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Jammu News: अष्टांगू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपेक्षा का शिकार
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- बुनियादी स्वास्थ्य सेवा के लिए मीलों दूर जा रहे बांदीपोरा के मरीज
भट शहज़ाद
बांदीपोरा। उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले के अष्टांगू गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपेक्षा का शिकार है। गांववासियों को बुनियादी इलाज के लिए भी मीलों दूर जाना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि गरीब और बीमार ग्रामीणों की सेवा के लिए वर्षों पहले बनाया गया अस्पताल भवन अधूरा पड़ा है। अब खानाबदोश बकरवाल परिवार इसे अपने पशुओं के आश्रय के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। एक ग्रामीण ने कहा कि यह गरीबों की सेवा के लिए बनाया गया था लेकिन अब यह जानवरों की सेवा कर रहा है।
निवासियों ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टर देरी से आते हैं और। जल्दी चले जाते हैं। कई डॉक्टर अक्सर ड्यूटी से गायब रहते हैं। स्थानीय निवासी मुश्ताक अहमद ने कहा कि डॉक्टर ड्यूटी खत्म होने से पहले ही चले जाते हैं। गरीब मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है क्योंकि वे निजी क्लीनिकों में जाने या बार-बार आने-जाने का खर्च नहीं उठा सकते।
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ग्रामीणों ने यह भी शिकायत की कि केंद्र में मुफ्त दवाएं नहीं मिलती हैं जिससे मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। एक अन्य निवासी शबनम बेगम ने कहा कि दर्द निवारक या सिरप जैसी बुनियादी दवाइयां भी उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने सवा किया कि अगर हमें छोटी-मोटी बीमारियों के लिए भी बांदीपोरा जाना पड़े तो स्वास्थ्य केंद्र होने का क्या मतलब है।
एलजी, सीएम व स्वास्थ्य मंत्री से लगाई गुहार
पशुओं के कारण अस्वच्छ परिस्थितियों ने स्थिति को और बदतर बना दिया है। एक अन्य ग्रामीण ने कहा कि मरीज परिसर में प्रवेश करने से भी हिचकिचाते हैं। निवासियों ने स्वास्थ्य मंत्री सकीना इत्तू, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से तत्काल हस्तक्षेप करने, डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने, दवाओं की आपूर्ति बहाल करने और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को चालू करने की अपील की है।
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भट शहज़ाद
बांदीपोरा। उत्तरी कश्मीर के बांदीपोरा जिले के अष्टांगू गांव में प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र उपेक्षा का शिकार है। गांववासियों को बुनियादी इलाज के लिए भी मीलों दूर जाना पड़ रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि गरीब और बीमार ग्रामीणों की सेवा के लिए वर्षों पहले बनाया गया अस्पताल भवन अधूरा पड़ा है। अब खानाबदोश बकरवाल परिवार इसे अपने पशुओं के आश्रय के रूप में इस्तेमाल कर रहे हैं। एक ग्रामीण ने कहा कि यह गरीबों की सेवा के लिए बनाया गया था लेकिन अब यह जानवरों की सेवा कर रहा है।
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निवासियों ने बताया कि प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र में तैनात डॉक्टर देरी से आते हैं और। जल्दी चले जाते हैं। कई डॉक्टर अक्सर ड्यूटी से गायब रहते हैं। स्थानीय निवासी मुश्ताक अहमद ने कहा कि डॉक्टर ड्यूटी खत्म होने से पहले ही चले जाते हैं। गरीब मरीजों को सबसे ज्यादा परेशानी होती है क्योंकि वे निजी क्लीनिकों में जाने या बार-बार आने-जाने का खर्च नहीं उठा सकते।
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ग्रामीणों ने यह भी शिकायत की कि केंद्र में मुफ्त दवाएं नहीं मिलती हैं जिससे मरीजों को निजी मेडिकल स्टोर से दवाएं खरीदनी पड़ती हैं। एक अन्य निवासी शबनम बेगम ने कहा कि दर्द निवारक या सिरप जैसी बुनियादी दवाइयां भी उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने सवा किया कि अगर हमें छोटी-मोटी बीमारियों के लिए भी बांदीपोरा जाना पड़े तो स्वास्थ्य केंद्र होने का क्या मतलब है।
एलजी, सीएम व स्वास्थ्य मंत्री से लगाई गुहार
पशुओं के कारण अस्वच्छ परिस्थितियों ने स्थिति को और बदतर बना दिया है। एक अन्य ग्रामीण ने कहा कि मरीज परिसर में प्रवेश करने से भी हिचकिचाते हैं। निवासियों ने स्वास्थ्य मंत्री सकीना इत्तू, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से तत्काल हस्तक्षेप करने, डॉक्टरों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने, दवाओं की आपूर्ति बहाल करने और प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को चालू करने की अपील की है।