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Terror Attack : बदहवास होकर मदद के लिए दौड़ती रही पत्नी, दहशत में हर कोई जान बचाने को भागा; हर तरफ चीख-पुकार

Wed, 23 Apr 2025 05:22 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Wed, 23 Apr 2025 05:22 AM IST
सार

पति का शव मैदान के बीचोंबीच पड़ा था। कभी वो उसके पास जाकर इस आस में उसे झंझोड़ रही थी कि मानो वह उठ बैठेगा.. और कभी वो वहां मौजूद कुछ पत्रकारों और लोगों तक मेरे पति को बचा लो...की मदद मांगती नजर आ रही थी। 

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Terror Attack: The wife kept running for help in a panic
पहलगाम हमले की कहानी चश्मदीदों की जुबानी - फोटो : ANI/PTI

विस्तार

हाथों में लाल चूड़ा पहने एक युवती की चीख और आंखों से बरसते आंसू हर किसी के दिल को दहलादेने वाले थे। पति का शव मैदान के बीचोंबीच पड़ा था। कभी वो उसके पास जाकर इस आस में उसे झंझोड़ रही थी कि मानो वह उठ बैठेगा.. और कभी वो वहां मौजूद कुछ पत्रकारों और लोगों तक मेरे पति को बचा लो...की मदद मांगती नजर आ रही थी। 

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पति के बहते खून को रोकने का प्रयास और मांगती रही मदद 
दूसरी तरफ एक महिला पर्यटक घायल पति को किसी तरह से उठाकर किनारे ले गई। किसी तरह से एक कुर्सी पर बैठाया। उसके बहते खून को रोकने के लिए अपना स्टोल उसके गले पर बांधा। तब तक वह खुद भी खून से सन चुकी थी। सहमी सी वह महिला भी बस चिल्लाती रही कि मेरी हेल्प करो...मेरे पति को बचा लो।

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उन्होंने कहा...मुस्लिम नहीं हैं....और चला दी गोलियां
मैदानों के बीचों-बीच अपने पति के शव के साथ बैठी जिस युवती की तस्वीर दिल दहला रही है, वो रो-रोकर सुनाने लगी कि किस तरह से आतंकी आए और मारकर चले गए। कहने लगी कि हम लोग खड़े थे, वे लोग आए, एक दूसरे से कहा कि मुस्लिम नहीं हैं...ये कहते ही गोली चला दी।



लगा किसी ने पटाखे छोड़े हैं...फिर लगा कि झगड़ा हुआ है
10 मिनट तक गोलियां चलीं  हमले के चश्मदीद वसीम खान ने कहा- पहले लगा पटाखे छोड़े हैं किसी ने। भीड़ भागने लगी हमें लगा झगड़ा हुआ होगा। करीब दस मिनट तक फायरिंग हुई। उसके बाद हमने जमीन पर गिरे लोग देखे, जिनमें पर्यटक व कुछ स्थानीय भी थे। दो की मौत हमने वहीं देखी घायलों को हम कांधों पर लाए, घोड़े वाले, शाॅल वाले सभी ने सहयोग दिया।

बच्चे बहुत डरे हैं... 
महाराष्ट्र के कोल्हापुर से आए पर्यटकों के एक समूह ने कहा कि उनके टूर का आज आखिरी दिन था। हमें मंगलवार को पहलगाम में ही रुकना था। जब हम बायसरन की ओर घोड़ों पर जा रहे थे, इस बीच हमारे घोड़े वालों को पता चला कि फायरिंग हुई है। वे हमें वापस लौटा लाए। हमारे परिवार के सदस्य और बच्चे डर गए। हमें पहलगाम रुकना था, पर हम श्रीनगर लौट आये। आज तक कभी नहीं सुना था, ऐसा हुआ हो आज पहली बार देखा भी और सुना भी।
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