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Jammu News: दूसरे अस्पतालों की प्यास बुझा सकता है एसएमजीएस
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संवाद न्यूज एजेंसी
जम्मू। पानी की किल्लत झेल रहा महाराजा गुलाब सिंह अस्पताल ( एसएमजीएस) जम्मू अब खुद के मरीजों की प्यास बुझाने के साथ दूसरे अस्पतालों में भी पेयजल किल्लत दूर कर सकता है। अस्पताल प्रशासन ने दो करोड़ की लागत से तीन बोरवेल तैयार किए हैं। इनसे एसएमजीएस के साथ-साथ आयुर्वेदिक अस्पताल को भी पानी दिया जाएगा।
1948 में जब अस्पताल बनाया गया तब 160 बेड स्थापित किए गए । 2015 में बेड की संख्या 750 कर दी गई। 83 साल पुराने अस्पताल का दायरा और मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ पानी की किल्लत भी गहराती गई। नतीजतन अस्पताल प्रशासन को टैंकर खरीदकर पानी पूरा करना पड़ रहा था। इससे हर माह पांच लाख का खर्च आ रहा था। जीएमसी बनने से पहले यहां पर ही मरीज पहुंचते थे। अधिकारियों के अनुसार एक बेड पर करीब 500 लीटर पानी का उपयोग किया जाता है। अधिकारियों की मानें तो इस प्रोजेक्ट की टेंडरिंग का काम शुरू हो गया है, जल्द ही पानी की किल्लत दूर होगी।
एसएमजीएस जच्चा-बच्चा अस्पताल में आने वाले मरीजों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी। पानी की किल्लत जल्द दूर होगी। सरकार को लिखकर अस्पताल में तीन बोरवेल तैयार करवाए हैं।
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- डॉ. दारा सिंह, एमएस एसएमजीएस अस्पताल
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जम्मू। पानी की किल्लत झेल रहा महाराजा गुलाब सिंह अस्पताल ( एसएमजीएस) जम्मू अब खुद के मरीजों की प्यास बुझाने के साथ दूसरे अस्पतालों में भी पेयजल किल्लत दूर कर सकता है। अस्पताल प्रशासन ने दो करोड़ की लागत से तीन बोरवेल तैयार किए हैं। इनसे एसएमजीएस के साथ-साथ आयुर्वेदिक अस्पताल को भी पानी दिया जाएगा।
1948 में जब अस्पताल बनाया गया तब 160 बेड स्थापित किए गए । 2015 में बेड की संख्या 750 कर दी गई। 83 साल पुराने अस्पताल का दायरा और मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ पानी की किल्लत भी गहराती गई। नतीजतन अस्पताल प्रशासन को टैंकर खरीदकर पानी पूरा करना पड़ रहा था। इससे हर माह पांच लाख का खर्च आ रहा था। जीएमसी बनने से पहले यहां पर ही मरीज पहुंचते थे। अधिकारियों के अनुसार एक बेड पर करीब 500 लीटर पानी का उपयोग किया जाता है। अधिकारियों की मानें तो इस प्रोजेक्ट की टेंडरिंग का काम शुरू हो गया है, जल्द ही पानी की किल्लत दूर होगी।
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एसएमजीएस जच्चा-बच्चा अस्पताल में आने वाले मरीजों को परेशानी नहीं आने दी जाएगी। पानी की किल्लत जल्द दूर होगी। सरकार को लिखकर अस्पताल में तीन बोरवेल तैयार करवाए हैं।
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- डॉ. दारा सिंह, एमएस एसएमजीएस अस्पताल