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जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद: इस साल अब तक 89 आतंकी मारे गए, सक्रिय आतंकियों की संख्या 225
Sat, 31 Jul 2021 04:12 PM IST
प्रशांत कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Published by: प्रशांत कुमार
Updated Sat, 31 Jul 2021 04:12 PM IST
सार
कश्मीर घाटी में सुरक्षाबलों को शनिवार को बड़ी कामयाबी मिली है। मसूद अजहर के करीबी और जैश-ए-मोहम्मद के सबसे बड़े आतंकी को सुरक्षाबलों ने पुलवामा में ढेर कर दिया। इस मुठभेड़ में दो आतंकी मारे गए हैं। इसी के साथ इस साल अब तक 89 आतंकियों का खात्मा किया जा चुका है।
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मुठभेड़ के दौरान सुरक्षाबल
- फोटो : अमर उजाला, फाइल फोटो
विस्तार
जम्मू-कश्मीर पुलिस के कश्मीर रेंज के आईजी विजय कुमार ने शनिवार को जैश के टॉप आतंकी लंबू और समीर डार के मारे जाने के बाद मीडिया से बातचीत के दौरान कहा कि अब मसूद अजहर के परिवार से जुड़ा कोई भी आतंकी कश्मीर में सक्रिय नहीं है। बताया कि इस वर्ष अब तक विभिन्न मुठभेड़ों में घाटी में कुल 89 आतंकी मारे जा चुके हैं। आइजीपी ने कहा कि पिछले वर्ष की तुलना यह संख्या कम है, लेकिन अगर इनमें टॉप कमांडरों की बात करें तो वह पिछले वर्ष से ज्यादा मारे गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि मारे गए 89 में से सात पाकिस्तानी हैं, जबकि बाकी स्थानीय आतंकी हैं।
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वहीं जीओसी 15 कोर लेफ्टिनेंट जनरल डीपी पांडे ने कहा कि अगर 2017, 2018 और 2019 की बात करें तो एक समय था जब हम बताया करते थे कि घाटी में 400 से 450 आतंकी सक्रिय हैं। 2020 में यह संख्या 300 आ पहुंची। और आज की अगर बात करें तो यह संख्या 200 से 225 के आसपास है। यह संख्या भी धीरे-धीरे कम होती जा रही है। वहीं घुसपैठ को लेकर पूछे गए सवाल में जीओसी ने कहा कि आज तक हमारे पास मौजूद जानकारी के हिसाब से कोई भी घुसपैठ नहीं हुई है। सूचना आ रही है कि एक-दो प्रयास हुए हैं लेकिन कई ऑपरेशन इन इनपुट्स को ध्यान में रखते हुए चलाए गए हैं।
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बांदीपोरा मुठभेड़ के दौरान मारे गए आतंकियों से संबंधित एक सवाल के जवाब में जीओसी ने बताया कि उस मुठभेड़ में जो तीन आतंकी मारे गए थे उनमें से दो 2017-18 के बीच वीजा के जरिये पाकिस्तान बाघा बॉर्डर के रास्ते से गए थे। पांडे ने बताया कि यह षड्यंत्र है कि यहां से लड़कों को ले जाया जाता रहा है और वहां उन्हें ट्रेनिंग देकर कश्मीर में आतंकी बनाकर भेजा जाता है। उन्होंने बताया कि कई युवा यहां से उचित प्रमाणपत्र लेकर पाकिस्तान पढ़ने के लिए गए, लेकिन उनको आतंकी बनाकर यहां भेजा गया, जिनमें से कई मारे भी जा चुके हैं। जीओसी ने कहा कि जो युवा वहां से सीधे तरीके से वापस आएगा, उसका स्वागत करेंगे लेकिन जो हथियार उठाकर आएगा तो उसे मारना ही है।
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आईजीपी विजय कुमार ने बताया कि कुल अभी तक 40 युवा वीजा के जरिये बाघा बॉर्डर के रास्ते पाकिस्तान गए थे। इस में से 27 अभी तक मुठभेड़ों में मारे गए हैं, जबकि बाकी अभी भी पाकिस्तान में हैं।
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