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Jammu News: दिव्यांगता को किनारे कर शुरू किया स्वरोजगार, बाजार में बेच रहे हस्तशिल्प उत्पाद, दूसरों को भी दे रहे रोजगार
Sat, 15 Feb 2025 03:03 AM IST
जम्मू और कश्मीर ब्यूरो
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
संवाद न्यूज एजेंसी, जम्मू
Updated Sat, 15 Feb 2025 03:03 AM IST
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जगदीश
नोट-इसे प्रदेश को दे दें....
- दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग,सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सहयोग से गुलशन ग्राउंड में शुरू हुआ दिव्य कला मेला
- गुजरात, मध्य प्रदेश सहित जम्मू कश्मीर के कई जिलों से पहुंचे दिव्यांगजन दुकानदार
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। गुलशन ग्राउंड में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों से 11 दिवसीय दिव्य कला मेला शुक्रवार से शुरू हो गया। इसमें जो भी स्टाॅल लगाए गए हैं, उसमें हस्तशिल्प, सजावटी वस्तुओं, हस्तनिर्मित लकड़ी के खिलौनों को अपने हुनरमंद हाथों से आकार देने वाले दिव्यांगजन शामिल हैं। 100 स्टॉल यहां लगने हैं, जिसमें कुछ शुक्रवार को लग गए, बाकी शनिवार तक लग जाएंगे।
दिव्य कला मेले में जम्मू कश्मीर के साथ ही मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान सहित दिल्ली के भी दिव्यांगजन अपने स्टाॅलों में सामान बेचने के लिए पहुंचे हैं। इसमें सारे उत्पाद हाथों से बनाए गए हैं। इनकी कीमतें भी बाजार की तुलना में काफी किफायती हैं। इससे लोग यहां पर आकर खरीददारी के लिए आकर्षित हो सकेंगे। मेले में स्टाल लगाने वाले कुछ दिव्यांगजनों से बात की तो उनका आत्मविश्वास साफ नजर आया।
70 लोगों को दिया रोजगार
घर पर ही कपड़ों के थान लाकर इसमें प्रिटिंग कर स्वरोजगार कर रहे हैं। इससे बेडशीट, चादर व तकिए को बनाकर शहर के बाजार में भेजते हैं। इस काम में 70 लोगों को रोजगार भी दिया है। घर पर ही काम शुरू करने के पीछे लक्ष्य यही था कि दूसरों के साथ खुद का परिवार भी रोजगार से जुड़े। बड़े भाई का पूरा सहयोग मिल रहा है। बेडशीट 600 रुपये से एक हजार रुपये में बेचते हैं।
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-- चंद्रशेखर,जयपुर
बचपन में ही पैर ने साथ छोड़ा, हार नहीं मानी
-- बचपन से ही पैर खराब हो गए थे। इसके बाद हार नहीं मानी और बीते तीन वर्षों से प्रशिक्षण लेकर एलईडी बल्ब बनाने का काम शुरू किया। इसमें तीन से चार लागों को और रोजगार दिया है। दिल्ली से कच्चा माल लाकर घर में ही बनाकर बाजार में बेचते हैं। जो सरकारी स्तर पर मेले या प्रदर्शनी मिलती है वहां पर भी स्टाल लगाते हैं। जम्मू पहली बार आए हैं। 10 वाट से लेकर पांच वाट तक की एलईडी बल्ब हैं। हर माह करीब 50 हजार रुपये की आय हो जाती है।
-जगदीश, अहमदाबाद
अपनी कमियों को बनाया ताकत
-- ठंड में फिरन की मांग श्रीनगर में ज्यादा है। यहां मैदानी क्षेत्रों में भी लोग कश्मीरी शाल, सूट आदि की मांग करते हैं। स्टोव के फटने से शरीर जल गया था जिसके बाद स्वरोजगार के लिए बेटे व बहू के साथ फिरन सूट, कढ़ाई वाले पर्स, रेशमी शाल बनाने का काम शुरू किया। करीब 12 वर्ष से यह काम कर रहे हैं। इसमें हर माह चार से पांच हजार रुपये से अधिक की आय हो जाती है। मोहल्ले की चार से पांच महिलाओं को भी काम दे रखा है। यहां पर पहली बार आए हैं। हर सीजन में काम नहीं मिलता है इस पर सरकार को ध्यान देना चाहिए।
-- नसीमा, महजूनगर, श्रीनगर।
दुर्घटना में पैर खोया, साहस नहीं
