों ने इलाके में सुरक्षाबलों की कमी का फायदा उठाया। इसकी वजह से कि आतंकियों को इन इलाके की रेकी करने और फिर घात लगाने का मौका भी मिल गया। सेना के पांच जवान बलिदान और पांच अन्य बुरी तरह से घायल हो गए।
जानकारी के अनुसार, नौ जुलाई को ही पुलिस की ओर से बदनोता हमले के बाद ओवर ग्राउंड वर्करों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए काम शुरू किया गया। इस दौरान पुलिस ने दर्जनों लोगों से पूछताछ की। कड़ियां भी जुड़ती नजर आईं। खूफिया सूत्रों का दावा है कि पूछताछ में इस बात का खुलासा हुआ है कि ओवर ग्राउंड वर्करों ने आतंकियों को कॉलिंग या संपर्क के लिए मोबाइल हॉट स्पॉट, इंटरनेट और खाना उपलब्ध करवाया था।
यह भी पता चला है कि आतंकी मददगारों के पास एक बार छह और एक बार तीन आतंकियों का दल पहुंचा था। ऐसे में साफ है कि इलाके में बड़े पैमाने पर घुसपैठ के बाद आतंकी अपना ठिकाना तैयार कर रहे थे। आतंकियों के दल ने अपने फोन नेटवर्क का इस्तेमाल नहीं किया है बल्कि हॉट स्पॉट का इस्तेमाल किया जा रहा है।
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आतंकियों के जंगलों में छिपे होने की आशंका
ऐसी आशंका जताई जा रही है कि बनी के रिंड ओंड के इलाके और मल्हार के इलाके में आतंकियों ने इन ओवर ग्राउंड वर्करों से मदद ली थी। यह भी पता चला है कि बदनोता और बसतंगढ़ में दो -दो बड़े हमलों को अंजाम देने के बाद भी यह आतंकी पिछले कई दिनों से जंगल में छिपे हैं और फिलहाल सुरक्षाबलों को इनकी तलाश जारी है।
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- पुलिस से जानकारियां छिपाईं, 40 अन्य पर भी कार्रवाई तय
-इस हमले में एक जेसीओ
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। पुलिस ने जिले में आतंकियों के मददगारों के नेटवर्क का भंडाफोड़ करते हुए दो ओवर ग्राउंड वर्करों (ओजीडब्ल्यू) को गिरफ्तार किया है। साथ ही 40 अन्य के खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई तय की है। आरोप है कि पकड़े गए दोनों मददगारों ने बदनोता इलाके में आठ जुलाई को सेना के काफिले पर हुए हमले में आतंकियों की मदद की थी। इस हमले में एक जूनियर कमीशंड अफसर समेत पांच जवान बलिदान हो गए थे जबकि पांच अन्य घायल हुए थे।
पुलिस के अनुसार, इन मददगारों ने आतंकियों की मदद करने के साथ ही उनकी जानकारी भी पुलिस से छुपाई थी। जिससे पुलिस को आतंकी गतिविधियों को रोकने के प्रयासों में बाधा उत्पन्न हुई। मामले में अबतक 100 से अधिक व्यक्तियों से पूछताछ की गई है। पकड़े दोनों मददगारों की शिनाख्त लियाकत अली उर्फ पावू निवासी वार्ड नंबर सात कालना धनु परोल तहसील बिलावर और मूल राज उर्फ जूंजु निवासी बावली मोहल्ला मल्हार के रूप में हुई है। पुलिस मल्हार थाने में एफआईआर संख्या 18/2024 में भारतीय न्याय संहिता की धारा 61(1), 113,147,150 और 2/3 निकास और आंतरिक आवागमन नियंत्रण अध्यादेश के तहत मामला दर्ज कर जांच कर रही है। गिरफ्तार किए गए आतंकी मददगारों को पूछताछ के लिए 16 और 17 जुलाई को हिरासत में लिया गया था।
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चार और लोग हिरासत में
पुलिस ने वीरवार को चार और लोगों को बनी क्षेत्र से पूछताछ के लिए हिरासत में लिया है। यह कार्रवाई ढग्गर के ढोक इलाके सौनकुंड में की गई है। हिरासत में लिए गए लोगों में कुछ बिलावर के बग्गन तो कुछ कठुआ क्षेत्र के बताए जा रहे हैं।
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लोगों से सतर्क रहने की अपील
पुलिस ने जनता से सतर्क रहने और किसी भी संदिग्ध गतिविधि की सूचना अपने नजदीकी पुलिस स्टेशन या फिर 100 अथवा 9858034100 पर देने की भी अपील की।
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लोहाई मल्हार और बनी के इलाकों में लगातार सक्रिय थे आतंकी
-मददगारों ने दहशतगर्दों को उपलब्ध करवाया इंटरनेट, हॉटस्पॉट और खाना
संवाद न्यूज एजेंसी
कठुआ। घुसपैठ और बसंतगढ़ इलाके में में ग्राम रक्षा गार्ड (वीडीजी) की हत्या के बाद से ही आतंकियों के दल लोहाई मल्हार और बनी के इलाकों में लगातार मूवमेंट कर रहे थे। जंगलों का सहारा लेने के साथ ये आतंकी दूर दराज के इलाकों में ढोक को आश्रय बनाए हुए थे। हालांकि सुरक्षा एजेंसियों को इसकी भनक तक नहीं लगी।
खुफिया सूत्रों का दावा है कि आतंकियों ने इलाके में सुरक्षाबलों की कमी का फायदा उठाया। इसकी वजह से कि आतंकियों को इन इलाके की रेकी करने और फिर घात लगाने का मौका भी मिल गया। सेना के पांच जवान बलिदान और पांच अन्य बुरी तरह से घायल हो गए।
जानकारी के अनुसार, नौ जुलाई को ही पुलिस की ओर से बदनोता हमले के बाद ओवर ग्राउंड वर्करों के नेटवर्क को ध्वस्त करने के लिए काम शुरू किया गया। इस दौरान पुलिस ने दर्जनों लोगों से पूछताछ की। कड़ियां भी जुड़ती नजर आईं। खूफिया सूत्रों का दावा है कि पूछताछ में इस बात का खुलासा हुआ है कि ओवर ग्राउंड वर्करों ने आतंकियों को कॉलिंग या संपर्क के लिए मोबाइल हॉट स्पॉट, इंटरनेट और खाना उपलब्ध करवाया था।
यह भी पता चला है कि आतंकी मददगारों के पास एक बार छह और एक बार तीन आतंकियों का दल पहुंचा था। ऐसे में साफ है कि इलाके में बड़े पैमाने पर घुसपैठ के बाद आतंकी अपना ठिकाना तैयार कर रहे थे। आतंकियों के दल ने अपने फोन नेटवर्क का इस्तेमाल नहीं किया है बल्कि हॉट स्पॉट का इस्तेमाल किया जा रहा है।
आतंकियों के जंगलों में छिपे होने की आशंका
ऐसी आशंका जताई जा रही है कि बनी के रिंड ओंड के इलाके और मल्हार के इलाके में आतंकियों ने इन ओवर ग्राउंड वर्करों से मदद ली थी। यह भी पता चला है कि बदनोता और बसतंगढ़ में दो -दो बड़े हमलों को अंजाम देने के बाद भी यह आतंकी पिछले कई दिनों से जंगल में छिपे हैं और फिलहाल सुरक्षाबलों को इनकी तलाश जारी है।
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