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तवी उत्सव: लोगों ने डोगरी अचार और मटका फिरनी का चखा स्वाद, अमर महल में देखी प्रदर्शनी

Mon, 27 Feb 2023 04:32 PM IST
kumar गुलशन कुमार अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू
अमर उजाला नेटवर्क, जम्मू Published by: kumar गुलशन कुमार Updated Mon, 27 Feb 2023 04:32 PM IST
सार

अमर महल में प्रदर्शनी के बाद शाम को पहाड़ी गीतों की जुगलबंदी व डक्कू की थाप पर लोग खूब थिरके। कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मनोरंजन किया।

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Tawi festival at Amar Mahal Tourists all over india along with the local enjoyed
Tawi Festival - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

अमर महल में दूसरे दिन भी तवी उत्सव में खूब रौनक रही। स्थानीय लोगों के साथ देश भर से पहुंचे पर्यटकों ने उत्सव का आनंद लिया। अमर महल के परिसर में प्रदर्शनी लगाई गई। इसमें डुग्गर प्रदेश और हैदराबाद आदि राज्यों के उत्पाद प्रदर्शित किए गए। डोगरी उत्पादों में मिट्टी के दीपक, प्लेट पोस्टर, अचार, ग्रीन चिल्ली को प्रदर्शित किया गया। हैदराबादी उत्पादों में चिकन कोरमा और मटका फिरनी आदि लजीज पकवान शामिल थे।
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गिरी फाउंडेशन कटड़ा की ओर से भी अपने उत्पादों के स्टॉल लगाए गए। जम्मू की युवती कोमल कौल ने बताया कि उत्तराखंड के पुरुकुल गांव और हिमाचल के चंबा से वह स्वदेशी उत्पाद लाते हैं। भद्रवाह के सेब का जैम भी रखा है। उन्होंने कहा कि अन्य प्रदर्शनियों में भी वह इन उत्पादों को बेच चुकी हैं। 
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जम्मू की रेणु देवी ने कहा कि दीपक, मावा, गुड़ व अन्य उत्पादों को वह खुद तैयार करती हैं। यह मिलावट रहित होते हैं और इन्हें खरीदने के लिए लोगों ने भी अच्छा रुझान दिखाया है। वहीं, एसएमवीडीयू कटड़ा से पहुंचे छात्रों ने भी उत्सव की सराहना की। ये विद्यार्थी अध्यापिका डॉ. कामिनी पटानिया के साथ उत्सव में पहुंचे।
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उन्होंने कहा कि उत्सव का दिलकश नजारा हमेशा याद रहेगा। नेपाल के छात्र अष्टभुजा नाथ पांडे ने कहा कि वह जम्मू में दो साल से पढ़ाई कर रहे हैं। यहां की भाषा और संस्कृति अलग है। राजस्थान के छात्र रमित और मृदुल चौधरी ने कहा कि विश्वविद्यालय की ओर से उन्हें पटनीटॉप समेत अन्य स्थानों का भी भ्रमण करवाया गया है। हर जगह की अपनी अलग पहचान है। इस उत्सव में उन्हें ऐतिहासिक चीजों के साथ डोगरा संस्कृति की जानकारी मिली है। डॉ. कामिनी ने कहा, इस तरह के उत्सवों से डोगरा संस्कृति को बढ़ावा मिल रहा है।

डोगरी गीतों और डक्कू पर थिरके लोग

दिन भर अमर महल में प्रदर्शनी के बाद शाम को पहाड़ी गीतों की जुगलबंदी व डक्कू की थाप पर लोग खूब थिरके। कलाकारों ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियां देकर दर्शकों का मनोरंजन किया। जहां एक तरफ तारें तूरां पेइयां, कंडिया पिया बरसाला डोगरी गीत ने सबका मन लिया। डक्कू के वाद्य यंत्रों की मधुर धुन पर भी कलाकारों ने समां बांधा। डोगरी कलाकारों ने कहा कि इस प्रकार के उत्सव से अपनी संस्कृति को बढ़ावा देने का मौका मिला है। यह एक अद्भुत अहसास है।


राजस्थान के पर्यटक भी बने उत्सव का हिस्सा
राजस्थान से आए पर्यटकों ने कहा कि हर किसी राज्य या स्थान का अपना इतिहास और संस्कृति होती है। राजस्थान में भी कई सारे पर्यटन स्थल हैं, लेकिन जम्मू की सुंदरता और संस्कृति अलग है, जो मोहित करती है। पर्यटकों ने कहा कि यहां के लोगों के साथ मिलकर भी अच्छा लगा। समापन तक उत्सव का आनंद लेंगे।
 
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