मौके पर पहुंची अमर उजाला की टीम, देखा दिल दहलाने वाला मंजर
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
कल्पना कीजिए एक पहाड़ पर जमा साढ़े तीन सौ लोगों की जिनमें ज्यादातर तादाद महिलाओं और मासूम बच्चों की है। इन लोगों को दो दिन से खाना तो दूर पीने का पानी भी ढंग से नसीब नहीं हुआ। झमाझम पानी बरस रहा है, पर सिर छुपाने को कोई ठिकाना नहीं है। पेड़ों के नीचे खड़े होकर बचने की नाकाम कोशिश करते हुए सोच रहे हैं कि ऐसा कौन सा गुनाह हो गया जो कुदरत ये दिन दिखा रही है।
मौत तो बेरहम थी, प्रशासन भी देर तक सोता रहा। मौत ने एक झपट्टा मारा और पलक झपकते ही पूरा गांव नेस्तनाबूद हो गया। उधमपुर जिला मुख्यालय से करीब 75 किलोमीटर दूरी पर दो दिन पहले तक बसा गांव सरथल अब इतिहास हो गया है। शनिवार को भूस्खलन और बारिश की शक्ल में आई तबाही ने ऐसा तांडव किया कि 300 से ज्यादा घरों वाले गांव का लगभग नामोनिशान ही मिट गया।
महाविनाश का दिल दहलाने वाला मंजर
सोमवार को अमर उजाला की टीम मौके पर पहुंची तो महाविनाश का मंजर दिल दहलाने वाला था। जहां गांव था, वहां दलदल है। सात शव और एक शरीर के अलग-अलग हिस्सों में बंटे कुछ अंग मिले। सोमवार को इनका सामूहिक अंतिम संस्कार करने कोशिश की जा रही थी, तभी भूस्खलन और बारिश शुरू हो गई। सभी लोग जान बचाकर फिर ऊंचाई की तरफ दौड़ पड़े।
दोपहर बाद तक न तो इनके लिए तंबुओं का इंतजाम हो सका था, न भोजन का। बच्चे भूख से बेहाल हो रहे थे। मां-बाप के पास देने के लिए झूठे दिलासा के अलावा कुछ भी न था। लोगों ने यह मान लिया है कि गांव के जिन 35-40 लोगों की कोई खोज-खबर नहीं मिल रही, उन्हें भी इस मनहूस दलदल ने लील लिया होगा। आसपास के गांव मुत्तल, अपर मूंगरी, अज्जल, बदन आदि खाली करा लिए गए हैं।
किसी की टांग मिली तो किसी का हाथ
बचाव कार्य में जुटे जवानों को कहीं किसी की टांग मिल रही है तो कहीं बाजू। मवेशियों के अंग भी मिलते रहे। बचाव कार्य रुक-रुककर चल रहा है। दो हेलीकाप्टर भी आए। पहाड़ पर फंसे लोगों में तंबू, राशन, पानी, कंबल आदि नहीं पहुंचने से गुस्सा है। उन्हें यह भी अफसोस है कि खबर मिलने के बावजूद बचाव कार्य 10 घंटे बाद शुरू हुआ।
यह देरी न हुई होती तो शायद कुछ जिंदगियां बच जातीं। हालांकि, सच यह भी है कि मौसम के आगे बचाव दल भी बेबस थे। सरपंच रमेश सिंह बताते हैं कि आसपास करीब एक हजार लोग होंगे जो बारिश और भूस्खलन से बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। हम कुदरत की मार तो झेल ही रहे हैं, ऊपर से प्रशासन की तरफ से कोई मदद नहीं मिल रही है।
करतार सिंह ने बताया कि करीब पांच किलोमीटर सड़क ही पूरी तरह बह गई है। यह पूरा इलाका दलदल बन गया है। प्रशासन के लोग दूर खडे़ हैं। ग्रामीण सामने की पहाड़ी से पूरा मंजर देख रहे हैं। प्रशासन लगातार दावे कर रहा है, जो अभी तक खोखले ही साबित हो रहे हैं।
देरी से पहुंचा राशन और दवाईयां
जिलाधीश यशा मुद्गल ने पंचैरी में बचाव कार्य शुरू करने में देरी को तकनीकी कारण बताया। उनके अनुसार सेना और जिला प्रशासन में समन्वय की कोई कमी नहीं है। हेलीकाप्टर पहुंचाने से पहले उसमें राशन, दवाईयां आदि भी भेजी जानी थीं, जिससे देरी हुई।
हेलीकाप्टर पहुंचने में काफी मुश्किलें आईं हैं। करीब दो सौ पुलिस के जवान, 50 एनडीआरएफ के जवान और एसडीआरएफ के जवान राहत कार्य में जुटे हैं। जिला प्रशासन के अधिकारी भी मौके पर पहुंचे हैं।
सोमवार को कोई भी शव बरामद नहीं हुआ है। भूस्खलन इतना हुआ है कि 30-40 फीट तक दलदल जमा है और एक पूरी पहाड़ी बह गई है।