जम्मू-कश्मीर: प्रदेश के 13 जनप्रतिनिधियों पर चल रहे मुकदमों में स्टेटस रिपोर्ट तलब, 15 नवंबर को होगी सुनवाई
सुप्रीम कोर्ट ने पूर्व विधायकों (सांसदों या विधायकों) के खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई की प्रगति की निगरानी करने का निर्देश दिया गया था। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संबंधित अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया।
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जम्मू-कश्मीर व लद्दाख उच्च न्य्यालय ने जम्मू-कश्मीर के 13 जनप्रतिनिधियों के खिलाफ विभिन्न अदालतों में चल रहे मुकदमों की स्टेटस रिपोर्ट तलब की है। इन जन प्रतिनिधियों में पूर्व विधायाक, वर्तमान और पूर्व सांसद शामिल हैं। लद्दाख के गृह विभाग के आयुक्त सचिव को दो सप्ताह में रिपोर्ट दाखिल करने के लिए कहा गया है।
इस मामले में अगली सुनवाई 15 नवंबर को होगी। मुख्य न्यायाधीश अली मोहम्मद माग्रे व न्यायमूर्ति संजय धर की खंडपीठ ने मामले का स्वत: संज्ञान लेते हुए रजिस्ट्रार जनरल को संबंधित अदालतों से रिपोर्ट मंगाने का निर्देश दिया है।
सुप्रीम कोर्ट ने पिछले साल 20 सितंबर 2021 को मौजूदा और पूर्व विधायकों (सांसदों या विधायकों) के खिलाफ लंबित मामलों की सुनवाई की प्रगति की निगरानी करने का निर्देश दिया गया था। हाई कोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश के अनुपालन के लिए जम्मू-कश्मीर और लद्दाख के संबंधित अधिकारियों को प्रतिवादी बनाया।
इसके बाद इसने उन्हें विभिन्न अधीनस्थ अदालतों में लंबित मामलों की संख्या के साथ-साथ सांसदों या विधायकों के खिलाफ उच्च न्यायालय में लंबित मामलों की जानकारी देने का निर्देश दिया। जम्मू-कश्मीर सरकार ने स्टेटस रिपोर्ट में खुलासा किया कि 13 मामले विभिन्न अदालतों में विचाराधीन हैं। हालांकि लद्दाख ने आयुक्त सचिव गृह विभाग के माध्यम से अब तक स्थिति रिपोर्ट दाखिल नहीं की है।
न्यायिक रजिस्ट्रार के माध्यम से जुटाई जाएगी जानकारी
खंडपीठ ने कहा, मामलों की सुनवाई में प्रगति सुनिश्चित करने के लिए, संबंधित अदालतों से इस न्यायालय के न्यायिक रजिस्ट्रार के माध्यम से मुकदमे की स्थिति जानकारी करना जरूरी हो गया है। इसके बाद सरकार के गृह विभाग के आयुक्त सचिव, केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख को भी मौजूदा / पूर्व विधायकों (सांसदों या विधायकों) के खिलाफ लंबित मामलों का विवरण प्रस्तुत करने के लिए दो सप्ताह का समय दिया गया है।