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पूर्व केंद्रीय मंत्री सिन्हा बोले, कश्मीर के हालात में सुधार केवल बातचीत से ही संभव

Sat, 23 Nov 2019 06:20 AM IST
दुष्यंत शर्मा अमर उजाला ब्यूरो, श्रीनगर
अमर उजाला ब्यूरो, श्रीनगर Published by: दुष्यंत शर्मा Updated Sat, 23 Nov 2019 06:20 AM IST
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Sinha said, improvement in Kashmir situation is possible only through talks
यशवंत सिन्हा - फोटो : अमर उजाला

जम्मू-कश्मीर से अनुच्छेद 370 हटाए जाने के बाद पहली बार यहां के हालात जानने पहुंचे पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा ने कहा कि कश्मीर के हालात में सुधार बातचीत के जरिये ही हो सकता है। वह यहां के लोगों से बातचीत कर स्थिति जानेंगे। इसके बाद अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करेंगे।

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पूर्व केंद्रीय मंत्री यशवंत सिन्हा की अध्यक्षता में सिटिजन ग्रुप का पांच सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल शुक्रवार को कश्मीर पहुंचा। प्रतिनिधिमंडल में वजाहत हबीबुल्ला, रिटायर्ड एयर वाइस मार्शल कपिल काक, पत्रकार भारत भूषण और सामाजिक कार्यकर्ता सुशोभा बारबे शामिल हैं। 
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यह दल कश्मीर के हालात जानने के बाद सोमवार को लौटेगा। पत्रकारों से सिन्हा ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल यहां के हालात से वाकिफ  होगा। यहां देखा जाएगा कि क्या वाकई में सब सामान्य है कि नहीं। क्योंकि केंद्र सरकार कश्मीर में हालात ठीक होने का दावा करती है। 
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यहां हालात देखकर और रिपोर्ट बनाकर उसे दुनिया के सामने रखेंगे। वह जब एयरपोर्ट से होटल तक आ रहे थे तो रास्ते में कई दुकानें बंद मिली। ट्रांसपोर्ट कम चल रहा था, जोकि स्थिति के सामान्य होने के संकेत नहीं हैं। वह पांच अगस्त के बाद से अब तक हुए आर्थिक नुकसान का भी आकलन करेंगे। यह भी देखेंगे कि आखिर इस सबकी भरपाई किस तरह से हो पाएगी। 

गृह मंत्री अमित शाह द्वारा पार्लियामेंट में दिए गए बयान कि कश्मीर में एक भी गोली नहीं चली है पर अपनी प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि अगर कश्मीर में कोई गोली नहीं चली तो उसका क्रेडिट कश्मीर की जनता को जाता है न कि सरकार को।

सिन्हा ने कहा कि इंटरनेट व अन्य सुविधाओं पर प्रतिबंध लगाना गलत है। वह कभी भी अनुच्छेद 370 और 35ए को हटाने के हक में नहीं थे। ऐसा कर सरकार ने बहुत बड़ी गलती की है जिसे सुधारने की जरूरत है। 

अलगाववादी व राजनीतिक दलों के नेताओं की गिरफ्तारी भी यह एक गलत कदम थी। अगर हालात में सुधार लाना है तो बातचीत ही एक जरिया है। 2016 में पैदा हुए हालातों के बाद कश्मीर आने को लेकर एक सवाल के जवाब में कहा कि तब उम्मीद की एक किरण दिखाई दे रही थी, लेकिन इस बार कोई उम्मीद की किरण नहीं दिख रही है। तब और अब में बहुत अंतर है।

कहा कि सबसे पहले वह हुकूमत में बैठे लोगों का धन्यवाद करना चाहते हैं जिन्होंने उन्हें यहां आने की अनुमति दी। इससे पहले सितंबर में यहां आए थे, लेकिन उन्हें एयरपोर्ट से ही वापस भेज दिया गया था।


प्रतिनिधिमंडल से मिलने पहुंचे कई लोग
पहले दिन प्रतिनिधिमंडल से कश्मीर चैंबर ऑफ  कॉमर्स एंड इंडस्ट्रीज के अलावा सामाजिक कार्यकर्ता खुर्रम परवेज, कश्मीरी पंडित संघर्ष समिति के अध्यक्ष संजय टिक्कू समेत अन्य नेता मिलने पहुंचे। सभी ने उन्हें कश्मीर के हालात की जानकारी दी।

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