जम्मू-कश्मीर में एसआरओ 202 समाप्त, नई भर्तियों में भी नहीं होगा लागू, बढ़ेगा वित्तीय बोझ
केंद्र शासित प्रदेश जम्मू-कश्मीर में एसआरओ 202 को समाप्त कर दिया गया है। प्रदेश में होने वाली नई भर्तियों में भी यह लागू नहीं होगा। इसके साथ ही इस एसआरओ के तहत नियुक्त पुराने कर्मचारियों की प्रोबेशन अवधि भी पांच साल से घटाकर देश भर के समान दो साल कर दी गई है। यह फैसला उप राज्यपाल मुर्मू की अध्यक्षता में हुई प्रशासनिक परिषद की बैठक में किया गया। एसआओ हटाने से सरकार पर लगभग 54 करोड़ रुपये का वित्तीय बोझ बढ़ेगा।
प्रशासनिक परिषद ने इस मसले पर गठित उच्चस्तरीय समिति की सिफारिशों को मंजूर करने के साथ ही तय किया कि एसआरओ 202 के तहत अब कोई भी नई नियुक्ति नहीं होगी। इसके तहत अब तक नियुक्त कर्मचारियों की प्रोबेशन अवधि भी घटाकर दो साल कर दी गई है। सूत्रों ने बताया कि मुख्य सचिव बीवीआर सुब्रह्मण्यम की अध्यक्षता में गठित उच्चस्तरीय समिति ने एसआरओ 202 को समाप्त करने की सिफारिश की थी।
पूर्व मुख्यमंत्री मुफ्ती मोहम्मद सईद के नेतृत्व वाली पीडीपी-भाजपा सरकार में 30 जून, 2015 को एसआरओ 202 लागू किया गया था। इसके तहत नॉन गजटेड पदों पर भर्ती होने वाले लोगों को पांच साल तक प्रोबेशन पर रहना पड़ता था। इस अवधि में उन्हें केवल मूल वेतन ही मिलता था। किसी प्रकार के भत्ते नहीं मिलते थे। प्रोबेशन अवधि पूरा करने के बाद ही उन्हें सभी प्रकार के वेतन-भत्तों का लाभ मिल पाता था। सूत्रों ने बताया कि तब से लेकर अब तक विभिन्न एजेंसियों की ओर से 13 हजार लोगों की इसी नियम के तहत भर्ती की गई है।
डॉ. जितेंद्र सिंह ने उप राज्यपाल को त्वरित कार्रवाई के लिए दी बधाई
पीएमओ में राज्यमंत्री और जम्मू-कश्मीर के कठुआ-उधमपुर से सांसद डॉ. जितेंद्र सिंह ने कैट बेंच के शुभारंभ पर आठ जून को कहा था कि उप राज्यपाल प्रशासन एसआरओ 202 की जल्द समीक्षा करेगा। इसके बाद 10 जून को प्रशासन ने सभी सरकारी विभागों से इस एसआरओ के तहत नियुक्त कर्मचारियों का ब्योरा मांगा था।
डॉ. सिंह ने ट्वीट कर कहा कि उप राज्यपाल ने उन्हें फोन कर जानकारी दी है कि एसआरओ 202 का नई भर्ती के नियमों में जिक्र नहीं होगा। अब तक इसके तहत नियुक्त कर्मचारियों का प्रोबेशन घटाकर दो साल कर दिया गया है। उप राज्यपाल को त्वरित कार्रवाई के लिए बधाई।
विधि आयोग ने 2019 में की थी प्रोबेशन घटाने की सिफारिश
जस्टिस (रिटायर्ड) एमके हंजूरा के नेतृत्व वाले विधि आयोग ने भी एसआरओ 202 में प्रोबेशन अवधि घटाने की सिफारिश की थी। दिसंबर, 2019 को मुख्य सचिव को सौंपी रिपोर्ट में एसआरओ 202 से प्रोबेशन अवधि इस आधार पर घटाने की सिफारिश की थी कि डीओपीटी के गजट में दो साल के प्रोबेशन का उल्लेख है। राज्य पुनर्गठन अधिनियम के लागू हो जाने के बाद जिन कर्मचारियों ने दो वर्ष की प्रोबेशन अवधि पूरी कर ली है, उसे नियमित कर देना चाहिए।
नेशनल कॉन्फ्रेंस समेत कर्मचारी विरोध में उठाते रहे हैं आवाज
एसआरओ 202 के खिलाफ नेशनल कॉन्फ्रेंस (नेकां) समेत विभिन्न राजनीतिक पार्टियां तथा इसके तहत भर्ती होने वाले युवाओं की ओर से लंबे समय से आवाज उठाई जाती रही है। उनका कहना था कि यह समान कार्य के लिए समान वेतन के सिद्धांत के खिलाफ है। इससे उन्हें काफी आर्थिक नुकसान पड़ रहा है। साथ ही उन पर हमेशा मानसिक दबाव भी बना रहता है।