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आत्महत्या रोकथाम दिवस: तनाव और अवसाद से बढ़ रहे हैं मामले, जानिए लक्षण और बचाव के रास्ते

Fri, 10 Sep 2021 10:23 AM IST
प्रशांत कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Published by: प्रशांत कुमार Updated Fri, 10 Sep 2021 10:23 AM IST
सार

जीएमसी जम्मू में प्रतिदिन 1 से 2 आत्महत्या से जुड़े मामले रिपोर्ट हो रहे हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार डिप्रेशन से पीड़ित लोगों की काउंसलिंग और मानसिक चिकित्सा देकर उन्हें स्वस्थ बनाया जा सकता है। 

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Suicide Prevention Day Cases are increasing due to stress and depression
विश्व आत्महत्या रोकथाम दिवस - फोटो : Pixabay

विस्तार

इस भाग-दौड़ भरी जिंदगी में तनाव के साथ डिप्रेशन (अवसाद) हावी है। समाज का लगभग हर वर्ग इससे प्रभावित है। बेरोजगारी, मानसिक समस्याएं और अन्य दूसरे कारणों से युवा तेजी से इसकी चपेट में आ रहे हैं। डिप्रेशन से हारकर कई लोग आत्महत्या का रास्ता चुन रहे हैं। इसमें 15 से 30 आयु वर्ग के युवा अधिक प्रभावित हैं। जीएमसी जम्मू में प्रतिदिन 1 से 2 आत्महत्या से जुड़े मामले रिपोर्ट हो रहे हैं। मनोचिकित्सकों के अनुसार डिप्रेशन से पीड़ित लोगों की काउंसलिंग और मानसिक चिकित्सा देकर उन्हें स्वस्थ बनाया जा सकता है। 

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वरिष्ठ मनोचिकित्सक डॉ. जगदीश थापा का कहना है कि जम्मू कश्मीर में रिपोर्ट हो रहे आत्महत्या के मामलों के लिए अधिकांश डिप्रेशन जिम्मेदार है। डिप्रेशन के साथ मेनिया, स्कीजोफ्रेनिया, ओसीडी जैसी मानसिक समस्याओं से पीड़ित होने के कारण पीड़ित की हालत अधिक खराब हो जाती है। इसमें आखिर में पीड़ित को लगता है कि उसके जीने का कोई मकसद नहीं है और वह आत्महत्या का रास्ता चुन लेता है। जम्मू कश्मीर में विभिन्न तरह से नशे के आदी हो चुके लोग भी आत्महत्या के लिए प्रेरित हो रहे हैं। एक समय आकर पीड़ित आर्थिक रूप से कमजोर पड़ जाता है, जिसमें शारीरिक और मानसिक समस्याओं के साथ उसमें अपनों से हीन भावना बढ़ती है और आखिर में वह आत्महत्या की दिशा में चला जाता है। पहले से आत्महत्या के मामलों के कारण अगली पीढ़ी में जेनेटिक रूप से भी आत्महत्या के लिए सोच बढ़ती है। बच्चों और किशोरों में प्यार में असफल होना, रिश्ते का टूटना, परीक्षा में असफल होना, वीडियो और मोबाइल गेम्स से प्रेरित होकर आत्महत्या के लिए सोचना। इस वर्ग में दिमागी क्षमता इतनी विकसित नहीं होती है कि सामने क्या गलत है क्या सही, जिससे वे डिप्रेशन में चले जाते हैं। 
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लक्षण 
खाना पीना बंद करना, नींद उड़ जाना, ना उम्मीद होना, अपने भविष्य के बारे में नकारात्मक सोच, किसी से कोई मदद की उम्मीद न करना, सभी चीजों में नकारात्मक देखना, शारीरिक रूप से कमजोर पड़ना, दोस्तों से संवाद खत्म, उदासी बढ़ना, अपनों के साथ आत्महत्या की बातें करना आदि शामिल है। 
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बचाव 
अगर डिप्रेशन का पीड़ित अपनों के साथ आत्महत्या या मरने की बातें कर रहा है तो उसे गंभीरता से लें। यह घरवालों के लिए चेतावनी के संकेत होते हैं। डिप्रेशन के लक्षण मिलने पर तुरंत डाक्टर या मनोचिकित्सक की सलाह लें। पीड़ित की काउंसिलिंग करें। उसके साथ पारिवारिक समर्थन बढ़ाएं।

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