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कश्मीर घाटी में आतंकियों के स्लीपर सेल सक्रिय
ब्यूरो, अमर उजाला/जम्मू
Updated Thu, 26 May 2016 11:23 AM IST
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आतंकवादी
- फोटो : Demo Pic.
घाटी में आतंकियों के स्लीपर सैल सक्रिय रहने से सुरक्षा बलों की चुनौतियां बढ़ गई हैं। श्री अमरनाथ यात्रा से पहले इन स्लीपर सैल से आतंकियों के ठहरने और गतिविधियां तेज होने की सूचनाएं लगातार प्राप्त हो रही हैं। आतंकी वारदात करने की फिराक में हैं और घुसपैठ करके इन स्लीपर सैल में ठहरकर हमला करने के लिए उपयुक्त समय के इंतजार में हैं।
कश्मीर में पुलिसकर्मियों पर हुए हमले में शामिल आतंकी भी किराये के मकान में छात्र बनकर ठहरे थे। इससे पहले भी स्लीपर सैैल की सक्रियता के कारण आतंकी शरण ले चुके हैं। इन स्लीपर सैल का पता लगाना सुरक्षा बलों के लिए चुनौती भरा हो गया है। कश्मीर और जम्मू में ऐसे कई स्थान हैं। जहां ओवरग्राउंड वर्कर्स आतंकियों की मदद कर रहे हैं।
घुसपैठ करने से लेकर उनको ठिकाने पहुंचाने तक ओवरग्राउंड वर्कर्स काम कर रहे हैं। उधमपुर में नावेद और अन्य आतंकी को पहुंचाने में ओवरग्राउंड वर्कर्स ने ही काम किया, जबकि सुरक्षा बलों का मानना है कि कठुआ से जम्मू के बीच हीरानगर आदि क्षेत्रों में आतंकी हमले भी स्लीपर सैल की मदद से हुए।
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कश्मीर में पुलिसकर्मियों पर हुए हमले में शामिल आतंकी भी किराये के मकान में छात्र बनकर ठहरे थे। इससे पहले भी स्लीपर सैैल की सक्रियता के कारण आतंकी शरण ले चुके हैं। इन स्लीपर सैल का पता लगाना सुरक्षा बलों के लिए चुनौती भरा हो गया है। कश्मीर और जम्मू में ऐसे कई स्थान हैं। जहां ओवरग्राउंड वर्कर्स आतंकियों की मदद कर रहे हैं।
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घुसपैठ करने से लेकर उनको ठिकाने पहुंचाने तक ओवरग्राउंड वर्कर्स काम कर रहे हैं। उधमपुर में नावेद और अन्य आतंकी को पहुंचाने में ओवरग्राउंड वर्कर्स ने ही काम किया, जबकि सुरक्षा बलों का मानना है कि कठुआ से जम्मू के बीच हीरानगर आदि क्षेत्रों में आतंकी हमले भी स्लीपर सैल की मदद से हुए।
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OWG कर रहे हथियार छिपाने और रेकी का काम
terrorist
- फोटो : FILE
आतंकियों को पहले ठहराया गया, उसके बाद तय समय पर इन आतंकियों को टारगेट के लिए भेजा गया। हथियारों को छिपाने, सूचना का आदान-प्रदान, सुरक्षा की लोकेशन, उनकी तैनाती और रैकी तक ओवरग्राउंड वर्कर्स कर रहे हैं। स्लीपर सैल में इन आतंकियों को ठहराया जा रहा है। जहां से उन्हें हर सूचना दी जा रही है।
सबसे अधिक स्लीपर सैल लश्कर-ए-तैयबा के बताए जा रहे हैं। सुरक्षा बलों ने इन स्लीपर सैल पर नजर रखने के लिए स्थानीय लोगों से आपसी सहयोग बढ़ाने के प्रयास शुरू किए हैं।
लोगों को भी कहा गया है कि वह किसी भी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें। डीआईजी जम्मू कठुआ अशगूर वानी का कहना है विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस पब्लिक मीट पर जोर दिया है, ताकि लोगों के बीच विश्वास बढ़ाया जा सके। लोगों से कहा गया है कि संदिग्धों की सूचना पर तुरंत पुलिस को सूचना दें।
सबसे अधिक स्लीपर सैल लश्कर-ए-तैयबा के बताए जा रहे हैं। सुरक्षा बलों ने इन स्लीपर सैल पर नजर रखने के लिए स्थानीय लोगों से आपसी सहयोग बढ़ाने के प्रयास शुरू किए हैं।
लोगों को भी कहा गया है कि वह किसी भी संदिग्ध गतिविधियों की सूचना तुरंत पुलिस को दें। डीआईजी जम्मू कठुआ अशगूर वानी का कहना है विभिन्न क्षेत्रों में पुलिस पब्लिक मीट पर जोर दिया है, ताकि लोगों के बीच विश्वास बढ़ाया जा सके। लोगों से कहा गया है कि संदिग्धों की सूचना पर तुरंत पुलिस को सूचना दें।