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बर्फबारी से गिरा घाटी का पारा, बेघरों की दिक्कतें बढ़ी
Updated Tue, 14 Oct 2014 12:38 PM IST
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कश्मीर मे होने वाली बर्फबारी जो कभी लोगों के लिए खुशियां लाती थी अब वह मुश्किल का सबब बन रही है। घाटी की जिस बर्फबारी के देखने के लिए ना जाने कितने पर्यटक कश्मीर आते थे आज वहां सिर्फ और सिर्फ सन्नाटा पसरा हआ है। अब ना तो यहां पर्यटक हैं और ना डल झील के किनारे जगमगाते शिकारे।
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कश्मीर घाटी पर पिछले महीने कुदरत का जो कहर बरपा है। उससे वह अभी तक नहीं निकल सका है। कुदरत ने एक बार फिर से अपना रुख बदला है। दरअसल घाटी के कई हिस्सों में बर्फबारी शुरु हो गई है। जिसके चलते कश्मीर के तापमान में बड़ी गिरावट देखी गई है। हालांकि घाटी में बर्फबारी की शुरुआत कई दिनों पहले हो चुकी है। मंगलवार रात को कश्मीर के अनंतनाग, सिनथान इलाकों में बर्फबारी हुई है।
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अब घाटी के लोगों के सामने एक और समस्या खड़ी हो गई है। जिन लोगों के घर बाढ़ के चलते या तो टूट गए हैं या फिर बुरी तरह से क्षतिग्रस्त हुए है। उनको काफी दिक्ततों का सामना करना पड़ रहा है।
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बेघर लोगों की बढ़ी मुसीबतें
बाढ़ के कारण हजारों लोग निर्वासित जीवन जीने को मजबूर हो रहे है। बाढ़ पीड़ित सड़कों और खुले में जिंदगी गुजारने पर मजबूर है। ऐसे में बर्फबारी ने उनके लिए दोहरी मुश्किल खड़ी कर दी है। घाटी के लोगों ने सरकार से गुहार लगाई है कि उन्हें और शेल्टरों व्यवस्था करावाई जाए। कश्मीर में सर्दियों में तापमान बहुत गिर जाता है ऐसे में सर्दियों की घोषणा ने लोगों को परेशान कर दिया है।
गौरतलब है कि घाटी में आई बाढ़ को 100 सालों की सबसे भयानक प्राकृतिक आपदा माना गया था। इस आपदा में लगभग 300 लोगों की मौत हो गई थी और लाखों लोग बेघर हो गए। बाढ़ से विस्थापितों के पुनर्वास का काम अब भी नहीं हो पाया है। अब ये देखना होगा कि खुले में जिंदगी गुजार रहे लोगों के लिए बिना छत हाड़ कंपाने वाली सर्दी का कैसे समना कर पाते है।
गौरतलब है कि घाटी में आई बाढ़ को 100 सालों की सबसे भयानक प्राकृतिक आपदा माना गया था। इस आपदा में लगभग 300 लोगों की मौत हो गई थी और लाखों लोग बेघर हो गए। बाढ़ से विस्थापितों के पुनर्वास का काम अब भी नहीं हो पाया है। अब ये देखना होगा कि खुले में जिंदगी गुजार रहे लोगों के लिए बिना छत हाड़ कंपाने वाली सर्दी का कैसे समना कर पाते है।