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Jammu News: जम्मू-कश्मीर में गहरा रहा है मानसिक स्वास्थ्य संकट

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Srinagar, Mental Health, Cases Increase in Jammu Kashmir
अमर उजाला ब्यूरो
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श्रीनगर। जम्मू-कश्मीर में बढ़ते मानसिक स्वास्थ्य संकट के बीच डॉक्टरों का कहना है कि बड़ी संख्या में लोग आगे आकर इलाज कराने लगे हैं जिससे जागरूकता और स्वीकार्यता में धीमा लेकिन सकारात्मक बदलाव आ रहा है।
सरकारी मेडिकल कॉलेज (जीएमसी) अनंतनाग के आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि पिछले पांच वर्षों में अस्पताल में मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं वाले 2.5 लाख से ज्यादा मरीजों का इलाज किया गया है। इसी तरह जीएमसी श्रीनगर स्थित मानसिक स्वास्थ्य एवं तंत्रिका विज्ञान संस्थान (आईएमएचएएनएस) ने पिछले साल लगभग दो लाख मरीजों का इलाज किया है। आईएमएचएएनएस के मनोचिकित्सा विभाग के प्रोफेसर डॉ. यासिर राथर ने कहा कि आईएमएचएएनएस ने पिछले साल लगभग दो लाख रोगियों का इलाज हुआ जिनमें सामान्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं और मादक द्रव्यों के सेवन संबंधी विकारों, दोनों के लिए मदद चाहने वाले लोग शामिल थे। यह संख्या अपने आप में सुलभ, किफायती और कलंक-मुक्त देखभाल की बढ़ती मांग को दर्शाती है। इस वर्ष का विषय हमें याद दिलाता है कि मानसिक स्वास्थ्य देखभाल शांति का विशेषाधिकार नहीं बल्कि संकट के समय एक जरूरत होनी चाहिए।
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डॉ. राथर ने कहा कि कश्मीर में लोग अनिश्चितता, हाल के युद्ध जैसे हालात और बाढ़ व भूकंप जैसी प्राकृतिक आपदाओं का सामना कर रहे हैं। यहां सामाजिक तनाव और मानसिक स्वास्थ्य चुनौतियां दैनिक जीवन में गहराई से समाहित हैं। हमें समुदाय-आधारित मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने, आपदा और आपातकालीन प्रतिक्रिया में मनोवैज्ञानिक सहायता को एकीकृत करने और यह सुनिश्चित करने के लिए सामूहिक रूप से काम करना चाहिए कि देखभाल के मामले में कोई भी व्यक्ति, चाहे वह किसी भी भौगोलिक या पृष्ठभूमि का हो, पीछे न छूटे।
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डॉ. यासिर ने आगे कहा कि हमें मानसिक स्वास्थ्य सेवाओं को हर जगह सुलभ बनाना चाहिए। स्वास्थ्य लाभ को मानवाधिकार मानकर उसकी रक्षा करें और ऐसी व्यवस्था बनाएं जो संकट में भी मजबूती से खड़ी रहें।

डॉक्टर चेतावनी देते हैं कि मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं की गंभीरता अभी भी बेहद चिंताजनक बनी हुई है जिसमें अवसाद, चिंता, द्विध्रुवी विकार और मादक द्रव्यों का सेवन सबसे आम समस्याओं में से हैं। मनोचिकित्सक डॉ. अबरार ने कहा कि आत्महत्या के विचार रखने वाले लोगों में चेतावनी के संकेतों को पहचानना और सकारात्मक सहायता नेटवर्क के माध्यम से सहायता सुनिश्चित करना हमारी जिम्मेदारी है।
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