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Jammu News: कामेश्वर मंदिर में अति महारुद्र यज्ञ व श्रीमद्भागवत कथा शुरू
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-जहां भागवत कथा का व्यख्यान, वो स्थल बन जाता है तीर्थ: डॉ. सत्यनारायण दास
अखनूर। महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य पर प्राचीन कामेश्वर मंदिर में अति महारुद्र यज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को शुभारंभ हुआ। श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर महंत रामेश्वर दास ने बताया कि भगवान का मुख अग्नि रूप है। विश्व के पालनहार भगवान विष्णु व संपूर्ण चराचर को जीवंत करने वाले 33 करोड़ देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए यज्ञशाला में स्थापित हवन कुंड में अरणि मंथन द्वारा अग्नि प्रकट की जाती है।
इस दौरान पूर्व मंत्री शाम लाल शर्मा मुख्य रूप से मौजूद रहे। वहीं श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते हुए मंहत डॉ. सत्यनारायण दास ने संगत को भागवत कथा सुनने का महत्व बताया। श्रीमद्भागवत कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। डॉ. सत्यनारायण दास ने कहा कि विश्व में सभी कथाओं में श्रीमद्भागवत कथा श्रेष्ठ मानी गई है। जहां इस कथा व्यख्यान होता है, वो स्थल तीर्थ बन जाता है। इसका सुनने एवं आयोजन कराने का सौभाग्य भी प्रभु प्रेमियां को ही मिलता है। ऐसे में अगर कोई दूसरा अन्य भी इसे गलती से श्रवण कर लेता है, तो भी वो कई पापों से मुक्ति पा लेता है। उन्होंने बताया की यह कथा भगवान श्री कृष्ण के मुख की वाणी है।
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अखनूर। महाशिवरात्रि के उपलक्ष्य पर प्राचीन कामेश्वर मंदिर में अति महारुद्र यज्ञ एवं श्रीमद्भागवत कथा का रविवार को शुभारंभ हुआ। श्री श्री 1008 महामंडलेश्वर महंत रामेश्वर दास ने बताया कि भगवान का मुख अग्नि रूप है। विश्व के पालनहार भगवान विष्णु व संपूर्ण चराचर को जीवंत करने वाले 33 करोड़ देवी-देवताओं को प्रसन्न करने के लिए यज्ञशाला में स्थापित हवन कुंड में अरणि मंथन द्वारा अग्नि प्रकट की जाती है।
इस दौरान पूर्व मंत्री शाम लाल शर्मा मुख्य रूप से मौजूद रहे। वहीं श्रीमद्भागवत कथा में प्रवचन करते हुए मंहत डॉ. सत्यनारायण दास ने संगत को भागवत कथा सुनने का महत्व बताया। श्रीमद्भागवत कथा में बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। डॉ. सत्यनारायण दास ने कहा कि विश्व में सभी कथाओं में श्रीमद्भागवत कथा श्रेष्ठ मानी गई है। जहां इस कथा व्यख्यान होता है, वो स्थल तीर्थ बन जाता है। इसका सुनने एवं आयोजन कराने का सौभाग्य भी प्रभु प्रेमियां को ही मिलता है। ऐसे में अगर कोई दूसरा अन्य भी इसे गलती से श्रवण कर लेता है, तो भी वो कई पापों से मुक्ति पा लेता है। उन्होंने बताया की यह कथा भगवान श्री कृष्ण के मुख की वाणी है।
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