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'जितना चिल्लाए उतनी मारी गोलियां': रियासी हमले की कहानी चश्मदीदों की जुबानी, बस न गिरती तो सब मर जाते

Mon, 10 Jun 2024 07:41 PM IST
Vikas Kumar अजय मीनिया, अमर उजाला, जम्मू
अजय मीनिया, अमर उजाला, जम्मू Published by: Vikas Kumar Updated Mon, 10 Jun 2024 07:41 PM IST
सार

उत्तर प्रदेश के वाराणसी निवासी अतुल मिश्रा ने बताया कि मैं और मेरी पत्नी बस के अगले हिस्से के दरवाजे वाली सीट पर बैठे थे। अचानक से बस के सामने शीशे टूट गए। इससे पहले कि कुछ समझ आता, चारों से चिंगारी निकलने जैसी आवाजें आने लगीं।

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terror remains on the faces of the injured in the Reasi attack they described the horrifying scene
रियासी में बस पर आतंकी हमला - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

रियासी आतंकी हमले में घायलों के चेहरों पर अब भी खौफनाक मंजर साफ दिख रहा है। घायलों की आपबीती सुनकर पता चलता है कि कितनी कायरता से हमला किया गया। उत्तर प्रदेश के गोंडा की रहने वाली बिटन गुप्ता कहती हैं कि आतंकी शायद बस में घुसकर सबको मारना चाहते थे। यह तो अच्छा हुआ कि बस खाई में गिर गई। नहीं तो आतंकी अगर बस में घुस जाते तो किसी को जिंदा नहीं छोड़ते। वह यात्रियों की चीख पुकार सुनकर और अधिक गोलियां बरसा रहे थे। करीब 15 मिनट तक बस पर फायरिंग होती रही।

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उत्तर प्रदेश के वाराणसी निवासी अतुल मिश्रा ने बताया कि मैं और मेरी पत्नी बस के अगले हिस्से के दरवाजे वाली सीट पर बैठे थे। अचानक से बस के सामने शीशे टूट गए। इससे पहले कि कुछ समझ आता, चारों से चिंगारी निकलने जैसी आवाजें आने लगीं। यह आवाजें चारों तरफ बस के शीशे टूटने की थीं। मैंने अपनी पत्नी को पकड़ा और सीट से खड़े होकर बस के फर्श पर बैठ गए। बस में बैठे अन्य यात्री चीखने चिल्लाने लगे। बहुत से यात्री बचाओ बचाओ की गुहार लगाने लगे। चीख पुकार मचते ही बाहर से गोलियां चलने लगीं। बस में बैठे कुछ यात्रियों ने एक दूसरे को इशारा करके चुप रहने को कहा तो दो मिनट तक गोलियां चलना बंद हो गईं। इतने में बस डगमगाने लगी और फिर से यात्री चीखने चिल्लाने लगे। तब बाहर से फिर से फायरिंग शुरू हो गई।

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मेरठ के रहने वाले तरुण ने बताया कि वह बस के मध्य में ही सीट पर सोया हुआ था। अचानक से बस के शीशे टूटने की आवाज आई। उसकी नींद खुली और वह सीट से खड़े होकर बस के फर्श पर बैठ गया। एक दो मिनट के बाद ही बस डगमगाने लगी। कभी वह छत से टकराए तो कभी निचले हिस्से पर। सड़क से बस लहराते हुए खाई में पत्थरों से टकराती हुई एक जगह जाकर रुक गई, लेकिन बस के खाई में गिरने और फिर पत्थरों से टकराने के बाद रुकने तक भी बस पर गोलियां चलती रहीं। तरुण अपने दो मामा पवन और राकेश के साथ शिवखोड़ी आया हुआ था।

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रियासी हमले में घायलों के नाम
देवी प्रसाद गुप्ता, गोंडा यूपी
अतुल एवं नेहा, बनारस यूपी
नीलम, यूपी
दीपक कुमार, गोंडा यूपी
राजेश गुप्ता, गोंडा यूपी
विकास वर्मा, बलरामपुर यूपी
शारदा देवी, बलरामपुर यूपी
बिमला देवी, बलरामपुर यूपी
शिवानी, दिल्ली
गायत्री देवी, गोरखपुर यूपी
दिनेश, यूपी
बिटन गुप्ता, गोंडा यूपी
प्रिंस गुप्ता, गोंडा यूपी
तरुण कुमार, मेरठ यूपी
पवन कुमार, मेरठ यूपी
पलक गुप्ता, गोंडा यूपी
प्रदीप, मेरठ यूपी
 
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