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जम्मू कश्मीर: CID की रिपोर्ट में खुलासा, आतंकियों की भर्ती का हब बन गया है श्रीनगर सेंट्रल जेल

Wed, 21 Feb 2018 05:38 PM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, जम्मू Updated Wed, 21 Feb 2018 05:38 PM IST
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 srinagar Central Jail became hub of terrorists recruitment jammu and kashmir
srinagar jail - फोटो : file photo

पाक आतंकी नवीद जट के महाराजा हरि सिंह अस्पताल से भागने के बाद जांच में लगातार परत दर परत खुल रही हैं। सीआईडी की रिपोर्ट के अनुसार, सेंट्रल जेल आतंकियों की भर्ती का हब बनता जा रहा है। कैदी समानांतर व्यवस्था चला रहे हैं।

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आतंकियों की नई भर्ती को तभी मंजूरी मिलती है जब जेल में बंद कैदी से स्वीकृति मिल जाती है। यह रिपोर्ट आईजी (सीआईडी) एजी मीर ने पिछले वर्ष तैयार की थी, जिसे डीजीपी डा. एसपी वैद ने प्रमुख सचिव गृह आरके गोयल को भेजा है। 
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रिपोर्ट में कहा गया है कि कैदियों ने समानांतर प्रशासनिक व्यवस्था बना रखी है। जेल में शुरा नाम से एक सलाहकार परिषद का गठन छह महीने के लिए किया गया है। इसका अमीर ए जिंदान नाम से स्वयंभू चीफ भी नियुक्त कर रखा है।
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श्रीनगर सेंट्रल जेल शहर के हृदयस्थल डाउनटाउन में है। इसमें हाई प्रोफाइल आतंकी रखे गए हैं जिनके स्थानीय लोगों से अच्छे संबंध हैं। आतंकी प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से जेलकर्मियों को धमकाते हैं। कई खूंखार आतंकियों को शिफ्ट करने का फैसला लिया गया था।

लेकिन विभिन्न कोर्ट के आदेश से ऐसा नहीं हो पाया। तत्कालीन जेल अधीक्षक एसके मिश्रा ने कहा कि उन्होंने कहा कि जेल विभाग की समस्याओं की गृह विभाग तथा डीजीपी को अच्छी तरह से जानकारी है।

आदेश के बाद भी किसी ने नहीं ली जेल की तलाशी

नवीद के भागने के बाद हटाए गए तत्कालीन जेल अधीक्षक एसके मिश्रा ने सीआईडी रिपोर्ट के जवाब में लिखा है कि उन्होंने पूर्व आईजी मुनीर खान और डीआईजी से जेल की तलाशी लेने को कई बार कहा, लेकिन तलाशी नहीं हो पाई। जेल में आधारभूत संरचना की कमी पर भी उन्होंने ऊंगली उठाई थी।

इससे कैदियों को अलग-अलग रखने का काम नहीं हो पा रहा है। उन्होंने लिखा है कि 300 कैदियों की सुरक्षा के लिए एक समय में मात्र 20 लोग होते हैं। इतनी कम संख्या में जेल में कठोर अनुशासन काफी मुश्किल भरा काम है। उन्होंने 150 अतिरिक्त पुलिसकर्मियों की मांग सेंट्रल जेल तथा अन्य जेलों की सुरक्षा के लिए की थी, लेकिन सरकार ने इस पर कोई कार्रवाई नहीं की।

पत्र में मिश्रा ने लिखा है कि राज्य के कानून विभाग को एडवोकेट जनरल तथा एडिशनल एडवोकेट जनरल को आदेश करना चाहिए कि वह कैदियों के स्थानांतरण पर लगी रोक को हटाने के लिए प्रभावी कार्रवाई करें। साथ ही पेरोल पर रहे कैदियों के समर्पण के भी प्रयास हों। 

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