फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Jammu and Kashmir ›   Jammu News ›   special story on pampore encounter

जानिए, पांपोर मुठभेड़ में सेना को क्यों लगे तीन दिन

Tue, 23 Feb 2016 10:45 AM IST
Updated Tue, 23 Feb 2016 10:45 AM IST
विज्ञापन
special story on pampore encounter

पांपोर में सीआरपीएफ कानवाय पर हमला और तीन दिनों तक सुरक्षा बलों एवं आतंकियों के बीच चली भीषण मुठभेड़ में पूरी तरह से प्रशिक्षित आतंकियों का हाथ था।

विज्ञापन


सेना का मानना है कि आतंकी पूरी तैयारी के साथ आए थे और जिस प्रकार से उन्होंने ऑपरेशन को अंजाम दिया, उससे स्पष्ट होता है कि वह ‘सुसाइड स्क्वायड’ से संबंधित थे।
विज्ञापन


सेना की विक्टर फोर्स के जीओसी मेजर जनरल अरविन्द दत्ता के अनुसार मुठभेड़ में मारे गए आतंकी फिदायीन बनकर आए थे और उनका एक ही मकसद था सुरक्षा बलों को ज्यादा से ज्यादा नुकसान पहुंचाना।
विज्ञापन
विज्ञापन


यह पूछे जाने पर कि क्या आतंकियों ने इमारत की पहले रेकी की होगी, इस पर जवाब दिया कि विदेशी आतंकी अमूमन ऐसा नहीं करते, लेकिन इस बात से इनकार भी नहीं किया जा सकता कि उन्होंने इस इमारत की पहले से रेकी की होगी।

आतंकियों को छिपने के लिए काफी जगह थी

special story on pampore encounter

हमले को अंजाम देने के बाद आतंकी साथ की ईडीआई इमारत में घुस गए। उस समय अंदर करीब 120 लोग मौजूद थे, जिनकी सुरक्षा पहली प्राथमिकता थी। तुरंत एक योजना बनाई गई और बुलेटप्रूफ गाड़ियों में पहले वहां से लोगों को सुरक्षित स्थानों की ओर पहुंचाया गया।

इसके बाद ऑपरेशन को अंजाम देने की कवायद शुरू हुई। इमारत का प्लींथ एरिया करीब 10,000 स्क्वायर फीट का है। बेसमेंट के अलावा इमारत में तीन मंजिल है। चौथी पर रेस्टोरेंट है। बाथरूम और अन्य छोटे कमरों के अलावा पूरी इमारत में करीब 44 और कमरे थे।

इससे साफ था कि आतंकियों को छिपने के लिए काफी जगह थी। अंधेरा होना शुरू हो गया था। इस बीच सीआरपीएफ की एक टीम ने इमारत के भीतर घुसने की कोशिश की, लेकिन आतंकियों ने फायरिंग शुरू कर दी। ग्रेनेड भी दागे। इस पर वापस आना पड़ा।

फूंक-फूंक कर रखा कदम

special story on pampore encounter

कुछ देर तक गोलियों की गूंज रुकती और फिर शुरू होती। सोमवार की सुबह एक बार फिर ऑपरेशन शुरू हुआ। लेकिन, अब सेना का लक्ष्य था आतंकियों को मार गिराना। इस बीच उन्हें यह निर्देश थे कि चाहे समय ज्यादा लगे, लेकिन अपना नुकसान नहीं होना चाहिए।

इसलिए हर कदम फूंक फूंक के रखा गया। इमारत को अब राकेट लांचर, मोर्टार और आरपीजी से निशाना बनाया गया। ऑपरेशन में आतंकियों की मौजूदगी को देखने के लिए यूएवी भी इस्तेमाल किए गए।

करीब दोपहर दो बजे इमारत में भीषण आग लगी। इस बीच सेना का प्रहार भी जारी रहा। करीब 48 घंटे बीत जाने के बाद तीन विदेशी आतंकियों को मार गिराने में सफलता हाथ लगी।

ऑपरेशन को अंजाम दे रहे अधिकारियों के अनुसार इस इमारत में ऑपरेशन को अंजाम देना चुनौती भरा कार्य था। आतंकियों को छिपने के लिए जगह बहुत थी। उन्हें यह फायदा था कि वह ऊंचाई पर थे। वह ऐसी जगह छिपते थे, जहां हमारी नजर नहीं पड़ती थी, लेकिन वह हम पर पूरी नजर बनाए हुए थे। इसके बावजूद कामयाबी हाथ लगी और ऑपरेशन सफलतापूर्ण संपन्न हुआ।

...पवन का आतंकियों से हो गया सामना

special story on pampore encounter

बाद में ऑपरेशन की कमान संभाली सेना की 10 पैरा की एक विशेष टीम ने, जिसका हिस्सा थे कैप्टन पवन। उन्होंने छत से घुसने की कोशिश की। यह अच्छी कोशिश थी, लेकिन इस बीच आतंकियों के साथ सामना हो गया, जिसमें वह शहीद हो गए।

इसके बाद सेना की नौ पैरा कमांडो को रविवार सुबह ऑपरेशन के लिए बुलाया गया। उन्होंने प्रभावी योजना के तहत इमारत के दो फ्लोर क्लियर किए। अब आतंकी तीसरे और चौथे माले में थे, लेकिन जैसे ही यह टीम और आगे बढ़ी तो आतंकियों ने उनपर धावा बोल दिया।

इस दौरान कैप्टन तुषार महाजन और लांस नायक ओम प्रकाश ने शहादत पाई। दिन भर ऑपरेशन चलता रहा। रात में भी जारी रहा।

विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed