सीबीआई कोर्ट में बोला यासीन, मुझे सजा न दें, झूठा फंसाया गया
-सीबीआई से कोर्ट ने मांगे मामले के सबूत, 30 मार्च को सुनवाई होगी
-वीडियो कांफ्रेंसिंग से हुई पेशी, यासीन समेत सात पर कोर्ट ने तय किए थे आरोप
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वायुसैनिकों की हत्या मामले में जेकेएलएफ प्रमुख यासीन मलिक समेत सात पर 30 साल बाद आरोप तय कर दिए गए हैं। टाडा कोर्ट ने आरोप तय करते हुए इस मामले की जांच करने वाली सीबीआई को कोर्ट में सबूत पेश करने के लिए कहा है। हालांकि यासीन मलिक ने कोर्ट को कहा कि उसके खिलाफ झूठा केस बनाया गया है। मलिक ने उसको सजा न देने की अपील की और कहा कि इस मामले का अभी ट्रायल चलना चाहिए। इन लोगों पर शनिवार आरोप तय हुए थे। सोमवार को मामले की दोबारा सुनवाई हुई। यासीन और एक अन्य को वीडियो कांफ्रेंसिंग के जरिए कोर्ट में पेश किया गया था।
शनिवार को यासीन मलिक, अली मोहम्मद मीर, मंजूर अहमद सोफी उर्फ मुस्तफा, जावेद मीर उर्फ नलका, नाना जी उर्फ सलीम, जावेद अहमद जरगर और शौकत अहमद बख्शी पर आरपीसी की धारा 302, 307,120-बी, टाडा एक्ट 1987 की धारा 3 (3), आर्म्स एक्ट की धारा 7/27 के तहत आरोप तय किए गए थे। इस मामले पर 30 वर्ष से बहस न हो पाने के कारण आरोप तय करने की प्रक्रिया लंबित चल रही थी। टाडा कोर्ट के स्पेशल जज सुभाष गुप्ता ने सीबीआई से 30 मार्च तक कोर्ट में सबूत पेश करने के लिए कहा है। हालांकि इससे पहले पेश सबूतों के आधार पर कोर्ट ने इन लोगों पर आरोप तय किए थे।
मुफ्ती की बेटी के अपहरण मामले की सुनवाई टली
वहीं पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद की बेटी रुबिया सईद के अपहरण मामले की सुनवाई को कोर्ट ने टाल दिया है। फिलहाल 20 मार्च तक इसकी सुनवाई टली है। यासीन मलिक और उक्त लोगों का इस मामले में भी नाम शामिल है। बता दें कि 1990 में मुफ्ती की बेटी का अपहरण हुआ था जिसे छुड़ाने के लिए आतंकियों को छोड़ा गया था।