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जम्मू-कश्मीर: 35ए पर सुनवाई टालने के लिए राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट को भेजा खत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
Updated Sat, 04 Aug 2018 01:20 AM IST
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जम्मू-कश्मीर में 35ए मुद्दे पर मचे घमासान के बीच राजभवन ने शुक्रवार को चौंकाने वाला कदम उठाया है। सूबे की सरकार ने 6 अगस्त को 35-ए पर होने वाली सुनवाई को टालने के लिए सुप्रीम कोर्ट को एक पत्र भेजा है। सुनवाई टालने के पीछे पंचायत, स्थानीय निकाय तथा नगर निकाय चुनाव की तैयारियों को हवाला दिया गया है। हालांकि अभी इन चुनाव की तारीखें तक घोषित नहीं की गई हैं।
यह पत्र राज्य सरकार के सुप्रीम कोर्ट में स्टैंडिंग कौंसिल एम शोएब आलम के जरिए सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि मुख्य न्यायाधीश के कोर्ट में वी द सिटीजंस बनाम यूनियन आफ इंडिया, वेस्ट पाकिस्तान रिफ्यूजी एक्शन कमेटी सेल 1947 बनाम यूनियन आफ इंडिया, डॉ. चारू वली खन्ना बनाम यूनियन आफ इंडिया, कालिदास बनाम यूनियन आफ इंडिया और राधिका गिल बनाम यूनियन आफ इंडिया मामले की छह अगस्त की सुनवाई को स्थगित कर दिया जाए। इसे सभी जजों तक सर्कुलेट कर दिया जाए ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस पत्र से कानूनविद भी चकित हैं। राज्य में अभी चुनाव की तिथि की घोषणा नहीं की गई है। पंचायत चुनाव की संभावना अक्टूबर से दिसंबर के बीच बताई जा रही है। इससे पहले स्थानीय निकाय के चुनाव होंगे। ऐसे में कहा जा रहा है कि इस आधार पर सुनवाई टालने के लिए पहल नहीं की जानी चाहिए।
वोहरा-केंद्र के बीच सुनवाई टालने के मुद्दे पर थे मतभेद
दरअसल 35-ए के मुद्दे पर सुनवाई टालने के लिए राज्यपाल एनएन वोहरा और केंद्र सरकार के बीच गंभीर मतभेद की खबरें सामने आ रही थीं। चर्चा थी कि वोहरा ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से इस मुद्दे पर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई थी। राज्य के हालात को देखते हुए राज्यपाल सुप्रीम कोर्ट में केस की सुनवाई टालने के लिए ज्ञापन (मेमो) दाखिल करना चाहते थे। ज्ञात हो कि 35-ए पर छेड़छाड़ पर आंदोलन की अलगाववादियों के बंद के आह्वान को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है। पीडीपी, नेकां सहित कई राजनीतिक पार्टियां भी 35-ए से छेड़छाड़ के पक्ष में नहीं हैं। अलगाववादियों का मानना है कि यदि 35-ए से छेड़छाड़ हुई तो रियासत के डेमोग्राफी में बदलाव होगा।
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यह पत्र राज्य सरकार के सुप्रीम कोर्ट में स्टैंडिंग कौंसिल एम शोएब आलम के जरिए सुप्रीम कोर्ट के रजिस्ट्रार को भेजा गया है। पत्र में कहा गया है कि मुख्य न्यायाधीश के कोर्ट में वी द सिटीजंस बनाम यूनियन आफ इंडिया, वेस्ट पाकिस्तान रिफ्यूजी एक्शन कमेटी सेल 1947 बनाम यूनियन आफ इंडिया, डॉ. चारू वली खन्ना बनाम यूनियन आफ इंडिया, कालिदास बनाम यूनियन आफ इंडिया और राधिका गिल बनाम यूनियन