जम्मू-कश्मीर: बढ़ती आतंकी घटनाओं पर नकेल कसेगी एसआईए, पुलिस के ऐसे अफसरों को मिलेगी जगह
बीते दो साल में एक हजार से ज्यादा ऐसी एफआईआर पुलिस थानों में दर्ज हुई हैं, जिसमें कहीं न कहीं आतंकवाद शामिल रहा है।
विस्तार
जम्मू-कश्मीर में आतंकी घटनाएं रोकने के लिए राज्य जांच एजेंसी (एसआईए) बनाई गई है। हर जगह आतंकी घुसपैठ के चलते पुलिस थानों पर लगातार बोझ बढ़ रहा था। अब इस एजेंसी में एक ऐसी टीम तैयार की जा रही है, जो आतंकवाद के मामले में प्रभावी साबित हो। जाहिर सी बात है कि पुलिस के ऐसे अफसरों और कर्मियों को इसमें लाने की कोशिश है, जो आतंक के गढ़ में काम कर चुके हैं। साथ ही जिनका आतंकवाद ग्रस्त क्षेत्रों में अच्छा नेटवर्क है। पुलिस के बहुत से इंस्पेक्टर हैं, जिनको आतंकी मामलों की अच्छी खासी जानकारी है।
सूत्रों का कहना है कि राज्य जांच एजेंसी में 100 से ज्यादा अफसरों और कर्मियों को तैनात करने का लक्ष्य रखा गया है। हालांकि अभी यह तय किया गया जा रहा है कि इसमें कितने एसएपी, डीएसपी, इंस्पेक्टर और सब इंस्पेक्टर स्तर के अफसर होंगे। लेकिन संभव है कि एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स की तरह ही यह काम करेगी।
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दो साल में एक हजार से ज्यादा एफआईआर
नशा तस्करों, जेलों में बंद अपराधियों, कारोबारियों, सरकारी मुलाजिमों, पुलिस कर्मियों, बाहरी राज्यों के कॉलेजों में पढ़ने वाले कश्मीरी छात्रों, पंजाब, बिहार और अन्य राज्यों में सक्रिय अपराधियों को आतंकी संगठन अपने साथ जोड़कर आतंकी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं।
आतंकवाद और नशा बढ़ी चुनौती
प्रदेश में आतंकवाद और नशा तस्करी बढ़ी चुनौती बन गए हैं। इनका पुलिस थानों पर काफी प्रभाव पढ़ रहा है। इसके चलते नशा तस्करी को लेकर तो एंटी नारकोटिक्स टास्क फोर्स का गठन किया गया, उसी तरह से आतंकवाद संबंधित मामलों की जांच और पुलिस थानों से बोझ कम करने के लिए राज्य जांच एजेंसी बनाई गई है।
इन एफआईआर में आतंकी हमले, बिस्फोटक और हथियार बरामदी, साइबर, ड्रोन, आदि किस्म की घटनाएं शामिल हैं। इन सभी एफआईआर की शुरूआती जांच पुलिस को करनी पड़ती है। जो सही से नहीं हो पा रही। दरअसल, पुलिस के पास मैनपावर की कमी है। जम्मू-कश्मीर पुलिस के थानों में 30 से 40 फीसदी तक की मैनपावर की कमी है। ऐसे में आतंकी घटनाओं के बढ़ते मामलों के बीच दूसरे मामलों की जांच भी प्रभावित होती है।