नए जम्मू-कश्मीर में कायम है वही 'सियासी रसूख, कहीं एक भी शिक्षक नहीं तो कहीं 'प्लस में हैं सर जी'
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केंद्र शासित जम्मू-कश्मीर के ग्रामीण इलाकों के स्कूलों में बेशक बच्चों को पढ़ाने वाला कोई नहीं है लेकिन शहरी क्षेत्रों में सैकड़ों शिक्षक सरप्लस हैं। ग्रामीण क्षेत्र के स्कूलों में वर्तमान में 3000 से ज्यादा पद खाली हैं जबकि शहरों में तैनात शिक्षकों की संख्या ज्यादा है। जम्मू शहर में ही 334 शिक्षक सरप्लस हैं। इनमें से ज्यादातर कई साल से एक ही इलाके में जमे हुए हैं। शहरी क्षेत्र के कुछ स्कूलों में तो 10 से 15 तक शिक्षक सरप्लस हैं।
जम्मू-कश्मीर में भले ही निजाम बदल गया हो, सरकारी व्यवस्था पुराने ही ढर्रे पर चल रही है। प्रदेश के शहरी इलाकों में 350 से ज्यादा स्कूल हैं। विभागीय सूत्रों के अनुसार ग्रामीण इलाकों के प्राइमरी स्कूलों में औसतन दो-दो, मिडिल स्कूलों में 3 से 4 और हायर सेकेंडरी स्कूलों में 8 से 10 अध्यापक ही सेवाएं दे रहे हैं। कुछ स्कूलों में तो एक-एक शिक्षक ही है।
शिक्षकों की कमी के कारण ग्रामीण क्षेत्र के विद्यार्थियों की पढाई प्रभावित हो रही है। दूसरी ओर शहरों में सरप्लस होने के बावजूद सैकड़ों शिक्षक सालों से डटे हैं। विभाग इन्हें दूसरे स्कूलों में भेजने के कई बार आदेश जारी कर चुका है लेकिन ऊंची पहुंच के चलते ज्यादातर ने नई जगह ज्वाइन नहीं किया।
जो शिक्षक पांच-सात साल से शहरी इलाकों में जमे हैं, उन्हें गांवों में भेजा जाए
सरप्लस शिक्षकों को नई जगह जल्द भेजा जाएगा। कुछ खाली जगहों पर भेजा भी जा चुका है। ग्रामीण इलाकों में भी विद्यार्थियों को बेहतर शिक्षा के लिए विभाग लगातार प्रयासरत है।- अनुराधा गुप्ता, निदेशक, स्कूल एजूकेशन
हमारी एलजी से अपील है कि सरप्लस शिक्षकों को उनकी सही जगह पर भेजा जाए। अगर उन्हें हटाया भी जाता है तो वे अपनी पहुंच का इस्तेमाल कर फिर वहीं वापस आ जाते हैं।- विजय कुमार, अध्यक्ष, जेएंडके गवर्नमेंट टीचर्स फोरम
जो शिक्षक पांच-सात साल से शहरी इलाकों में जमे हैं, उन्हें गांवों में भेजा जाए। साथ ही ग्रामीण इलाकों में लंबे समय से कार्यरत शिक्षकों को शहर में नौकरी का अवसर मिलना चाहिए। - गणेश खजुरिया, चेयरमैन, जम्मू-कश्मीर टीचर्स फोरम