स्वच्छता सर्वेक्षण: जम्मू से ज्यादा साफ श्रीनगर शहर, कटड़ा को स्वच्छ रैंकिंग में मिला पुरस्कार
जम्मू को देश में 248वां स्थान प्राप्त हुआ है। हालांकि वर्ष 2022 में इसे 199 वां स्थान हासिल हुआ था। जम्मू की रैंकिंग में 49 पायदान नीचे आई है। इसका कारण कोटभलवाल में कचरा प्रोसेसिंग का काम ना होना माना जा रहा है।
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देश के स्वच्छ सर्वेक्षण 2023 में केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर के श्रीनगर शहर को देश में 41वां और प्रदेश में पहला स्थान हासिल हुआ है। संभाग में कटड़ा शहर सबसे स्वच्छ रहा, जबकि जम्मू शहर 49 पायदान और नीचे आया है।
जम्मू को देश में 248वां स्थान प्राप्त हुआ है। हालांकि वर्ष 2022 में इसे 199 वां स्थान हासिल हुआ था। जम्मू की रैंकिंग में 49 पायदान नीचे आई है। इसका कारण कोटभलवाल में कचरा प्रोसेसिंग का काम ना होना माना जा रहा है। वहीं देश के सबसे साफ शहरों में इंदौर ने लगातार सातवीं बार बाजी मारी है। इस श्रेणी में सूरत दूसरे व नवी मुंबई तीसरे स्थान पर रहा है। केंद्र सरकार ने वीरवार को स्वच्छ सर्वेक्षण अवार्ड 2023 की घोषणा की है।
जम्मू नगर निगम को कचरा प्रोसेसिंग और डंपसाइट मामलों में शून्य अंक प्राप्त हुए हैं। जबकि वॉटर बॉडिस की सफाई में शत-प्रतिशत ,घर-घर कचड़ा कलेक्शन 98, सेग्रिगेश्न (संतृप्ति) में 85 , रिहाशी क्षेत्रों मेेें सफाई के मामले में 98, सार्वजनिक बाजारों की सफाई में 98, पब्लिक टायलेट की सफाई में 75 प्रतिशत अंक प्राप्त हुए हैं।
नगर निगम आयुक्त राहुल यादव ने बातचीत में पहले ही आशंका जताई थी कि कचरे का निस्तारण न होने की वजह से हमें झटका लग सकता है। हमारे दो प्लांट का काम अभी चल रहा है। कोटभलवाल का 2024 में पूरा हो जाएगा वहीं बंदूरख का काम 2026 तक खत्म हो जाएगा। इसके बाद हमारी स्थिति में सुधार होगा।
जन शिकायत निवारण तंत्र में मिले 1388.2 अंक
जन शिकायत निवारण तंत्र में जम्मू नगर निगम को 1388.2 अंक मिले हैं। इस बार इस बार गारबेज फ्री सिटी में जम्मू शामिल नहीं हुआ था।ओडीएफ ++ में भाग लिया है वहीं हमें सिर्फ आडीएफ ही मिल पाया है।
कोटभलावाल प्लांट अक्तूबर 2024 में शुरू हो रहा है। उसके बाद हमारी रैंकिंग में सुधार हो जाएगा। -राहुल यादव, आयुक्त जम्मू नगर निगम
- 2017 251
- 2018 212
- 2019 329
- 2020 224
- 2021 169
- 2022 199
- 2023 248
इन मापदंडों के आधार पर होती है रैंकिंग
- घर-घर से कचरा उठाना
- सड़कों की सफाई
- सार्वजनिक शौचालयों की सफाई
- शहर का सौंदर्यीकरण
- बाजारों में साफ-सफाई
- रिहायशी क्षेत्रों में साफ-सफाई
- नालियों की सफाई
- जलस्रोतों की स्वच्छता
- खुले कूड़ा निस्तारण स्थल
- जन शिकायत निवारण तंत्र
पिछली बार जम्मू को इन क्षेत्रों में मिले इतने अंक
घर-घर से कचरा उठाना: 90 प्रतिशत इस बार 98 प्रतिशत
सड़कों की साफ-सफाई करवाना: 90 प्रतिशत या उससे अधिक
सार्वजनिक शौचालयों की सफाई करवाना: 56 प्रतिशत इस बार 75 प्रतिशत
शहर का सौंदर्यीकरण : 75 से 90 प्रतिशत
बाजारों में साफ-सफाई : 90 प्रतिशत इस बार 98 प्रतिशत
रिहायशी क्षेत्रों में सफाई : 90 प्रतिशत , इस बार 98 प्रतिशत
नालियों की सफाई : 50 से 75 प्रतिशत
जलस्रोतों के लिए स्वच्छता: 90 प्रतिशत , इस बार 100 प्रतिशत
यहां पिछड़ा जम्मू
- प्रसंस्करण
- कूड़ेदानों का निवारण
- इस बार गारबेज फ्री सिटी में जम्मू शामिल नहीं हुआ।
डोर टू डोर कचरा उठाने और डस्टबिन लगवाने से कटड़ा सबसे आगे
स्वच्छता सर्वेक्षण-2023 में कटड़ा नगर पालिका जम्मू संभाग में सबसे स्वच्छ रही। दिल्ली के भारत मंडपम में निदेशक अर्बन लोकल बॉडी पुनीत शर्मा व सीईओ नपा कटड़ा रजत अबरोल सहित सेनेटरी इंस्पेक्टर नितिन पुरोहित ने राष्ट्रपित द्रौपदी मुर्मू के हाथों पुरस्कार प्राप्त किया। पुनीत शर्मा ने कहा कि कटड़ा में करीब एक लाख की आबादी होने के बावजूद हर दिन हजारों श्रद्धालु मां वैष्णो देवी के दर्शन को आते हैं। इसलिए इस स्थान को साफ करना हमेशा बड़ी चुनौती रहती है। नपा के पार्षदों और चेयरमैन विमल इंदु ने बाखूबी अपना काम किया।
सबसे ज्यादा फायदा नगर पालिका के कूड़ादान लगाने के अभियान से मिला। पालिका ने जगह-जगह कूड़ादान लगाने के लिए हर दुकानदार को दो- दो डस्टबिन दिए और हर किसी को इन्हीं में सूखा और गीला कचरा अलग-अलग करके डालने के लिए प्रेरित किया। डोर टू डोर कचरा एकत्रित करने के अभियान में हर घर से कचरा उठाना और उसे डंपिग साइट में जाकर हर दिन फैंकना चुनौती से कम नहीं रहा। पहली बार स्वच्छाता के लिए उन्हें पहली रैंकिंग मिली है जिसके लिए सारी टीम की मेहनत लगी है।
पुरस्कार के असली हकदार सफाई कर्मचारी
सीईओ व सेनेटरी इंस्पेक्टर का कहना है कि इसमें नगरपालिका के कर्मचारियों ने कड़ी मेहनत की और लोगों ने भरपूर सहयोग दिया। कटड़ा में देश के हर कोने से आने वाले श्रद्धालु रोड पर जो भी गंदगी डालते हैं उसे सफाई सेवक दिन-रात साफ करते हैं। इस पुरस्कार के असली हकदार सफाई कर्मी हैं।