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Jammu News: कश्मीर में बर्फ रहित सर्दी से जलाशयों का पुनर्भरण प्रभावित
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शून्य स्तर से नीचे बह रही झेलम सहित अन्य नदियां, संगम में -0.96 फीट पर पहुंचा जलस्तर
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर में बर्फ रहित सर्दी और लंबे समय तक सूखा रहने के कारण जलाशयों के पुनर्भरण में बाधा आई है। इससे अधिकांश नदियां, विशेषकर झेलम नदी, शून्य स्तर से नीचे बह रही हैं। झेलम के जलस्तर में कमी लगातार जारी है।
संगम में इसका जल स्तर -0.96 फीट तक गिर चुका है, जो गेज के शून्य स्तर (आरएल) से नीचे है। वहीं, राम मुंशी बाग में जलस्तर 3.51 फीट और अशम में 0.71 फीट तक गिरा हुआ है। कश्मीर बाढ़ निगरानी विभाग के अनुसार लिद्दर, रमबियारा, फिरोजपोरा (द्रंग) और पोहरू (सीलू) जैसे नाले भी शून्य आरएल से नीचे बह रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि बर्फ रहित सर्दियों के कारण जल स्तर में गिरावट आई है। उन्होंने बताया, बारिश में लगातार कमी के कारण घाटी भर के जलाशयों के पुनर्भरण में गंभीर असर पड़ा है।
इस वर्ष अब तक जम्मू और कश्मीर में 29 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जिसमें सबसे बड़ी कमी जनवरी 2024 में 91 प्रतिशत देखी गई। 12 फरवरी तक प्रदेश के सभी जिलों में भारी बारिश की कमी महसूस की गई और सामान्य 140 मिमी की वर्षा के मुकाबले 79 प्रतिशत कम बारिश हुई। 1 जनवरी से 12 फरवरी 2025 तक सिर्फ 29.8 मिलीमीटर बारिश हुई।
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विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कश्मीर क्षेत्र में पेयजल की पर्याप्तता की स्थिति फिलहाल प्रबंधनीय है और किसी भी पानी की कमी के मामले में सरकार ने बैकअप योजनाएं सुनिश्चित की हैं।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। कश्मीर में बर्फ रहित सर्दी और लंबे समय तक सूखा रहने के कारण जलाशयों के पुनर्भरण में बाधा आई है। इससे अधिकांश नदियां, विशेषकर झेलम नदी, शून्य स्तर से नीचे बह रही हैं। झेलम के जलस्तर में कमी लगातार जारी है।
संगम में इसका जल स्तर -0.96 फीट तक गिर चुका है, जो गेज के शून्य स्तर (आरएल) से नीचे है। वहीं, राम मुंशी बाग में जलस्तर 3.51 फीट और अशम में 0.71 फीट तक गिरा हुआ है। कश्मीर बाढ़ निगरानी विभाग के अनुसार लिद्दर, रमबियारा, फिरोजपोरा (द्रंग) और पोहरू (सीलू) जैसे नाले भी शून्य आरएल से नीचे बह रहे हैं। अधिकारियों का कहना है कि बर्फ रहित सर्दियों के कारण जल स्तर में गिरावट आई है। उन्होंने बताया, बारिश में लगातार कमी के कारण घाटी भर के जलाशयों के पुनर्भरण में गंभीर असर पड़ा है।
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इस वर्ष अब तक जम्मू और कश्मीर में 29 प्रतिशत वर्षा की कमी दर्ज की गई है, जिसमें सबसे बड़ी कमी जनवरी 2024 में 91 प्रतिशत देखी गई। 12 फरवरी तक प्रदेश के सभी जिलों में भारी बारिश की कमी महसूस की गई और सामान्य 140 मिमी की वर्षा के मुकाबले 79 प्रतिशत कम बारिश हुई। 1 जनवरी से 12 फरवरी 2025 तक सिर्फ 29.8 मिलीमीटर बारिश हुई।
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विभाग के एक अधिकारी ने बताया कि कश्मीर क्षेत्र में पेयजल की पर्याप्तता की स्थिति फिलहाल प्रबंधनीय है और किसी भी पानी की कमी के मामले में सरकार ने बैकअप योजनाएं सुनिश्चित की हैं।