आफ इंडिया मामले की छह अगस्त की सुनवाई को स्थगित कर दिया जाए। इसे सभी जजों तक सर्कुलेट कर दिया जाए ताकि किसी प्रकार की असुविधा न हो। इस पत्र से कानूनविद भी चकित हैं। राज्य में अभी चुनाव की तिथि की घोषणा नहीं की गई है। पंचायत चुनाव की संभावना अक्टूबर से दिसंबर के बीच बताई जा रही है। इससे पहले स्थानीय निकाय के चुनाव होंगे। ऐसे में कहा जा रहा है कि इस आधार पर सुनवाई टालने के लिए पहल नहीं की जानी चाहिए।
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वोहरा-केंद्र के बीच सुनवाई टालने के मुद्दे पर थे मतभेद
दरअसल 35-ए के मुद्दे पर सुनवाई टालने के लिए राज्यपाल एनएन वोहरा और केंद्र सरकार के बीच गंभीर मतभेद की खबरें सामने आ रही थीं। चर्चा थी कि वोहरा ने केंद्रीय गृह मंत्री राजनाथ सिंह से इस मुद्दे पर अपनी आपत्ति भी दर्ज कराई थी। राज्य के हालात को देखते हुए राज्यपाल सुप्रीम कोर्ट में केस की सुनवाई टालने के लिए ज्ञापन (मेमो) दाखिल करना चाहते थे। ज्ञात हो कि 35-ए पर छेड़छाड़ पर आंदोलन की अलगाववादियों के बंद के आह्वान को देखते हुए सुरक्षा एजेंसियों को अलर्ट कर दिया गया है। पीडीपी, नेकां सहित कई राजनीतिक पार्टियां भी 35-ए से छेड़छाड़ के पक्ष में नहीं हैं। अलगाववादियों का मानना है कि यदि 35-ए से छेड़छाड़ हुई तो रियासत के डेमोग्राफी में बदलाव होगा।
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जानिए क्या है 35ए...
यह है 35-ए में
-जम्मू एवं कश्मीर के बाहर का व्यक्ति राज्य में अचल संपत्ति नहीं खरीद सकता।
-दूसरे राज्य का कोई भी व्यक्ति यहां का नागरिक नहीं बन सकता।
-राज्य की लड़की किसी बाहरी लड़के से शादी करती है तो उसके सारे अधिकार समाप्त हो जाएंगे।
-35-ए के कारण ही पश्चिम पाकिस्तान से आए शरणार्थी अब भी राज्य के मौलिक अधिकार तथा अपनी पहचान से वंचित हैं।
-जम्मू एवं कश्मीर में रह रहे लोग जिनके पास स्थायी निवास प्रमाणपत्र नहीं है, वे लोकसभा चुनाव में तो वोट दे सकते हैं लेकिन स्थानीय निकाय चुनाव में वोट नहीं दे सकते हैं।
-यहां का नागरिक केवल वह ही माना जाएगा जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या उससे पहले के 10 वर्षों से राज्य में रह रहा हो या इससे पहले या इस दौरान यहां पहले ही संपत्ति हासिल कर रखी हो।
-जम्मू एवं कश्मीर के बाहर का व्यक्ति राज्य में अचल संपत्ति नहीं खरीद सकता।
-दूसरे राज्य का कोई भी व्यक्ति यहां का नागरिक नहीं बन सकता।
-राज्य की लड़की किसी बाहरी लड़के से शादी करती है तो उसके सारे अधिकार समाप्त हो जाएंगे।
-35-ए के कारण ही पश्चिम पाकिस्तान से आए शरणार्थी अब भी राज्य के मौलिक अधिकार तथा अपनी पहचान से वंचित हैं।
-जम्मू एवं कश्मीर में रह रहे लोग जिनके पास स्थायी निवास प्रमाणपत्र नहीं है, वे लोकसभा चुनाव में तो वोट दे सकते हैं लेकिन स्थानीय निकाय चुनाव में वोट नहीं दे सकते हैं।
-यहां का नागरिक केवल वह ही माना जाएगा जो 14 मई 1954 को राज्य का नागरिक रहा हो या उससे पहले के 10 वर्षों से राज्य में रह रहा हो या इससे पहले या इस दौरान यहां पहले ही संपत्ति हासिल कर रखी हो।