{"_id":"647cf266171204b5130a5254","slug":"sunday-drama-series-jammu-news-c-10-jam1006-132232-2023-06-05","type":"story","status":"publish","title_hn":"Jammu News: इंसान खुद नहीं, ओहदा-परिस्थितियां बदल देती हैं","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Jammu News: इंसान खुद नहीं, ओहदा-परिस्थितियां बदल देती हैं
विज्ञापन
संडे नाटक सीरीज में एंटन चेखव के रूसी नाटक ‘गिरगिट के मंचन किया गया
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। ऊंचा औहदा और परिस्थितियां किस तरह इंसान को गिरगिट की तरह रंग बदलने को मजबूर करती हैं, ये एंटन चेखव के रूसी नाटक गिरगिट में देखने को मिला। नटरंग द्वारा इस नाटक का मंचन संडे थियेटर सीरीज में किया गया। नाटक की कहानी के माध्यम से समाज में राजनीति और सामाजिक ढांचे के ताने-बाने को दर्शाने का प्रयास किया।
रानी पार्क में मंचित इस नाटक का निर्देशन नीरज कांत ने किया। नाटक को जम्मू के संदर्भ में पेश किया गया। इसकी नाटकीय संरचना ने दर्शकों को ऐसा महसूस कराया जैसे कि वे अपनी कहानी या अपने आसपास हो रही किसी घटना को देख रहे हों। नाटक एक कुत्ते और भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमता है, जो गिरगिट की तरह रंग बदलता है। नाटक की शुरूआत में दिखाया की एक कुत्ता जेबकतरे को काटता है। जेबकतरा अधिकारियों से कुत्ते का मालिक पकड़ने की मांग करता है। राहगीर बताता है कि ये कुत्ता स्थानीय मंत्री का है। पुलिस को जब इसका पता चलता है तो वह जेबकतरे को पीटना शुरू कर देता है। उनका दावा होता है कि मंत्री का कुत्ता तब तक नहीं काट सकता जब तक कि उसे मजबूर न किया जाए। इस बीच मंत्री का नौकर आता है। पहले वह कुत्ते को पहचानता नहीं है, लेकिन बाद में उसकी पहचान करता है। इसके बाद कुत्ते को पूरी सुरक्षा के साथ मंत्री के घर छोड़ा जाता है। इस तरह से कहानी कुत्ते और मुआवजे के चक्कर में घूमती हुई दिखाई गई। नाटक में मिहिर गुजराल, आदेश धर, नीरज कांत, विशाल शर्मा, कुलदीप अंगराल, कुशाल भट, अभिमन्यु चौधरी, शेरयार सलारिया और सुमित बंदराल ने अभिनय किया है।
विज्ञापन
जम्मू। ऊंचा औहदा और परिस्थितियां किस तरह इंसान को गिरगिट की तरह रंग बदलने को मजबूर करती हैं, ये एंटन चेखव के रूसी नाटक गिरगिट में देखने को मिला। नटरंग द्वारा इस नाटक का मंचन संडे थियेटर सीरीज में किया गया। नाटक की कहानी के माध्यम से समाज में राजनीति और सामाजिक ढांचे के ताने-बाने को दर्शाने का प्रयास किया।
रानी पार्क में मंचित इस नाटक का निर्देशन नीरज कांत ने किया। नाटक को जम्मू के संदर्भ में पेश किया गया। इसकी नाटकीय संरचना ने दर्शकों को ऐसा महसूस कराया जैसे कि वे अपनी कहानी या अपने आसपास हो रही किसी घटना को देख रहे हों। नाटक एक कुत्ते और भ्रष्ट पुलिस अधिकारी के इर्द-गिर्द घूमता है, जो गिरगिट की तरह रंग बदलता है। नाटक की शुरूआत में दिखाया की एक कुत्ता जेबकतरे को काटता है। जेबकतरा अधिकारियों से कुत्ते का मालिक पकड़ने की मांग करता है। राहगीर बताता है कि ये कुत्ता स्थानीय मंत्री का है। पुलिस को जब इसका पता चलता है तो वह जेबकतरे को पीटना शुरू कर देता है। उनका दावा होता है कि मंत्री का कुत्ता तब तक नहीं काट सकता जब तक कि उसे मजबूर न किया जाए। इस बीच मंत्री का नौकर आता है। पहले वह कुत्ते को पहचानता नहीं है, लेकिन बाद में उसकी पहचान करता है। इसके बाद कुत्ते को पूरी सुरक्षा के साथ मंत्री के घर छोड़ा जाता है। इस तरह से कहानी कुत्ते और मुआवजे के चक्कर में घूमती हुई दिखाई गई। नाटक में मिहिर गुजराल, आदेश धर, नीरज कांत, विशाल शर्मा, कुलदीप अंगराल, कुशाल भट, अभिमन्यु चौधरी, शेरयार सलारिया और सुमित बंदराल ने अभिनय किया है।
विज्ञापन