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श्रुति, चेतना और सबिता ने मनाली-लेह-श्रीनगर सर्किट पर साइकिलिंग कर दिया संदेश
Fri, 23 Jul 2021 01:49 AM IST
दुष्यंत शर्मा
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
अमृतपाल सिंह बाली, श्रीनगर
Published by: दुष्यंत शर्मा
Updated Fri, 23 Jul 2021 01:49 AM IST
सार
सबिता उत्तरकाशी में एक एडवेंचर इंस्टिट्यूट चलाती हैं और वह माउंटेनियरिंग में बेसिक और एडवांस कोर्स पूरा कर चुकी हैं। श्रुति एक पीजी स्टूडेंट हैं और माउंटेनियरिंग में सबिता की छात्रा भी। श्रुति और सबिता एक साथ नेपाल सर्किट पर भी साइकिलिंग कर चुकी हैं जबकि चेतना एक प्राइवेट एमएनसी में एचआर हैं और कई माउंटेन टैरेन बाइकिंग (एमटीबी) प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं।
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जागरूकता के लिए एक यात्रा....
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
समाज के लोगों में जागरुकता फैलाने और उनमें एक संदेश देने के उद्देश्य से देश की तीन बेटियों ने 1300 किलोमीटर की साइकिलिंग कर मनाली-लेह-श्रीनगर सर्किट पूरा किया। यह सर्किट पूरा करने वाली इन युवतियों में बिहार छपरा की सबिता महतो, उत्तर प्रदेश की चेतना सिंह और उत्तराखंड की श्रुति रावत शामिल हैं।
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सबिता उत्तरकाशी में एक एडवेंचर इंस्टिट्यूट चलाती हैं और वह माउंटेनियरिंग में बेसिक और एडवांस कोर्स पूरा कर चुकी हैं। श्रुति एक पीजी स्टूडेंट हैं और माउंटेनियरिंग में सबिता की छात्रा भी। श्रुति और सबिता एक साथ नेपाल सर्किट पर भी साइकिलिंग कर चुकी हैं जबकि चेतना एक प्राइवेट एमएनसी में एचआर हैं और कई माउंटेन टैरेन बाइकिंग (एमटीबी) प्रतियोगिताओं में भाग ले चुकी हैं।
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साइकिल से भारत घूमने का वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाने वाली सबिता ने अमर उजाला से बातचीत में कहा कि वह मनाली-लेह-श्रीनगर एक्सपीडिशन पर हैं और एक कॉज डू यू शेयर टू शो योर केयर के लिए राइड कर रही हैं। उनका यह मकसद है कि जहां अभी तक सरकार की सुविधाएं नहीं पहुंच पाई हैं वहां के लोगों को जागरूक करने की कोशिश की जा रही है।
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यह संदेश भी दिया कि जरूरी नहीं कि किसी एनजीओ या अन्य संस्था के जरिये ही मदद पहुंचाई जा सकती है, लेकिन अगर आपके आसपास कोई ऐसा है कि जिसके माता-पिता की कोविड के चलते मौत हुई है तो चार-पांच लोग मिलकर उसकी मदद के लिए आगे आ सकते हैं। सबिता के अनुसार यह समय है एक-दूसरे की मदद करने के लिए आगे आकर हाथ बढ़ाया जाए। हम लोग कोशिश कर रहे हैं कि यह संदेश दे सकें कि आज भी कुछ अच्छे लोग रहते हैं जो मदद करने के लिए आगे आते हैं।
पहली बार आए कश्मीर
सबिता ने बताया कि उन्होंने इससे पहले मनाली-लेह की यात्रा की है, पहली बार कश्मीर आए हैं। यहां के नजारे जितने सुंदर हैं उतने ही यहां के लोगों के जहन भी खूबसूरत हैं। सबिता ने बताया कि वह वर्ल्ड रिकॉर्ड होल्डर हैं और वर्ष 2017 में उन्होंने पूरे भारत की यात्रा साइकिल से की है। उन्होंने बताया कि लेह के बाद से कश्मीर तक सेना ने पूरा सहयोग दिया।
पहले उठाए सवाल फिर परिवार का भी मिला सहयोग
बताया कि शुरू में लड़कियां होने पर परिवार वालों ने सवाल उठाए थे, लेकिन बाद में पूरा सहयोग मिला। लेकिन हम सभी लड़कियों ने इस राइड पर निकलकर एक संदेश दिया कि लड़कियां कुछ भी कर सकती हैं। इस सफर के दौरान उत्तराखंड के सुजान सिंह अपनी बुलेट बाइक पर उनके साथ बैकअप के तौर पर थे। उन्होंने बताया कि यह राइड मुश्किल जरूर थी, लेकिन इस सफर के दौरान सभी का सहयोग अच्छा रहा। सुजान ने बताया कि इस दौरान जहां कहीं भी स्थानीय लोगों, बीआरओ या सेना से मदद की जरूरत पड़ी वहां उन्हें सभी से अच्छा सहयोग मिला।