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खुद को ठगा महसूस कर रहे पीएम पैकेज कर्मचारी : हंडू
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पीएम पैकेज कर्मचारियों ने क्वासी-परमानेंट स्टेटस पर आदेश पर जताया रोष
अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर फंड्स संगठन की ओर से जारी क्वासी-परमानेंट स्टेटस से संबंधित हालिया आदेश ने पीएम पैकेज कर्मचारियों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। आदेश के अनुसार सुपरन्यूमेरेरी पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को अर्ध-स्थायी दर्जा नहीं दिया जा सकेगा जिससे हजारों प्रवासी कर्मचारियों का भविष्य एक बार फिर असमंजस में पड़ गया है।
जनता दल (यूनाइटेड) जम्मू-कश्मीर के प्रवक्ता एवं प्रवासी प्रकोष्ठ इंचार्ज राकेश हंडू ने इस आदेश को एलजी प्रशासन और जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश सरकार की असंवेदनशीलता का प्रतीक बताया। रविवार को उन्होंने कहा कि पीएम पैकेज कर्मचारी खुद को एलजी प्रशासन और यूटी सरकार की ओर से ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं क्योंकि यह आदेश प्रधानमंत्री रोजगार पैकेज की भावना और उद्देश्य दोनों के विपरीत है।
हंडू ने कहा कि सुपरन्यूमेरेरी पदों को अस्थायी व्यवस्था के रूप में बनाया गया था ताकि बाद में कर्मचारियों को नियमित पदों पर समायोजित किया जा सके लेकिन सरकार ने इसे सुपरन्यूमेरेरी फॉर लाइफ घोषित कर दिया, जिससे कर्मचारियों के स्थायी दर्जे और पदोन्नति का रास्ता ही बंद हो गया।
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उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों ने विस्थापन, असुरक्षा और कठिन परिस्थितियों में कश्मीर में अपनी सेवाएं दीं, उनके साथ यह व्यवहार अत्यंत अन्यायपूर्ण है। सरकार को चाहिए कि वह इस भेदभावपूर्ण आदेश को तुरंत रद्द करे और पीएम पैकेज कर्मचारियों के समान अधिकार, सम्मान और सेवा सुरक्षा को सुनिश्चित करे।
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अमर उजाला ब्यूरो
श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर फंड्स संगठन की ओर से जारी क्वासी-परमानेंट स्टेटस से संबंधित हालिया आदेश ने पीएम पैकेज कर्मचारियों में गहरा आक्रोश पैदा कर दिया है। आदेश के अनुसार सुपरन्यूमेरेरी पदों पर कार्यरत कर्मचारियों को अर्ध-स्थायी दर्जा नहीं दिया जा सकेगा जिससे हजारों प्रवासी कर्मचारियों का भविष्य एक बार फिर असमंजस में पड़ गया है।
जनता दल (यूनाइटेड) जम्मू-कश्मीर के प्रवक्ता एवं प्रवासी प्रकोष्ठ इंचार्ज राकेश हंडू ने इस आदेश को एलजी प्रशासन और जम्मू-कश्मीर केंद्र शासित प्रदेश सरकार की असंवेदनशीलता का प्रतीक बताया। रविवार को उन्होंने कहा कि पीएम पैकेज कर्मचारी खुद को एलजी प्रशासन और यूटी सरकार की ओर से ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं क्योंकि यह आदेश प्रधानमंत्री रोजगार पैकेज की भावना और उद्देश्य दोनों के विपरीत है।
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हंडू ने कहा कि सुपरन्यूमेरेरी पदों को अस्थायी व्यवस्था के रूप में बनाया गया था ताकि बाद में कर्मचारियों को नियमित पदों पर समायोजित किया जा सके लेकिन सरकार ने इसे सुपरन्यूमेरेरी फॉर लाइफ घोषित कर दिया, जिससे कर्मचारियों के स्थायी दर्जे और पदोन्नति का रास्ता ही बंद हो गया।
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उन्होंने कहा कि जिन कर्मचारियों ने विस्थापन, असुरक्षा और कठिन परिस्थितियों में कश्मीर में अपनी सेवाएं दीं, उनके साथ यह व्यवहार अत्यंत अन्यायपूर्ण है। सरकार को चाहिए कि वह इस भेदभावपूर्ण आदेश को तुरंत रद्द करे और पीएम पैकेज कर्मचारियों के समान अधिकार, सम्मान और सेवा सुरक्षा को सुनिश्चित करे।