-कुछ वर्ष पहले दोनों पैर एक सड़क दुर्घटना में खराब हो गए थे। उसके बाद घर पर ही शाल, सूट बनाने का काम शुरू किया। इसमें भाई मुवस्सिर अहमद मीर ने सहायता की। आज कम से कम चार महिलाएं और साथ लेकर काम आगे बढ़ा रहे हैं। हर महीने कम से कम पांच से 10 हजार रुपये की आय हो जाती है। हालांकि यह रकम कम है। शाल व सूट 700 से 1000 रुपये में बिक जाते हैं। सरकार को चाहिए कि लगातार इस तरह के मेले आयोजित करे।
-- रूबी जान, बडगाम कश्मीर।
दूसरों की मदद कर बढ़ता है हौसला
-- सांबा में दिव्यांग बच्चों के लिए उड़ान स्पेशल स्कूल का संचालन कर रहे हैं। यह बच्चे अपने हाथों सें सजावटी सामान बनाते हैं। इसमें खिलौने, लकड़ी की नेम प्लेट, कागज के सजावटी फूल, आइसक्रीम स्टिक आदि शामिल हैं। इससे इनके अंदर हुनरमंद बनने के प्रति लालसा बढ़ती है। आत्मविश्वास भी बढ़ता है कि वह भी कुछ कर सकते हैं। स्कूल में 40 दिव्यांग बच्चे हैं। मुस्कान फाउंडेशन की मदद से इनको हुनरमंद बना रहे हैं। करीब 24 वर्षां से यह क्रम निरंतर चल रहा है। हमारे साथ सहयोगी के तौर पर माधवी भी है जो बच्चों को पढ़ाती और सिखाती भी हैं।
-- प्रवीन संगराल, सांबा, जम्मू।
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- दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग,सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के सहयोग से गुलशन ग्राउंड में शुरू हुआ दिव्य कला मेला
- गुजरात, मध्य प्रदेश सहित जम्मू कश्मीर के कई जिलों से पहुंचे दिव्यांगजन दुकानदार
अमर उजाला ब्यूरो
जम्मू। गुलशन ग्राउंड में दिव्यांगजन सशक्तीकरण विभाग और सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय के संयुक्त प्रयासों से 11 दिवसीय दिव्य कला मेला शुक्रवार से शुरू हो गया। इसमें जो भी स्टाॅल लगाए गए हैं, उसमें हस्तशिल्प, सजावटी वस्तुओं, हस्तनिर्मित लकड़ी के खिलौनों को अपने हुनरमंद हाथों से आकार देने वाले दिव्यांगजन शामिल हैं। 100 स्टॉल यहां लगने हैं, जिसमें कुछ शुक्रवार को लग गए, बाकी शनिवार तक लग जाएंगे।
दिव्य कला मेले में जम्मू कश्मीर के साथ ही मध्य प्रदेश, गुजरात, राजस्थान सहित दिल्ली के भी दिव्यांगजन अपने स्टाॅलों में सामान बेचने के लिए पहुंचे हैं। इसमें सारे उत्पाद हाथों से बनाए गए हैं। इनकी कीमतें भी बाजार की तुलना में काफी किफायती हैं। इससे लोग यहां पर आकर खरीददारी के लिए आकर्षित हो सकेंगे। मेले में स्टाल लगाने वाले कुछ दिव्यांगजनों से बात की तो उनका आत्मविश्वास साफ नजर आया।
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70 लोगों को दिया रोजगार
घर पर ही कपड़ों के थान लाकर इसमें प्रिटिंग कर स्वरोजगार कर रहे हैं। इससे बेडशीट, चादर व तकिए को बनाकर शहर के बाजार में भेजते हैं। इस काम में 70 लोगों को रोजगार भी दिया है। घर पर ही काम शुरू करने के पीछे लक्ष्य यही था कि दूसरों के साथ खुद का परिवार भी रोजगार से जुड़े। बड़े भाई का पूरा सहयोग मिल रहा है। बेडशीट 600 रुपये से एक हजार रुपये में बेचते हैं।
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बचपन में ही पैर ने साथ छोड़ा, हार नहीं मानी
-जगदीश, अहमदाबाद
अपनी कमियों को बनाया ताकत
दुर्घटना में पैर खोया, साहस नहीं
-कुछ वर्ष पहले दोनों पैर एक सड़क दुर्घटना में खराब हो गए थे। उसके बाद घर पर ही शाल, सूट बनाने का काम शुरू किया। इसमें भाई मुवस्सिर अहमद मीर ने सहायता की। आज कम से कम चार महिलाएं और साथ लेकर काम आगे बढ़ा रहे हैं। हर महीने कम से कम पांच से 10 हजार रुपये की आय हो जाती है। हालांकि यह रकम कम है। शाल व सूट 700 से 1000 रुपये में बिक जाते हैं। सरकार को चाहिए कि लगातार इस तरह के मेले आयोजित करे।
दूसरों की मदद कर बढ़ता है हौसला

जगदीश

जगदीश