{"_id":"658c7e16d332e0ca1a01b4a9","slug":"shrimadbhagwat-katha-samba-news-c-274-1-rsp1001-532-2023-12-28","type":"story","status":"publish","title_hn":"भक्ति मार्ग पर शिष्य के साथ रहते हैं भगवान: जोगिंदर शास्त्री","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
भक्ति मार्ग पर शिष्य के साथ रहते हैं भगवान: जोगिंदर शास्त्री
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पंच कुंडीय विष्णु यज्ञ और संत सम्मेलन के दूसरे दिन सुनाई भक्त प्रह्लाद की कथा
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। अरनिया के कूल कलां गांव के रघुनाथ आश्रम में पंच कुंडीय विष्णु यज्ञ और संत सम्मेलन के दूसरे दिन जोगिंदर शास्त्री ने भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि भक्ति के मार्ग पर भगवान अपने शिष्य के अंग संग रहते हैं। उस पर किसी प्रकार की विपत्ति आए तो वह खुद निपटा लेते हैं।
उन्होंने बताया कि भक्त प्रह्लाद ने हिरण्यकश्यप के घर में जन्म लिया था। प्रह्लाद बचपन से ही भक्ति के मार्ग पर चल पड़े थे। उनके पिता हिरण्यकश्यप अपने पुत्र की भक्ति के बिल्कुल खिलाफ थे। उन्होंने अपने पुत्र को भक्ति के मार्ग से हटाने के लिए कई प्रकार की यातनाएं दीं। लेकिन, भगवान ने अपने भक्त को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचने दी। कथावाचक बोले कि भक्ति का मार्ग भगवान का मार्ग होता है। उस पर चलकर परमार्थ का एहसास किया जाता है। पंच कुंडीय महाविष्णु यज्ञ और संत सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत हवन, यज्ञ और परिक्रमा के साथ की गई। उसके बाद 12 बजे जोगिंदर शास्त्री ने कथा शुरू की। तकरीबन 4 बजे कथा समाप्त कर आरती का आयोजन किया गया। उसके उपरांत संगत में प्रसाद वितरित किया गया।
विज्ञापन
संवाद न्यूज एजेंसी
अरनिया। अरनिया के कूल कलां गांव के रघुनाथ आश्रम में पंच कुंडीय विष्णु यज्ञ और संत सम्मेलन के दूसरे दिन जोगिंदर शास्त्री ने भक्त प्रह्लाद की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि भक्ति के मार्ग पर भगवान अपने शिष्य के अंग संग रहते हैं। उस पर किसी प्रकार की विपत्ति आए तो वह खुद निपटा लेते हैं।
उन्होंने बताया कि भक्त प्रह्लाद ने हिरण्यकश्यप के घर में जन्म लिया था। प्रह्लाद बचपन से ही भक्ति के मार्ग पर चल पड़े थे। उनके पिता हिरण्यकश्यप अपने पुत्र की भक्ति के बिल्कुल खिलाफ थे। उन्होंने अपने पुत्र को भक्ति के मार्ग से हटाने के लिए कई प्रकार की यातनाएं दीं। लेकिन, भगवान ने अपने भक्त को किसी प्रकार की हानि नहीं पहुंचने दी। कथावाचक बोले कि भक्ति का मार्ग भगवान का मार्ग होता है। उस पर चलकर परमार्थ का एहसास किया जाता है। पंच कुंडीय महाविष्णु यज्ञ और संत सम्मेलन के दूसरे दिन की शुरुआत हवन, यज्ञ और परिक्रमा के साथ की गई। उसके बाद 12 बजे जोगिंदर शास्त्री ने कथा शुरू की। तकरीबन 4 बजे कथा समाप्त कर आरती का आयोजन किया गया। उसके उपरांत संगत में प्रसाद वितरित किया गया।
विज्ञापन