श्रीनगर चुनाव: परंपरागत सीट से अब्दुल्ला परिवार मैदान में नहीं, नेकां-पीडीपी, अपनी पार्टी-डीपीएपी के अपने राग
अब्दुल्ला परिवार की परंपरागत श्रीनगर सीट पर इस बार परिवार का कोई सदस्य चुनाव मैदान में नहीं है। उमर अब्दुल्ला बारामुला सीट से चुनाव मैदान में हैं। नेकां-पीडीपी, अपनी पार्टी और डीपीएपी सभी चुनावी जंग में अपना-अपना राग अलाप रहे हैं।
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जम्मू-कश्मीर की ग्रीष्मकालीन राजधानी श्रीनगर में मुकाबला दिलचस्प हो गया है। नेकां के गढ़ में इस बार के दो चिर परिचित धुर विरोधी नेकां-पीडीपी तो मैदान में हैं ही, साथ ही दो नए प्रतिद्वंद्वी अपनी पार्टी और डेमोक्रेटिक प्रोग्रेसिव आजाद पार्टी (डीपीएपी) भी ताल ठोंक रहे हैं। नेकां प्रमुख डॉ. फारूक अब्दुल्ला इस सीट से सांसद रहे हैं, लेकिन इस बार स्वास्थ्य कारणों से उन्होंने किनारा कर लिया है।
अब्दुल्ला परिवार की परंपरागत सीट पर इस बार परिवार का कोई सदस्य चुनाव मैदान में नहीं है। उमर अब्दुल्ला बारामुला सीट से चुनाव मैदान में हैं। नेकां-पीडीपी, अपनी पार्टी और डीपीएपी सभी चुनावी जंग में अपना-अपना राग अलाप रहे हैं।
नेकां ने शिया नेता आगा रुहुल्लाह को मैदान में उतारा है तो पीडीपी ने अपने यूथ विंग के अध्यक्ष वहीद रहमान पर्रा पर दांव लगाया है। अपनी पार्टी ने पूर्व मंत्री मोहम्मद अशरफ मीर को टिकट दिया है तो डीपीएपी अमीर अहमद भट से मैदान में हैं। सभी के अपने दावे हैं। नेकां खासकर पीडीपी और अपनी पार्टी पर हमलावर है।
नेकां की ओर से इन्हें भाजपा समर्थित पार्टियां करार देने की कोशिश की जा रही है। पीडीपी प्रत्याशी की ओर से नेकां पर हमले किए जा रहे हैं। नेकां को कश्मीर में अशांति के लिए जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। इसके साथ ही युवाओं को टारगेट किया जा रहा है ताकि युवा ब्रिगेड साथ रहे। अपनी पार्टी की ओर से नेकां-पीडीपी दोनों पर हमले किए जा रहे हैं।
दोनों को कश्मीरियों के गुनाहों का जिम्मेदार ठहराया जा रहा है। पार्टी की ओर से नेकां और पीडीपी दोनों से सवाल किए जा रहे हैं कि सत्ता में रहने के बाद भी कश्मीरी अवाम के लिए क्या किया, इसका हिसाब दिया जाना चाहिए। डीपीपीएपी को आजाद के कद पर भरोसा है। पार्टी की ओर से मतदाताओं के बीच सच्चा हितैषी होने का वादा किया जा रहा है। लोगों में यह भरोसा बनाने की कोशिश की जा रही है कि सबकी सरकार देखने के बाद एक बार मौका डीपीएपी को भी दिया जाना चाहिए।
मतदान करीब आते ही प्रचार का रंग और हो रहा गाढ़ा
श्रीनगर में मतदान 13 मई को होना है। चुनाव करीब आते ही पार्टियों के प्रचार का रंग और गाढ़ा होता जा रहा है। नेकां के लिए उमर-फारूक, अपनी पार्टी के लिए अल्ताफ बुखारी तथा डीपीएपी के लिए आजाद ने मोर्चा संभाल रखा है। सभी पार्टियों की रोजाना सभाएं हो रही हैं। देर रात तक प्रचार चल रहा है। हालांकि, सुरक्षा भी बढ़ाई गई है।
परिसीमन के बाद बदला सियासी समीकरण
परिसीमन के बाद इस सीट के राजनीतिक समीकरण बदल गए हैं। अब इस सीट में पांच जिले गांदरबल, श्रीनगर, बडगाम, पुलवामा व शोपियां हैं। कुल 18 विधानसभा सीटें हैं। दक्षिण कश्मीर के पुलवामा जिले की चार व शोपियां जिले की एक सीट को श्रीनगर लोकसभा सीट से जोड़ा गया है। इसी प्रकार बडगाम का कुछ हिस्सा बारामुला के साथ जोड़ दिया गया है। इस सीट पर शिया समुदाय के वोटरों की संख्या अच्छी है।
श्रीनगर लोकसभा सीट में मतदाताओं की स्थिति
- जिला विस सीटें पुरुष महिला पहली बार के वोटर दिव्यांग कुल
- गांदरबल 02 102591 101877 8673 2856 204469
- श्रीनगर 08 376302 373945 12003 1691 750270
- बडगाम 03 144760 142084 10842 2161 286857
- पुलवामा 04 200369 203069 11779 4210 397459
- शोपियां 01 50026 48941 4215 729 98972
- कुल 18 874048 869916 45712 11647 1744027