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अल्पसंख्यक दर्जा न मिलने पर जताई निराशा

Fri, 31 Mar 2017 05:42 PM IST
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, अमर उजाला/श्रीनगर Updated Fri, 31 Mar 2017 05:42 PM IST
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sikh community press conference
एपीएससीसी की प्रेस कांफ्रेंस - फोटो : Amar Ujala
ऑल पार्टी सीख कोर्डिनेशन कमेटी (एपीएससीसी) द्वारा वीरवार को मौजूदा पीडीपी-भाजपा सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए अल्पसंख्यकों के साथ किए वादे न पूरे किए जाना का आरोप लगाया है।
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उन्होंने कहा कि जो वादे किए गए थे उन्हें पूरा नहीं किया गया, जिनमें से उन्हे अल्पसंख्यक दर्जा दिया जाना एक अहम मुद्दा था। वहीं उन्होंने यह दर्जा न मिलने पर राज्य भर में आंदोलन छेड़ने की चेतावनी भी दी।
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एपीएससीसी के अध्यक्ष जगमोहन सिंह रैना ने कहा पीडीपी ने सत्ता में आने से पहले उनसे वादा किया था कि सिखों को राज्य में अल्पसंख्यक का दर्जा दिया जाएगा और हाल ही में पीडीपी ने ही सुप्रीमकोर्ट में इस दर्जे को देने पर आपत्ति जताई, जिससे सत्ताधारी पार्टी के मंसूबों पर सवाल खड़ा होता है। उन्होंने कहा कि इससे पूर्व कांग्रेस और नेकां की सरकार ने सिखों को उनका हक नहीं दिया। अब भाजपा-पीडीपी का भी वही हाल है। इसलिए अब उनकी नजर में सभी राजनीतिक दल एक समान हैं।
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रैना ने कहा कि वह राज्य सरकार के दोहरे रवैये से काफी हताश हुए हैं। इस सबको ध्यान में रखते हुए आज सिख कोर्डिनेशन कमेटी ने अपने सभी सिख भाइयों को अपना राजनीतिक विकल्प चुनने का खुद फैसला करने को कहा। उन्होंने कहा कि किसी भी सिख को अपनी मर्जी रहेगी कि वह आने वाले लोक सभा उपचुनाव में किसको वोट दें और न दें, उसके चयन करने में एपीएससीसी उसको मजबूर नही करेगी। 

   
उन्होने जाट आंदोलन की ओर इशारा करते हुए कहा कि इससे पूर्व हरियाणा में भी अल्पसंख्यकों को उनके अधिकार न दिए जाने पर आंदोलन हुए थे और तबाही मची थी। अगर उनको जल्द से जल्द राज्य में अल्पसंख्यक का दर्जा नही दिया जाएगा तो वे आंदोलन छेड़ेंगे, जिसमें अब वह जम्मू के सिखों को भी शामिल करेंगे। घाटी के हालातों पर चिंता व्यक्त करते हुए एपीएससीसी के अध्यक्ष ने कहा कि घाटी में हालात तनावपूर्ण हैं और यहां शांति बहाल करने के लिए एकमात्र तरीका है बातचीत का। इसलिए केंद्र और राज्य सरकार को इस पर ध्यान देना चाहिए।
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