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Jammu News: ई-रिक्शा की आवाजाही पर प्रतिबंध से छात्र व स्थानीय लोग परेशान

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Srinagar, Bann on E Rickshaw, Students And Local Peoples, Facing Problems
श्रीनगर के एमए रोड पर वाहन का इंतजार करते लोग। अमर उजाला
- लोगों ने पाबंदी को बेमतलब और गरीब विरोधी बताया, आरटीओ से की बैन हटाने की मांग
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अमर उजाला ब्यूरो

श्रीनगर। क्षेत्रीय परिवहन कार्यालय (आरटीओ) कश्मीर के श्रीनगर के दो बड़े कॉरिडोर पर ई-रिक्शा पर प्रतिबंध लगाने के फैसले की छात्रों समेत स्थानीय लोगों ने कड़ी आलोचना की है। इससे उन्हें परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
उनका कहना है कि यह कदम गलत तरीके से गरीब और उन यात्रियों को टारगेट करता है जो ट्रांसपोर्ट के सबसे सस्ते तरीके से वंचित हो गए हैं। सरकारी निर्देश के मुताबिक मौलाना आजाद रोड पर जहांगीर चौक से जेके बैंक हेडक्वार्टर और रेजीडेंसी रोड पर हरी सिंह हाई स्ट्रीट से जेके बैंक हेडक्वार्टर तक ई-रिक्शा चलाने पर रोक लगा दी गई है। ये हिस्से शहर के सबसे व्यस्त शहरी रूट में से हैं।
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इस समस्या को लेकर लोगों का कहना है ई-रिक्शा छोटे, कम कैपेसिटी वाले वाहन हैं जो ट्रैफिक में रुकावट नहीं डालते हैं। इसलिए शहर की मुख्य सड़कों पर जाम के लिए उन्हें दोषी नहीं ठहराया जा सकता। उन्होंने कहा कि यह आदेश उन ड्राइवरों के लिए सजा है जो आर्थिक रूप से कमजोर हैं और पूरी तरह से रोज की कमाई पर निर्भर हैं। उन्होंने कहा कि ई-रिक्शा छात्रों, दिहाड़ी मजदूरों और कम आय वाले परिवारों के लिए सबसे सस्ता विकल्प बन गया है। इस बैन ने उन लोगों के लिए आना-जाना और मुश्किल कर दिया है जो कम दूरी के ट्रांसपोर्ट पर निर्भर हैं।
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जहांगीर चौक के पास गाड़ी का इंतजार कर रही वुमेन कॉलेज की छात्रा आमिना ने कहा कि उन्हें 20 मिनट से अधिक समय हो गया है यहां स्टॉप पर खड़े लेकिन कोई ऐसी गाड़ी नहीं आ रही जिसमें जगह हो। ई-रिक्शा के बंद होने से दिक्कत का सामना करना पड़ रहा है। पहले 10 रुपये देते थे और सीधा कॉलेज पहुंच जाते थे लेकिन अब मुश्किल हो रही है। एक अन्य एसपी कॉलेज के छात्र वसीम ने कहा कि सरकार का यह फैसला बिना सोचे समझे लिए गया है। इन रूटों पर सबसे ज्यादा लोगों की आवाजाही है और ई-रिक्शा सस्ता और जल्द उपलब्ध होने वाला विकल्प था। अब बस के लिए इंतजार करना पड़ता है और सब ओवरलोडेड आती हैं। खासकर महिलाओं और छात्राओं के लिए यह दिक्कत है।

मनमाना किराया वसूल रहे ऑटो चालक

इन पाबंदियों के बाद ऑटो रिक्शा चालकों ने मनमाना किराया वसूलना शुरू कर दिया है क्योंकि श्रीनगर में ऑटो बिना मीटर के चल रहे हैं। स्थानीय लोगों ने कहा कि ई-रिक्शा न होने से ऑटो ऑपरेटर अपनी मर्जी से किराया मांग रहे हैं जिससे यात्रियों के पास कोई दूसरा रास्ता नहीं बचता। उन्होंने इस फैसले के पीछे की सोच की आलोचना करते हुए कहा कि अधिकारियों को इस पर रोक लगाने के बजाय सस्ते और इको-फ्रेंडली ट्रांसपोर्ट का समर्थन करना चाहिए। उन्होंने मांग की कि आरटीओ तुरंत बैन हटाए और ऐसे कदम उठाए जो यात्रियों और गरीब चालकों दोनों की सुरक्षा करें।
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